भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना पूरे वर्ष का सबसे उत्तम और पवित्र समय माना जाता है। इस पावन मास में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित श्री सिद्ध भुवनेश्वर नाथ महाराज बाबा शिव मंदिर में शिव भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। भावनियापुर चौराहे के पास मौजूद इस ऐतिहासिक और चमत्कारिक मंदिर में श्रद्धालुओं का निरंतर तांता लगा रहता है। सावन के दौरान यहां का संपूर्ण वातावरण हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूर्ण समर्पण के साथ भोलेनाथ का जलाभिषेक करता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसी अगाध श्रद्धा और विश्वास के चलते केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त यहां दर्शन, पूजन और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए खिंचे चले आते हैं।
सपने में मिले ईश्वरीय आदेश से हुआ था निर्माण
इस अद्भुत और सिद्ध मंदिर का इतिहास बेहद रोचक और आस्था से भरा हुआ है। मंदिर के मुख्य पुजारी राम समुज महाराज के अनुसार, वर्तमान में जो भव्य मंदिर नजर आता है, उसका निर्माण करीब दो दशक यानी बीस वर्ष पूर्व ही किया गया था। इस स्थान को लेकर ऐसी लोक कथा गहराई से प्रचलित है कि प्राचीन काल में इसी पावन भूमि पर किसी सिद्ध ऋषि-मुनि ने वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उस तपस्वी के इस स्थान से प्रस्थान कर जाने के काफी समय बाद, गांव के ही एक साधारण व्यक्ति को रात्रि में एक चमत्कारिक स्वप्न आया। उस सपने में स्वयं भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और उसी पवित्र तपोस्थली पर अपना विग्रह (शिवलिंग) स्थापित करने का स्पष्ट संकेत दिया। ईश्वरीय आदेश प्राप्त होने के बाद उस व्यक्ति ने यह बात सबको बताई और फिर ग्रामीणों ने मिलकर वहां मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इसके बाद पूरे विधि-विधान से शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। उस दिन से लेकर आज तक यह स्थान लाखों लोगों की अगाध आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मात्र एक लोटा जल और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं महादेव
पुजारी राम समुज महाराज विस्तार से बताते हैं कि वैसे तो साल भर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन के हर सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि जैसे विशेष धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ती है। दर्शनार्थी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पवित्र गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और तरह-तरह के पुष्प अर्पित कर पूर्ण श्रद्धाभाव से जलाभिषेक करते हैं। इस सिद्ध पीठ की सबसे बड़ी महिमा यह है कि यहां पूरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ जलाभिषेक अथवा वैदिक मंत्रों के साथ रुद्राभिषेक करने वाले किसी भी भक्त की मुराद अधूरी नहीं रहती। इसके अलावा, जो लोग खर्चीला रुद्राभिषेक करवाने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते, उनके लिए भी एक विशेष संदेश है। वे यदि पूरी आस्था के साथ केवल एक लोटा जल भी शिवलिंग पर अर्पित कर दें, तो कृपालु भोलेनाथ उनकी वह साधारण प्रार्थना भी सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं।
पड़ोसी देश नेपाल से भी आते हैं शिव भक्त
श्री सिद्ध भुवनेश्वर नाथ मंदिर की ख्याति और चमत्कारों की गूंज केवल गोंडा की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। भक्तों की सुविधा और उत्साह को देखते हुए यहां नियमित रूप से प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को एक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय व्यापारी और श्रद्धालु बड़े पैमाने पर जुटते हैं। इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि के पावन पर्व, कजरी तीज और पूरे सावन के महीने में यहां किसी बड़े उत्सव जैसा माहौल रहता है और भव्य मेला लगता है। मंदिर की सिद्धियों की चर्चा इतनी दूर-दूर तक फैली हुई है कि गोंडा के अलावा आसपास के जिलों जैसे बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच से तो लोग आते ही हैं, अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए सीमा पार करके पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी शिव भक्त लंबी यात्रा कर दर्शन हेतु यहां पहुंचते हैं। सावन के इन पूरे तीस दिनों में यहां भक्ति, अटूट श्रद्धा और आस्था का एक बेहद अनूठा दृश्य देखने को मिलता है।




















