उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के मनकापुर विकासखंड में स्थित ग्राम सभा बन्दरहा का प्राचीन श्री सिद्धनाथ और श्री मोटे नाथ महादेव मंदिर इस पवित्र सावन महीने में श्रद्धालुओं की अपार आस्था का केंद्र बना हुआ है। पूरे सावन मास के दौरान यहां रोजाना बड़ी संख्या में भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि इस पावन धाम में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने और जल अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
रेलवे लाइन की खुदाई में मिला था सिद्धनाथ शिवलिंग
मंदिर की स्थापना की कहानी काफी अनोखी और दिलचस्प है। वर्षों पहले जब इस क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछाने का काम चल रहा था, तब जमीन की खुदाई के दौरान श्री सिद्धनाथ महादेव का एक दिव्य शिवलिंग प्राप्त हुआ था। इसके कुछ समय बाद गांव में एक दूसरी जगह पर खुदाई करते समय श्री मोटे नाथ महादेव का शिवलिंग मिला था। गांव के लोगों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि दोनों पवित्र शिवलिंगों की स्थापना एक ही मंदिर प्रांगण में की जाए, जिससे आने वाले श्रद्धालु एक ही स्थान पर भगवान शिव के दोनों स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सकें। इसी फैसले के तहत पहले श्री सिद्धनाथ महादेव के शिवलिंग की स्थापना की गई और फिर दोनों स्वरूपों को एक ही परिसर में प्रतिष्ठित कर दिया गया।
पूरे सावन लगा रहता है भक्तों का मेला और पूजन
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही मंदिर प्रांगण में तड़के सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर के सेवक नेकराम के अनुसार, श्रद्धालु अपने साथ गंगाजल, जल, बेलपत्र, धतूरा, फूल तथा विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्री लेकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने आते हैं। पूरे मंदिर परिसर में दिनभर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के गूंजते जयकारों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहता है। सावन के हर सोमवार और शुक्रवार को यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ जुटती है, जबकि पूरे महीने मंदिर परिसर में पारंपरिक मेले का आयोजन भी किया जाता है।
दूर-दराज के राज्यों से भी पहुंच रहे हैं श्रद्धालु
श्री सिद्धनाथ और श्री मोटे नाथ महादेव मंदिर की ख्याति केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित नहीं है। इस मंदिर में गोंडा के पड़ोसी जिलों जैसे बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, अयोध्या, गोरखपुर और राज्य की राजधानी लखनऊ से तो भक्त आते ही हैं, साथ ही चंडीगढ़ जैसे दूर-दराज के स्थानों से भी श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। जो श्रद्धालु ट्रेन या अन्य माध्यमों से यहां आना चाहते हैं, वे मनकापुर रेलवे स्टेशन पर उतरकर वहां से आसानी से उपलब्ध निजी वाहनों की मदद से सीधे मंदिर परिसर तक पहुंच सकते हैं। सावन भर चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान और मेले में हर साल दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।


















