नवरात्रि के आठवें दिन की जाने वाली विशेष पूजा ज्योतिषीय दृष्टि से राहु ग्रह के कष्टों को कम करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवदुर्गा का आठवां स्वरूप माता महागौरी राहु ग्रह पर अपना नियंत्रण रखती हैं। इस पावन तिथि पर देवी की आराधना के साथ कुछ निश्चित अनुष्ठान करने से कुंडली में राहु जनित दोष शांत होते हैं। जो जातक राहु की महादशा अथवा अंतर्दशा की मार झेल रहे हैं, उनके कष्टों के निवारण के लिए महाअष्टमी का दिन सबसे उपयुक्त अवसर माना गया है।
जटा नारियल के अर्पण से दूर होंगी जीवन की रुकावटें
अष्टमी पूजन के दौरान एक साबुत जटावाला नारियल लेकर माता महागौरी के चरणों में श्रद्धापूर्वक अर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात पूर्ण श्रद्धा एवं विधि-विधान से मां महागौरी का पूजन संपन्न करें। पूजा के समापन पर देवी के समक्ष हाथ जोड़कर राहु के दुष्प्रभाव, जीवन के तनाव और अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करें। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद इस नारियल को किसी बहती नदी अथवा स्वच्छ जलधारा में विसर्जित कर दें। यदि जल प्रवाह संभव न हो, तो इसे किसी अत्यंत जरूरतमंद व्यक्ति को दान स्वरूप दिया जा सकता है। ऐसा करने से राहु की उग्रता शांत होती है, जीवन में लगातार आ रही अड़चनों का समाधान निकलता है और अज्ञात या गुप्त शत्रुओं के भय से भी छुटकारा मिलता है।
संध्याकाल में कपूर और लौंग की धूप का प्रभाव
महाअष्टमी की शाम को सूर्यास्त के उपरांत एक स्वच्छ मिट्टी का दीपक तैयार करें। इस दीपक में शुद्ध कपूर रखें और उसके साथ दो साबुत लौंग डालकर प्रज्वलित करें। जब यह सामग्री जलने लगे, तो इसके पावन धुएं को घर के प्रत्येक कोने और कक्ष में घुमाएं। इसके बाद अपने पूजा कक्ष अथवा पवित्र स्थान पर शांत चित्त होकर बैठें और देवी के कल्याणकारी बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं श्रीं महागौर्यै नमः' का कम से कम 108 बार रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से जप करें। इस अनुष्ठान से घर में फैला राहु का नकारात्मक प्रभाव निष्प्रभावी होता है। साथ ही घर के वास्तु दोष संतुलित होते हैं और परिवार के सदस्यों के मध्य आपसी सामंजस्य तथा शांति में वृद्धि होती है।
कन्या पूजन में श्वेत वस्तुओं का विशेष दान
नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धालु घर-घर जाकर कन्या पूजन संपन्न करते हैं। नौ कन्याओं और एक लांगुरिया के चरण पखारकर उन्हें भोजन कराने के बाद जब उनकी विदाई का समय आए, तब विशेष सावधानी बरतें। विदाई के क्षणों में कन्याओं को उपहार स्वरूप सफेद रंग की वस्तुएं जैसे खीर, सफेद मिष्ठान, मखाना अथवा श्वेत वस्त्र भेंट करने चाहिए। माता महागौरी को श्वेत वर्ण अत्यंत प्रिय है, इसलिए श्वेत वस्तुओं के इस दान से वे अति प्रसन्न होती हैं। देवी के प्रसन्न होने से साधक पर राहु की छाया समाप्त होती है और दुर्भाग्य का शमन होता है।
रात्रि बेला में राहु शांति मंत्र का एकांत अनुष्ठान
महाअष्टमी की गहन रात्रि में आध्यात्मिक ऊर्जा का स्तर काफी ऊंचा रहता है। इस समय किसी एकांत और शांत स्थान पर आसन ग्रहण करें। सबसे पहले आंखें बंद करके श्वेत वस्त्रधारिणी माता महागौरी के करुणामयी स्वरूप का स्मरण और ध्यान करें। इसके उपरांत राहु के बीज मंत्र 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' का कम से कम 108 बार स्पष्ट उच्चारण के साथ जप करें। रात के इस विशेष जप से राहु की अशुभ किरणों का प्रभाव समाप्त होने लगता है और मानसिक अशांति दूर होती है। जो लोग लंबे समय से राहु की दशा के कारण अनिश्चितता और भय के दौर से गुजर रहे हैं, उनके जीवन में सकारात्मकता और नए मार्ग खुलते हैं।




















