श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट गॉल में शुरू: स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद मैदान में उतरी भारतीय टीम, शुबमन गिल संभाल रहे कप्तानीकोमल रानी स्वर्णकार के साथ 2 फिल्मों में नजर आएंगे गोविंदा, अफेयर की चर्चाओं के बीच आया नया अपडेट80वें स्वतंत्रता दिवस पर गॉल में तिरंगा फहराते नजर आए भारतीय खिलाड़ी, सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा समेत कई दिग्गजों ने दिए खास संदेशगॉल में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराकर मैदान में उतरी टीम इंडिया, खेल रही अपना ऐतिहासिक 600वां टेस्टनागौर में 100 करोड़ रुपये की सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़, किराए के मकान से आरोपी महावीर गिरफ्तारनल्लामाला के जंगलों में ओखली में बिना सहारे टिकता है मूसल, श्रीशैलम के मल्लम्मा कन्नेरु की अनोखी परंपराजनरेशन जेड को लेकर मोहन भागवत की चेतावनी, कहा सही मार्गदर्शन न मिलने पर युवा बन सकते हैं समाज के लिए चुनौतीचंदौली में गंगा का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन चौकस, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने मारुफपुर में परखा तैयारी का हालउत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तेंदुए का खौफ, हमले में महिला की जान गई और कई जख्मी, वन विभाग ने तीन तेंदुए पकड़ेसशस्त्र बलों में क्लास-1 अधिकारी पद का रास्ता, खड़कवासला और एझिमाला की ट्रेनिंग में हैं ये बड़े बदलाव
तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी किनारे बसा जानकी कुंड, जानिए माता सीता के चरण चिह्नों और हवन स्थल की पावन गाथाधर्म
15 अग॰ 2026, 11:13 am (1 घंटे पहले)· 0

तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी किनारे बसा जानकी कुंड, जानिए माता सीता के चरण चिह्नों और हवन स्थल की पावन गाथा

चित्रकूट स्थित मंदाकिनी नदी के तट पर जानकी कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। वनवास काल में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के प्रवास से जुड़ा यह पवित्र स्थान अपने विशेष धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।

धार्मिक नगरी चित्रकूट को भगवान श्रीराम की पावन तपोभूमि के रूप में सर्वत्र जाना जाता है। पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रभु श्रीराम ने अपने 14 वर्षों के वनवास काल में से लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष का समय इसी पावन क्षेत्र में व्यतीत किया था। इस दौरान माता सीता और श्री लक्ष्मण जी भी उनके साथ चित्रकूट में निवास करते थे। यही कारण है कि चित्रकूट के प्रत्येक क्षेत्र और कण कण में रामायण काल की स्मृतियां समाहित हैं। इसी पावन धारा पर मंदाकिनी नदी के तट पर जानकी कुंड अवस्थित है, जहां आज भी प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता सीता के पावन चरण चिह्नों के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं।

मंदाकिनी तट पर अंकित माता सीता के चरण चिह्न

मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित जानकी कुंड को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र स्थल का दर्जा प्राप्त है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान माता जानकी इसी कुंड के निर्मल जल में नित्य स्नान करती थीं। जनश्रुति एवं धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि माता सीता के चरण इतने अति कोमल थे कि उनके पदचिह्न वहां की कठोर शिलाओं पर भी सदा के लिए अंकित हो गए। वर्तमान समय में भी यहां आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले शिला पर उभरे माता सीता के इन दिव्य चरण चिह्नों के दर्शन करते हैं। इसके उपरांत वे मंदाकिनी नदी के जल का आचमन कर विधि विधानपूर्वक पूजा अर्चना संपन्न करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।

ये भी पढ़ें

हवन कुंड का निर्माण और गायत्री मंत्र का पावन जाप

जानकी कुंड की धार्मिक पृष्ठभूमि और गतिविधियों के विषय में पुजारी राम अवतार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि वनवास काल के दौरान स्नान ध्यान के पश्चात माता सीता यहां नियमित रूप से देव पूजन और हवन कार्य करती थीं। इस उद्देश्य के लिए उन्होंने अपने पावन कर कमलों से स्वयं यहां एक विशेष हवन कुंड का निर्माण किया था। स्नान के उपरांत माता सीता इसी निर्मित हवन कुंड के समक्ष बैठकर गायत्री मंत्र का निरंतर जाप करते हुए आहुतियां देती थीं और हवन संपन्न करती थीं। इस स्थल पर बनी हवन की वेदी आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

श्रृंगार स्थल की परंपरा और जानकी कुंड का नामकरण

स्नान तथा पूजा हवन की प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात माता सीता जानकी कुंड के समीप बैठकर अपना श्रृंगार करती थीं। इस ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा के कारण ही कुंड के पास स्थित एक विशेष स्थान को माता सीता के श्रृंगार स्थल के नाम से मान्यता प्राप्त है। विशेष रूप से महिला श्रद्धालु यहां पहुंचकर अखंड सौभाग्य और सुखमय जीवन की प्रार्थना करते हुए विशेष पूजन करती हैं। प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साढ़े ग्यारह वर्षों के लंबे प्रवास के दौरान माता जानकी ने अनगिनत बार इस स्थान पर स्नान एवं पूजन किया। माता जानकी के नाम से जुड़ने के कारण ही इस पवित्र जल कुंड का नाम जानकी कुंड प्रसिद्ध हुआ।

सवाल-जवाब

चित्रकूट का जानकी कुंड किस नदी के तट पर स्थित है?
चित्रकूट स्थित जानकी कुंड पवित्र मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है।
वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने चित्रकूट में कितना समय बिताया था?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने वनवास काल का लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष का समय चित्रकूट में बिताया था।
जानकी कुंड में स्थित माता सीता के चरण चिह्नों की क्या मान्यता है?
मान्यता है कि वनवास के दौरान जब माता सीता मंदाकिनी नदी में स्नान करती थीं, तब उनके चरण अति कोमल होने के कारण शिला पर सदा के लिए उनके पदचिह्न अंकित हो गए थे।
जानकी कुंड पर माता सीता द्वारा निर्मित हवन कुंड की क्या विशेषता है?
पुजारी राम अवतार के अनुसार, स्नान के बाद माता सीता ने अपने हाथों से हवन कुंड तैयार किया था और वहां बैठकर गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए हवन संपन्न करती थीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR