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उज्जैन में गुप्त साधना का सिलसिला तेज, बगलामुखी धाम में मिर्च यज्ञ और महाविद्याओं की पूजा शुरूधर्म
20 जुल॰ 2026, 2:56 pm (72 दिन पहले)· 2

उज्जैन में गुप्त साधना का सिलसिला तेज, बगलामुखी धाम में मिर्च यज्ञ और महाविद्याओं की पूजा शुरू

उज्जैन के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में गुप्त नवरात्रि के मौके पर 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा, हवन और मिर्च यज्ञ शुरू हो गया है, जिसमें देशभर से साधक और श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में इन दिनों गुप्त नवरात्रि का पर्व चल रहा है और शहर के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में शक्ति उपासना का माहौल गहरा गया है। 9 दिन तक चलने वाले इस पर्व में मंदिर परिसर में 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा, अभिषेक, हवन और तांत्रिक अनुष्ठान लगातार हो रहे हैं। मंदिर में इन दिनों मिर्च यज्ञ भी शुरू किया गया है, जिसे शत्रु बाधा से मुक्ति, विजय प्राप्ति, कार्य सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए खास माना जाता है। गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों से श्रद्धालु और साधक दर्शन और साधना के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं।

दस महाविद्याओं की साधना का केंद्र बना मंदिर

उज्जैन के इस बगलामुखी मंदिर में दस महाविद्याओं का विशेष पूजन किया जा रहा है। इनमें मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी यानी षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। मान्यता है कि हर महाविद्या का अपना अलग तांत्रिक और आध्यात्मिक महत्व होता है, इसलिए साधक अपनी-अपनी मनोकामना के अनुसार अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। श्रद्धालु हवन कुंड में आहुति देकर मां बगलामुखी की उपासना कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में की गई साधना बहुत जल्दी फल देती है, यही वजह है कि तंत्र साधना से जुड़े साधकों के लिए यह पर्व साल की सबसे अहम अवधि मानी जाती है।

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साल में चार नवरात्रि, आषाढ़ की सबसे गोपनीय

मंदिर के महंत रामनाथ महाराज के मुताबिक साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में आम श्रद्धालु बड़ी तादाद में देवी की आराधना करने पहुंचते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि खासतौर पर तंत्र साधना और दस महाविद्याओं की उपासना के लिए आरक्षित मानी जाती है। इसी वजह से इन दिनों देशभर से साधक सीधे उज्जैन के बगलामुखी मंदिर का रुख करते हैं।

रात में दीपों की रोशनी में मंत्र जाप और हवन

रात होते ही मंदिर परिसर में साधक दीप जलाकर मंत्र जाप, हवन और विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों में जुट जाते हैं। इसका मकसद आध्यात्मिक सिद्धि हासिल करना और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देवी का आशीर्वाद पाना होता है। हवन में विशेष सामग्री की आहुति देकर श्रद्धालु शत्रु बाधा से छुटकारे और कार्यों में सफलता की कामना कर रहे हैं। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और नवरात्रि पूरी होने तक पूजा, हवन और अनुष्ठानों का यह सिलसिला रोज इसी तरह चलता रहेगा।

भक्तों को प्रसाद के रूप में मिल रहा सिंदूर

महंत रामनाथ महाराज ने बताया कि नवरात्रि के दौरान हर दिन मंदिर में अलग स्वरूप की देवी की पूजा की जाती है। मां की पूजा के लिए रोजाना एक कुंतल सिंदूर मंदिर में पहुंच रहा है। यह सिंदूर पहले देवी को अर्पित किया जाता है और उसके बाद उसी सिंदूर को श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ घर ले जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

गुप्त नवरात्रि कब तक चलेगी?
गुप्त नवरात्रि 9 दिनों तक चलने वाला पर्व है और इस दौरान उज्जैन के बगलामुखी मंदिर में विशेष पूजा-अनुष्ठान जारी रहेंगे।
बगलामुखी मंदिर में किन देवियों की पूजा हो रही है?
मंदिर में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला यानी 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा की जा रही है।
मिर्च यज्ञ किसलिए किया जा रहा है?
शत्रु बाधा से मुक्ति, विजय प्राप्ति, कार्य सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर में मिर्च यज्ञ कराया जा रहा है।
मंदिर में किन राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं?
गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों से श्रद्धालु और साधक मंदिर में पहुंच रहे हैं।
भक्तों को प्रसाद में क्या दिया जा रहा है?
भक्तों को मां को अर्पित किया गया सिंदूर प्रसाद के रूप में दिया जा रहा है, जिसके लिए रोजाना एक कुंतल सिंदूर मंदिर में आ रहा है।
आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि खास क्यों मानी जाती है?
महंत रामनाथ महाराज के मुताबिक साल की चार नवरात्रियों में माघ और आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि खासतौर पर तंत्र साधना और 10 महाविद्याओं की उपासना के लिए सबसे विशेष मानी जाती है।
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