तेलंगाना के महबूबनगर जिले में जडचेर्ला के पास बाधापल्ली पहाड़ी यानी बाधापल्ली गुट्टा पर स्थित ऐतिहासिक श्री रंगनायक स्वामी मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हरी-भरी वादियों और विशाल शिलाखंडों के बीच बसी यह पावन स्थली विशेष तौर पर खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए अटूट आस्था का धाम मानी जाती है। मंदिर परिसर में मौजूद एक प्राकृतिक जलकुंड को लेकर किसानों के मन में गहरा विश्वास है, जिसके चलते वे दूर-दराज से यहां खिंचे चले आते हैं।
फसलों की रक्षा के लिए पवित्र जल ले जाने की परंपरा
इस धाम से जुड़ी एक बेहद अनूठी मान्यता यह है कि स्थानीय कृषक मंदिर के पवित्र कुंड से जल भरकर अपने घरों और खेतों तक ले जाते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परिपाटी के तहत किसान बोतलों और विभिन्न बर्तनों में यह जल सहेजते हैं। उनका मानना है कि जब इस पावन जल का छिड़काव खेतों में खड़ी फसलों पर किया जाता है, तो फसलों को कीट-पतंगों के हमले और गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है। वैज्ञानिक युग में भी क्षेत्र के अन्नदाता इस प्राचीन व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताते हुए हर मौसम में नियमित रूप से कुंड का जल लेने पहुंचते हैं।
गुफा के भीतर शेषनाग की शैय्या पर शयन मुद्रा में विग्रह
बाधापल्ली पहाड़ी की प्राकृतिक गुफा में स्थित गर्भगृह अपने आप में अद्भुत आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। यहां भगवान श्री रंगनायक स्वामी का दुर्लभ स्वरूप स्थापित है, जिसमें प्रभु शेषनाग की शैय्या पर विश्राम मुद्रा में शयन करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। कठोर चट्टानों के बीच निर्मित इस प्राकृतिक मंदिर में आने वाले दर्शनार्थी प्रभु की इस दुर्लभ छवि को देखकर अलौकिक सुकून महसूस करते हैं।
श्रावण मास में वार्षिक जात्रा और पूरे साल श्रद्धालुओं की आवक
पवित्र श्रावण मास के अवसर पर मंदिर प्रांगण में हर वर्ष एक विशाल वार्षिक मेले यानी जात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के जिलों से हजारों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहाड़ी ऊंचाई पर स्थित होने के बावजूद यहां आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती रही हैं, जिनमें पहाड़ी रास्तों का रखरखाव और परिसर की नियमित स्वच्छता शामिल है। यह शांत पहाड़ी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने प्राकृतिक परिवेश के कारण मानसिक शांति चाहने वालों के लिए भी एक विशेष गंतव्य बनी हुई है।



















