अमेरिकी डॉलर की मजबूती से टूटा यूरो, तकनीकी स्तर पर 1.1113 का अहम सपोर्ट क्षेत्र बेहद संवेदनशीलजीमेल और ड्राइव के डेटा से गूगल दिखा रहा विज्ञापन, ऐसे रोकेंचक्रवाती तूफान अर्नब की आहट से सहमा रेल यातायात, 6 राज्यों में दर्जनों एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें रद्दसर्दियों में गैस संकट गहराने का जोखिम, यूरोप में कीमतें ऊंचे स्तर पर टिके रहने का अनुमानकरवा चौथ पर चंद्रदेव को जल चढ़ाते समय जरूर करें इन प्रभावशाली मंत्रों का जाप, मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदानमंगल की कक्षा में दशकों से डटे नासा के ओडिसी और MRO ऑर्बिटर, जानिए कैसे काम कर रही इनकी तकनीक और क्या है आगे का भविष्यवैश्विक तकनीक और AI क्रांति का नेतृत्व करे भारत, ESTIC 2026 में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीअमेरिका में 'सॉवरेन बेबी' ट्रेंड का बढ़ता क्रेज, सरकारी कागजातों के बिना बच्चों को पालने के दावे और इसके गहरे कानूनी खतरेएजिस लॉजिस्टिक्स के शेयरों में 340 प्रतिशत का उछाल, मजबूत नतीजों और ब्रेकआउट के बाद ब्रोकरेज ने दिया नया टारगेटराजधानी में मोबाइल ऐप से शराब की एडवांस बुकिंग शुरू, 48 घंटे में काउंटर से खुद उठानी होंगी बोतलें
उत्तर प्रदेश के संभल में है एक हजार साल पुराना मनु श्री कल्कि मंदिर, दक्षिण भारतीय शैली और अनोखे इतिहास से है नाताधर्म
27 अक्तू॰ 2026, 6:31 pm (7 घंटे पहले)· 0

उत्तर प्रदेश के संभल में है एक हजार साल पुराना मनु श्री कल्कि मंदिर, दक्षिण भारतीय शैली और अनोखे इतिहास से है नाता

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित मनु श्री कल्कि मंदिर एक हजार साल से अधिक पुराना है। दक्षिण भारतीय वास्तुकला शैली में बने इस अनोखे स्थल पर देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित मनु श्री कल्कि मंदिर अपनी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ ऐतिहासिक रूप से भी काफी अहमियत रखता है। ऐसा माना जाता है कि यह पवित्र स्थल एक हजार साल से भी अधिक पुराना है और इसकी बनावट एक प्राचीन नक्शे में भी दर्ज है, जहां मंदिर की आकृति के साथ इसका नाम मनु श्री कल्कि मंदिर दर्ज मिलता है।

दक्षिण भारतीय शैली और अनूठी वास्तुकला

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण शैली है, जिसे दक्षिण भारतीय शैली में तैयार किया गया है और उत्तर भारत में इस तरह की शैली बेहद दुर्लभ मानी जाती है। मंदिर के महंत का दावा है कि यह पूरे देश में भगवान कल्कि का अकेला मंदिर है। यही वजह है कि यहां केवल देश के विभिन्न हिस्सों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी सैलानी और भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।

ये भी पढ़ें

एक हजार साल से अधिक पुराना इतिहास

मंदिर के पुजारी महेंद्र शर्मा का कहना है कि इस धार्मिक स्थल को पहले मनु श्री कल्कि मंदिर के रूप में पुकारा जाता था, जिसे अब केवल कल्कि मंदिर कहा जाता है। उनके पास संभल क्षेत्र का एक हजार साल पुराना नक्शा मौजूद है जिसमें इस मंदिर का साफ तौर पर जिक्र किया गया है। हालांकि इस मंदिर के निर्माण की सही तारीख का पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह पूरी तरह तय है कि यह एक हजार साल से भी ज्यादा प्राचीन है। धार्मिक पुराणों के अनुसार, कलियुग के दौरान भगवान विष्णु का दसवां और अंतिम अवतार श्री कल्कि नारायण के रूप में संभल में ही होगा। इसी गहरी मान्यता के चलते करीब एक हजार साल पहले इस मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर आज भी भक्तों की अटूट श्रद्धा का बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की आस में हाजिरी लगाते हैं।

तीन सौ साल पहले हुआ था जीर्णोद्धार

इस ऐतिहासिक मंदिर का आखिरी बार जीर्णोद्धार करीब तीन सौ वर्ष पहले इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर की तरफ से करवाया गया था। मंदिर की पूरी शिल्पकला दक्षिण भारतीय परंपरा के मुताबिक गढ़ी गई है, जो इसे उत्तर भारत के बाकी मंदिरों से बिल्कुल अलग पहचान देती है। पुरातत्व विभाग और इतिहासकारों की तरफ से इस मंदिर के स्थापत्य और धार्मिक इतिहास पर अब तक कोई गहरा और विस्तृत शोध नहीं किया गया है, जिसके चलते यह मंदिर आज भी कई रहस्यों के आवरण में छिपा हुआ है। इसके बावजूद, स्थानीय नागरिकों और महंतों की आस्था के मुताबिक यह मंदिर धर्म के साथ-साथ संस्कृति और विरासत के लिहाज से एक अमूल्य थाती है।

सवाल-जवाब

मनु श्री कल्कि मंदिर कहां स्थित है?
यह प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित है।
यह मंदिर कितने वर्ष पुराना माना जाता है?
यह मंदिर एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन माना जाता है।
इस मंदिर की वास्तुकला किस शैली में है?
इस मंदिर का निर्माण दक्षिण भारतीय शैली में किया गया है जो उत्तर भारत में दुर्लभ है।
मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार किसने कराया था?
मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था।
मंदिर के वर्तमान पुजारी कौन हैं?
इस मंदिर के वर्तमान पुजारी महेंद्र शर्मा हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp