सनातन परंपरा में शारदीय नवरात्रि का पर्व बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इस महापर्व का आगाज होता है और यह नवमी तिथि तक चलता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 11 अक्तूबर से शुरू होकर 20 अक्तूबर तक मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों के दौरान जगत जननी मां अंबे की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
व्रत और पूजन का महत्व
नवरात्रि के दौरान माता की कृपा पाने के लिए व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने का विशेष विधान है। इस दौरान घरों और मंदिरों में घटस्थापना की जाती है और अखंड ज्योति जलाई जाती है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, इन दिनों में माता रानी की पूजा के साथ-साथ दुर्गा मां के मंत्रों और चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त नियमित रूप से पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन के तमाम संकट स्वतः समाप्त हो जाते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
दुर्गा चालीसा और आरती का नियम
धार्मिक अनुष्ठानों में किसी भी पूजा को तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसकी आरती न की जाए। इसी प्रकार, नवरात्रि के दिनों में दुर्गा चालीसा का पाठ करने के पश्चात माता दुर्गा की आरती गाना अनिवार्य माना गया है। विद्वानों का ऐसा मत है कि चालीसा पाठ के बाद आरती करने से ही साधक को उसकी साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इस दौरान भक्त माता के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए उनसे अपने दुखों को हरने की प्रार्थना करते हैं।
चालीसा के प्रमुख छंद और भाव
दुर्गा चालीसा में मां के अनेक रूपों और उनकी महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। चालीसा की शुरुआत मां के जयकारे से होती है, जिसमें उन्हें सुख और दुःख को दूर करने वाली शक्ति के रूप में दर्शाया गया है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार माता पूरे ब्रह्मांड का संचालन करती हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए विभिन्न अवतार धारण करती हैं। प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार हो या महिषासुर का वध करने के लिए कालिका रूप धारण करना, चालीसा में इन सभी पौराणिक प्रसंगों का सुंदर स्मरण मिलता है।
भक्तों को मिलने वाले फल
जो श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ मां की शरण में आते हैं, उनके सभी भय और कष्ट दूर हो जाते हैं। चालीसा के अंतिम छंदों में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति नित्यप्रति इसका गान करता है, वह सभी प्रकार के सुखों को भोगता है और अंत में परम पद को प्राप्त करता है। नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में यदि कोई जातक नियमित रूप से दुर्गा चालीसा का पाठ करे, तो उसे मां अंबे की विशेष अनुकंपा अवश्य प्राप्त होती है।

















