सावन के पवित्र महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है, जो पूरी तरह से देवों के देव महादेव की भक्ति के लिए समर्पित है। इस पावन अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस वर्ष सावन माह के दौरान बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों को चार प्रमुख सोमवारों पर चार अलग और भव्य रूपों में अलौकिक दर्शन देंगे। इसके साथ ही सावन पूर्णिमा पर भी मंदिर में विशेष दिव्य शृंगार का आयोजन किया जाएगा।
प्रथम सोमवार पर शंकर स्वरूप में दर्शन
सावन का पहला सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। इस विशेष अवसर पर बाबा विश्वनाथ का शृंगार शंकर स्वरूप में किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस दिन गर्भगृह में एक अस्थायी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे मनमोहक ताजे फूलों से सजाया जाएगा। सप्तऋषि आरती के संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं को इस मनभावन प्रतिमा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। फूलों की सुगंध और वैदिक मंत्रों के बीच बाबा का यह स्वरूप भक्तों को अद्भुत शांति प्रदान करेगा।
द्वितीय सोमवार को गौरी शंकर स्वरूप की झांकी
इसके बाद सावन के दूसरे सोमवार 10 अगस्त को श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के अति पावन गौरी शंकर स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। धार्मिक मान्यताओं में इस स्वरूप को अत्यंत अलौकिक माना गया है, क्योंकि इसमें भगवान शिव और माता पार्वती एक साथ दर्शन प्रदान करते हैं। सर्वसाधारण के लिए दर्शन द्वार खोले जाने से पूर्व गौरी शंकर स्वरूप का भव्य और दर्शनीय शृंगार पूरा किया जाएगा। मान्यता है कि इस अलौकिक रूप के दर्शन से पारिवारिक जीवन में सुख का आगमन होता है।
तृतीय सोमवार को अर्धनारीश्वर रूप में भव्य शृंगार
सावन महीने का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को आयोजित होगा। इस पावन तिथि पर बाबा विश्वनाथ का शृंगार अर्धनारीश्वर के रूप में किया जाना निश्चित हुआ है। अर्धनारीश्वर स्वरूप भगवान शिव और माता पार्वती के एकाकार होने तथा संपूर्ण ब्रह्मांड के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो भी भक्त सावन के सोमवार पर इस स्वरूप का दर्शन और ध्यान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
चतुर्थ सोमवार को 5 लाख रुद्राक्षों से सजावट
सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त के दिन मनाया जाएगा। इस अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ मंदिर में एक अद्वितीय दृश्य देखने को मिलेगा, जब बाबा विश्वनाथ का शृंगार 5 लाख रुद्राक्ष के दानों से किया जाएगा। इसी कारण इस अद्भुत स्वरूप को रुद्राक्ष स्वरूप नाम दिया गया है। शृंगार में उपयोग किए गए इन 5 लाख रुद्राक्षों को बाद में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा, जिससे भक्त इस पवित्र प्रसाद को अपने घर ले जा सकेंगे।
सावन पूर्णिमा पर पूरे परिवार के साथ दिव्य दर्शन
सावन माह की पूर्णिमा तिथि 27-28 अगस्त को पड़ रही है, जिस दिन मंदिर में विशेष उत्सव का माहौल रहेगा। इस दिन बाबा विश्वनाथ अपने अलौकिक और दिव्य स्वरूप में दर्शन देंगे। पूर्णिमा के अवसर पर बाबा के लिए विशेष झूले का शृंगार किया जाएगा, जहां वे अपने संपूर्ण शिव परिवार के साथ विराजमान होकर भक्तों को आशीर्वाद देंगे। सावन के इस अंतिम पर्व पर दर्शन करने के लिए वाराणसी में दूर-दूर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।



















