छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में इस बार गणेशोत्सव के दौरान पंडालों में अनूठी रचनात्मकता देखने को मिल रही है, जहां विभिन्न समितियां अपनी कला और सामाजिक संदेश के जरिए श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। शहरभर में स्थापित इन प्रतिमाओं में आधुनिकता से लेकर पारंपरिक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे रंग घुले हुए हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी स्थानीय कलाकरों ने अपनी कल्पना के आधार पर भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूपों को जीवंत किया है, जो हर उम्र के दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
करबला गणेश उत्सव समिति की आधुनिक थीम
करबला गणेश उत्सव समिति की तरफ से इस बार आधुनिक जीवनशैली को बयां करती हुई एक बेहद अलग और दिलचस्प थीम तैयार की गई है। इस पंडाल में स्थापित गणेश प्रतिमा के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर जाना पड़ता है, जिसका निर्माण विशेष रूप से किया गया है। प्रतिमा के निचले हिस्से में भगवान गणेश को अपनी जोड़ी के साथ लेटी हुई अवस्था में उकेरा गया है, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। इस अनूठे शिल्प को निहारने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग रही हैं और लोग इस कला की सराहना कर रहे हैं।
टिकरापारा में जीव संरक्षण और देसी मुर्गी पर बप्पा
मां गणेश उत्सव समिति टिकरापारा में गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर भगवान गणेश को एक देसी मुर्गी पर विराया गया है, जिसके पीछे एक गहरा सामाजिक उद्देश्य छिपा है। समिति के सदस्यों का मानना है कि इस अनूठी प्रस्तुति के जरिए समाज को जीव संरक्षण का कड़ा संदेश देना है ताकि मूक प्राणियों की बेदर्दी से होने वाली हत्याओं पर रोक लग सके। उनका यह भी कहना है कि इस प्रकार के आयोजनों से आम जनमानस के मन में जानवरों के प्रति करुणा और सद्भावना जागृत होती है, जो आज के समय की एक बड़ी आवश्यकता बन गई है।
मन्नू चौक पर छाया ₹500 का नोट और धन की थीम
बिलासपुर के मन्नू चौक में सजे गणेश पंडाल का नजारा बेहद चौकाने वाला है क्योंकि यहां भगवान गणेश को सीधे ₹500 के भारतीय करेंसी नोट की थीम पर स्थापित किया गया है। केवल मूर्ति ही नहीं बल्कि पूरे पंडाल को बड़े ही करीने से नकली और सजावटी नोटों से ढंक दिया गया है, जो बिल्कुल असली मुद्रा जैसा आभास कराते हैं। यह भव्य सजावट और अनोखा कॉन्सेप्ट बाजार और आसपास के इलाकों में चर्चा का केंद्र बन गया है, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है और लोग इस अनूठेपन की तस्वीरें अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं।
जूनी लाइन में छत्तीसगढ़ महतारी और बस्तर कला की झलक
जूनी लाइन यानी जूना बिलासपुर का गणेश पंडाल अपनी पारंपरिक और सांस्कृतिक थीम के लिए हमेशा से जाना जाता है, और इस बार भी इसने निराश नहीं किया है। यहां इस पावन पर्व पर भगवान गणेश को छत्तीसगढ़ महतारी के छोटे से दुलारे बालक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो स्थानीय संस्कृति को गर्व महसूस कराता है। इसके साथ ही इस झांकी में छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल बस्तर की प्राचीन और प्रसिद्ध कला-कृतियों की सुंदर झलक भी देखने को मिल रही है, जो राज्य की समृद्ध विरासत को दर्शाती है।
डीपी कॉलेज टिकरापारा में पारिवारिक स्नेह की झांकी
एकता गणेश उत्सव समिति, डीपी कॉलेज टिकरापारा द्वारा एक बेहद भावुक और मनमोहक झांकी सजाई गई है जिसमें भगवान गणेश के साथ माता पार्वती और कार्तिकेय को बाल रूप में दिखाया गया है। इस मूर्ति शिल्प में मां पार्वती अपने नन्हे बालकों पर अपार स्नेह लुटाते हुए और उन्हें दुलारते हुए नजर आ रही हैं, जो देखने में बहुत जीवंत लगता है। परिवार के भीतर आपसी प्रेम, जुड़ाव और वात्सल्य को दर्शाती यह सुंदर प्रस्तुति पंडाल में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के दिल को छू रही है और परिवार के महत्व को रेखांकित कर रही है।
दयालबंद में बाल स्वरूप और तेलीपारा में शिव रूप
बाल गणेश उत्सव समिति दयालबंद टिकरापारा में भी बप्पा का मनोहारी बाल स्वरूप देखने को मिल रहा है, जिसके साथ माता पार्वती की उपस्थिति भी इस दृश्य को और पूर्ण बनाती है। मां और बच्चे के इस पावन रिश्ते को निहारने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंच रहे हैं और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। दूसरी ओर, बिलासपुर के तेलीपारा में इस बार गणेशोत्सव के दौरान एक और हैरान करने वाला रूप सामने आया है जहां भगवान गणेश को देवों के देव महादेव यानी भोलेनाथ के स्वरूप में विराजित किया गया है। तेलीपारा की यह अलौकिक प्रतिमा और इसकी भव्य सजावट भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकार का संदेश
संक्षेप में कहा जाए तो बिलासपुर में इस वर्ष का गणेशोत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न समितियों ने अपनी कला और झांकियों के माध्यम से समाज को एक आईना दिखाया है। कहीं पशुओं और जीवों की रक्षा का संकल्प लिया गया है तो कहीं आधुनिक जीवन के तौर-तरीकों, पारिवारिक मूल्यों और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को प्रमुखता से उभारा गया है। इन सभी अलग-अलग थीमों ने इस साल के उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया है और शहर के कोने-कोने में उत्सव का माहौल कायम कर दिया है।





















