राजस्थान के अजमेर जिले में बसी तीर्थ नगरी पुष्कर का ब्रह्मा घाट सिर्फ एक स्नान स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था की गवाही देने वाला तीर्थ है। पुष्कर सरोवर के 52 घाटों में शामिल यह घाट ब्रह्मा मंदिर से बेहद नजदीक होने के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ बड़े-बड़े वीवीआईपी मेहमानों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शास्त्रों में इस पूरे सरोवर और इसके घाटों का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व विस्तार से बताया गया है।
यहीं हुआ था सृष्टि रचयिता का यज्ञ
तीर्थ पुरोहितों की मानें तो सृष्टि के रचयिता जगत पिता ब्रह्मा जी ने खुद इसी घाट पर यज्ञ संपन्न किया था। इसी वजह से इस जगह का नाम ब्रह्मा घाट पड़ गया और तभी से यह स्थान धार्मिक अनुष्ठानों तथा पूजा-पाठ का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। सालों से यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार बना हुआ है।
सरोवर के हर घाट की अपनी पहचान
पुष्कर सरोवर के गऊ घाट, गणगौर घाट, वराह घाट, बद्री घाट, जयपुर घाट और गुर्जर घाट सहित सभी 52 घाटों का समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग महत्व है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इन घाटों पर पवित्र जल में डुबकी लगाकर पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कर्मकांड पूरे करते हैं। तीर्थ पुरोहित वैदिक रीति-रिवाज से पूजा कराकर श्रद्धालुओं के लिए सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर लगती है श्रद्धालुओं की भीड़
ब्रह्मा घाट का असली नजारा कार्तिक महीने में देखने को मिलता है। खासकर कार्तिक पूर्णिमा के दिन लाखों श्रद्धालु यहां स्नान करने पहुंचते हैं और भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद लेते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने, पितरों का तर्पण करने और सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से जीवन भर के पाप धुल जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि साल भर यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। घाट की पहचान केवल धार्मिक हलकों तक सीमित नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशहूर है। कई सालों से यह घाट नेताओं, कलाकारों, लेखकों और दूसरी जानी-मानी हस्तियों की आस्था का केंद्र रहा है।
नरेंद्र मोदी दो बार कर चुके हैं पूजा
ब्रह्मा घाट पर पूजा कराने वाले पुजारी कमल किशोर शर्मा बताते हैं कि ब्रह्मा मंदिर के करीब होने की वजह से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ दूसरे घाटों के मुकाबले हमेशा ज्यादा रहती है। उनके मुताबिक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक दो बार इस घाट पर आकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं। इसके अलावा अभिनेता गोविंदा सहित कई मशहूर अभिनेता, राजनेता, लेखक और अन्य गणमान्य लोग भी यहां आकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं, और इस तरह यह घाट राजस्थान की सीमाओं से बाहर भी अपनी अलग पहचान बना चुका है।




















