मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के दीनदयाल पुरम इलाके में एक ऐसा धार्मिक स्थल मौजूद है, जो आम मंदिरों से पूरी तरह अलग है। किसी ऊंचे पर्वत या किसी घने जंगल के स्थान पर यह मंदिर एक साधारण से मकान के परिसर में निर्मित है। लगभग 29 वर्षों की लंबी अवधि से जारी यह आध्यात्मिक यात्रा एक सामान्य परिवार के घरेलू अनुभव से आरंभ हुई थी। आज नागलवाड़ी भिलट देव का यह पावन धाम पूरे क्षेत्र के हजारों लोगों के अटूट विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि इस पवित्र स्थान पर नाग देवता का वास है और वे अपने भक्तों को दर्शन प्रदान करते हैं।
पानी के बर्तन से शुरू हुई चमत्कारिक घटना
इस अनूठी धार्मिक गाथा का आरंभ लगभग 29 साल पहले हुआ था। उस समय संतोष राठौड़ और उनकी पत्नी संध्या राठौर अपने नव निर्मित भवन में गृह प्रवेश का धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर रहे थे। शुरुआती दिनों में सभी गतिविधियां बिल्कुल सामान्य गति से चल रही थीं। अचानक एक दिन ऐसी अद्भुत घटना घटी जिसने इस पूरे परिवार की जीवन शैली और दृष्टिकोण को बदलकर रख दिया। संध्या राठौर जब अपने रसोई घर में दैनिक कार्य कर रही थीं, तब उनकी दृष्टि जल से भरे एक पात्र पर पड़ी। उस पानी के बर्तन के भीतर एक अत्यंत सूक्ष्म नाग तैरता हुआ दिखाई दिया।
वह नाग आकार में इतना महीन और सूक्ष्म था कि वह मनुष्य के बाल से भी ज्यादा पतला प्रतीत हो रहा था। इस अलौकिक दृश्य को देखकर संध्या राठौर चकित और भयभीत हो गईं। उन्होंने तुरंत अपने पति संतोष राठौड़ को बुलाकर इस विचित्र घटना की पूरी जानकारी दी। प्रथम दृष्टया संतोष राठौड़ को इस बात पर सहसा विश्वास नहीं हुआ। हालांकि, इसके बाद आने वाले कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें भी अपने घर के वातावरण में एक विशिष्ट और दिव्य शक्ति की उपस्थिति का निरंतर अहसास होने लगा था।
रहस्यमयी स्वप्न और विद्वानों का मार्गदर्शन
कुछ समय बीत जाने के पश्चात संध्या राठौर को रात्रि में एक विशेष स्वप्न आया। उस रहस्यमयी स्वप्न में नाग देवता ने स्वयं उपस्थित होकर उनसे कहा कि यह स्थान उनका अपना धाम है। इस स्वप्न के सामने आने के बाद राठौड़ परिवार अत्यंत सोच विचार में पड़ गया। मामले की गहराई और धार्मिक महत्व को समझते हुए उन्होंने स्थानीय पंडितों, धर्माचार्यों और प्रबुद्ध विद्वानों से संपर्क करके उचित सलाह प्राप्त की।
धार्मिक विद्वानों और ज्योतिषियों ने गहन अध्ययन के बाद बताया कि यह स्थल वास्तव में नागलवाड़ी क्षेत्र के अति प्राचीन भिलट देव यानी नाग देवता का पौराणिक स्थान है। समय के चक्र के साथ यह प्राचीन स्थान लुप्त हो गया था। विद्वानों ने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह उनके कुल का परम सौभाग्य है कि बाबा स्वयं उनके गृह परिसर में प्रकट हुए हैं। इस परामर्श के बाद राठौड़ परिवार ने बिना किसी विलंब के अपने घर के आंगन में ही भिलट देव के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। समय के साथ यह छोटा सा पारिवारिक पूजन स्थल एक विशाल जन आस्था के केंद्र में परिवर्तित हो गया, जहां अब दूर-दूर के क्षेत्रों से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।
बेटी के कथन पर 8 फीट लंबे नाग देवता के दर्शन
मंदिर के मुख्य सेवक संतोष राठौड़ अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताते हैं कि बीते वर्षों में नाग देवता ने उन्हें कई बार विभिन्न रूपों में अपनी उपस्थिति का अहसास कराया है। ऐसी ही एक स्मरणीय घटना का उल्लेख करते हुए वे बताते हैं कि एक बार उनकी बेटी ने सहज भाव से कहा कि बाबा अब पूर्व की भांति दर्शन नहीं देते हैं। ठीक उसी क्षण वहां एक विशालकाय सर्प प्रकट हो गया।
नाग देवता ने लगभग 7 से 8 फीट लंबे अत्यंत विशाल रूप में प्रत्यक्ष दर्शन दिए। इस अलौकिक और विस्मयकारी घटना को अपनी आंखों से देखने के बाद राठौड़ परिवार के साथ-साथ आसपास के पूरे जनसमुदाय की आस्था अत्यंत सुदृढ़ हो गई। इस प्रत्यक्ष अनुभूति ने लोगों के मन में स्थापित विश्वास को और अधिक गहरा कर दिया।
प्रकट उत्सव और नाग पंचमी पर उमड़ती है अपार भीड़
दीनदयाल पुरम स्थित इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष माघ मास की दूज तिथि को अत्यंत धूमधाम के साथ वार्षिक प्रकट उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, वृहद हवन और महाआरती के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन अनुष्ठानों में सम्मिलित होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज से खंडवा पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त नाग पंचमी के पावन पर्व पर भी यहां भक्तों का विशाल सैलाब उमड़ता है और संपूर्ण मंदिर प्रांगण भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है।
पिछले 29 वर्षों से लगातार चल रही इस पूजा पद्धति और जन आस्था के कारण यह मंदिर आज संपूर्ण खंडवा शहर की एक प्रमुख धार्मिक पहचान बन चुका है। यहां दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मंदिर में आकर नमन करने से कुंडली के नाग दोष समाप्त हो जाते हैं, सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं।



















