हांसी में लिव-इन पार्टनर ने की महिला की हत्या, सात साल की बेटी पर भी हमलाबिलासपुर में पारिवारिक विवाद खूनी संघर्ष में बदला, बड़े भाई और भाभी ने की छोटे भाई की हत्याउदयपुर के 62 वर्षीय श्रीरत्न मोहता का तिरंगा मिशन, 13 हजार लोगों को दिला चुके हैं मतदान का संकल्पसत्सुकी कटायामा का संकेत, बैंक ऑफ जापान सरकार से मिलकर 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करेमनोज जरांगे ने 20वें दिन तोड़ी भूख हड़ताल, महाराष्ट्र सरकार को दी तीन महीने की मोहलतराजस्थान में सरसों की बंपर पैदावार के लिए सितंबर में इन उन्नत किस्मों की करें बुवाईबिलासपुर में गणेशोत्सव की धूम, ₹500 के नोट पर विराजे बप्पा और छत्तीसगढ़ महतारी के रूप में दिखे गणेशसीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2027 की डेटशीट कब आएगी, जानिए पिछले 5 सालों का पूरा पैटर्नशुक्र अस्त 2026: 23 सितंबर से बढ़ेंगी इन 4 राशियों की मुश्किलें, 37 दिनों तक रहना होगा सतर्कपराली जलाने और प्रदूषण का टूटेगा चक्र, धान के अवशेष में आलू की खेती से किसानों की होगी बंपर कमाई
सहारनपुर में हजार साल पुराना जाहरवीर गोगा मेला, जब अंग्रेजी कलेक्टर को झुकना पड़ा थाधर्म
17 सित॰ 2026, 9:11 am (2 घंटे पहले)· 1

सहारनपुर में हजार साल पुराना जाहरवीर गोगा मेला, जब अंग्रेजी कलेक्टर को झुकना पड़ा था

सहारनपुर में लगने वाले पश्चिम भारत के सबसे बड़े जाहरवीर गोगा मेले का इतिहास एक सदी से भी पुराना है। साल 1807 में एक अंग्रेजी कलेक्टर ने इस मेले को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन कथित चमत्कार के बाद उसे अपना फैसला बदलना पड़ा था।

सहारनपुर में पश्चिम भारत का सबसे बड़ा मेला आयोजित होने जा रहा है, जिसका इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना है। यह ऐतिहासिक आयोजन सदियों से एक दिन के लिए आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान इसके स्वरूप में बदलाव आया और इसे तीन दिन का कर दिया गया। इस बदलाव के पीछे एक ब्रिटिश कलेक्टर का हाथ था, जिसने शुरुआत में इस परंपरा पर ऐतराज जताया था। अंग्रेजी कलेक्टर ने हिंदुओं की इस गहरी आस्था और बाबा के मेले को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और इस पर पूरी तरह रोक लगाने का फरमान जारी किया था। हालांकि, इसके बाद जो रहस्यमयी चमत्कार सामने आया, उसने उस ब्रिटिश अधिकारी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

साल 1807 का वह आदेश और मेले का इतिहास

इतिहास के पन्नों के अनुसार, वर्ष 1807 में जाहरवीर गोगा मेले को एक नाटक करार देते हुए अंग्रेज कलेक्टर ने इसे बंद कराने का सख्त हुक्म दिया था। लेकिन जब वह कलेक्टर अपने आवास पर लौटा और उसने अपने भोजन, बिस्तर तथा पूरे घर में अनगिनत सांपों को देखा, तब उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसे समझ आ गया कि इस धार्मिक आयोजन को रुकवाकर उसने बहुत बड़ी भूल कर दी है। इसके बाद वह अधिकारी तुरंत बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज के म्हाड़ी स्थल पर पहुंचा और वहां माथा टेककर अपनी गलती स्वीकार की। उसी घटना के बाद कलेक्टर ने इस मेले को एक दिन की बजाय तीन दिन तक आयोजित करने का आदेश पारित किया, और तब से लेकर आज तक यह मेला लगातार तीन दिनों तक ही भरता चला आ रहा है।

ये भी पढ़ें

अनिल प्रताप सैनी ने साझा की मेले से जुड़ी मान्यता

गोगा म्हाड़ी सुधार सभा के अध्यक्ष अनिल प्रताप सैनी ने इस ऐतिहासिक परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों को हमारी प्राचीन संस्कृति और रीति-रिवाजों की पूरी जानकारी नहीं थी। हमारे यहां अलग-अलग तरीकों से पूजा-पाठ की परंपरा रही है, चाहे वह मंदिरों में हो, हमारे खेतों की पूजा हो, या फिर अपने देव-पितरों की आराधना हो। इसी तरह यहां 26 छड़ियों की भी पूजा की जाती है। वर्ष 1807 में जब एक ब्रिटिश डीएम यहां आए और उन्होंने इस मेले को देखा, तो उन्होंने सवाल उठाया कि यह सब क्या चल रहा है और इसे एक नाटक बताकर बंद करने का हुक्म दे दिया। उस दौर में अंग्रेजी कलेक्टर के आदेश पर इस मेले पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन इसके तुरंत बाद ही बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज का चमत्कार दिखाई देने लगा।

चमत्कार के बाद बदला अधिकारी का रवैया

जब वह अंग्रेजी डीएम भोजन करने के लिए बैठे, तो उनकी थाली में सांप दिखाई दिए। जब वे अपने बिस्तर पर लेटने गए, तो वहां भी सांपों का डेरा था। जब उन्होंने छत की ओर देखा, तब उन्हें हर तरफ सांप ही सांप नजर आने लगे। इन घटनाओं के बाद उन्हें अपनी गलती का गंभीर अहसास हुआ कि उन्होंने मेले को बंद कराकर भारी भूल की है। इसके बाद उन्होंने तुरंत मेले वाले स्थल पर पहुंचकर नतमस्तक होकर अपनी गलती की माफी मांगी। पहले यह आयोजन केवल एक दिन का होता था, लेकिन उसी ब्रिटिश डीएम ने इसे तीन दिन तक आयोजित करने का निर्देश दिया। वर्तमान समय में इस मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां देश-विदेश से 10 से 15 लाख श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

जाहरवीर गोगा मेला कहाँ आयोजित होता है?
यह मेला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में आयोजित किया जाता है।
इस मेले का इतिहास कितने साल पुराना है?
इस मेले का इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना है।
किस वर्ष अंग्रेजी कलेक्टर ने मेले को बंद करने का आदेश दिया था?
वर्ष 1807 में एक अंग्रेज कलेक्टर ने इस मेले को बंद करने का आदेश दिया था।
अंग्रेजी कलेक्टर ने मेले को कितने दिन का करने का आदेश दिया?
चमत्कार के बाद कलेक्टर ने इस मेले को एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन का करने का आदेश दिया था।
इस मेले में कितने श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं?
इस मेले में लगभग 10 से 15 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR