छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में खेती को पर्यावरण अनुकूल और किफायती बनाने के लिए अन्नदाता प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी क्रम में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला दशपर्णी अर्क किसानों के बीच काफी लोकप्रिय साबित हो रहा है। बहुत कम लागत में तैयार होने वाला यह तरल घोल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले रस चूसक कीड़ों और इल्लियों की रोकथाम में बेहद कारगर है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. संदीप शर्मा के अनुसार, इस घरेलू कीटनाशक को आसानी से बनाकर फसलों की सुरक्षा की जा सकती है, जिससे खेत की पैदावार में भी सुधार देखने को मिलता है।
किन कड़वी पत्तियों के मेल से बनता है यह खास अर्क
इस प्राकृतिक मिश्रण का आधार मुख्य रूप से दस अलग-अलग पौधों की पत्तियां होती हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. संदीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि इसके लिए उन विशेष पत्तियों का चुनाव किया जाता है, जिनमें कुदरती तौर पर तेज कड़वाहट पाई जाती है। सामग्री जुटाते समय किसान करंज, बेल, बेशरम, हल्दी और पपीता जैसी लगभग 10 प्रकार की वनस्पतियों की पत्तियां एकत्र करते हैं। इन पौधों के प्राकृतिक गुण कीटों को दूर भगाने में अत्यंत असरदार भूमिका निभाते हैं।
घरेलू ड्रम में इस विधि से तैयार करें पूरा घोल
दशपर्णी अर्क बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए सबसे पहले 200 लीटर की क्षमता वाला एक प्लास्टिक का ड्रम लिया जाता है। इस ड्रम में पूरे 200 लीटर पानी के साथ लगभग 10 लीटर गोमूत्र तथा 1 से 2 किलो गोबर की खाद मिलाई जाती है। इसके साथ ही इसमें हल्दी पाउडर, तीखी मिर्च, हींग और तंबाकू की पत्तियां डाली जाती हैं। अंत में पहले से चयनित 10 प्रकार की कड़वी पत्तियों को इस पूरे घोल में डालकर अच्छी तरह मिला दिया जाता है।
चालीस दिनों की तैयारी और छानने की प्रक्रिया
सभी जरूरी सामग्रियां ड्रम में डालने के बाद इस मिश्रण को हर दिन नियमित रूप से घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज घुमाया जाता है। इस पूरी जैविक प्रक्रिया को परिपक्व होने में करीब 40 दिन का समय लगता है। चालीस दिन पूरे हो जाने पर तैयार घोल को किसी साफ सूती कपड़े या बारीक छन्नी से अच्छी तरह छान लिया जाता है। छना हुआ शुद्ध तरल ही दशपर्णी अर्क कहलाता है, जो खेतों में छिड़काव के लिए पूरी तरह तैयार रहता है।
खेतों में प्रयोग का अनुपात और लाभ लेने वाली फसलें
तैयार अर्क के सही उपयोग को लेकर डॉ. शर्मा ने बताया कि सामान्य तौर पर 5 से 6 लीटर दशपर्णी अर्क को 250 लीटर पानी में घोला जाता है। यह मात्रा एक हेक्टेयर खेत में छिड़काव करने के लिए बिल्कुल पर्याप्त होती है। यह घोल पौधों पर हमला करने वाले हानिकारक रस चूसक कीटों और विनाशकारी इल्लियों का खात्मा करने में सक्षम है। किसान भाई इसका सुरक्षित उपयोग अरहर, उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों के अलावा कई अन्य फसलों पर भी आसानी से कर सकते हैं।



















