वर्ष 2026 के अंतिम चंद्र ग्रहण का समापन 28 अगस्त को होने के साथ ही आम लोगों और खगोल प्रेमियों के बीच आगामी सूर्य ग्रहणों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। साल 2026 में लगने वाले सूर्य ग्रहण पहले ही बीत चुके हैं, इसलिए अब सभी की नजरें वर्ष 2027 पर टिक गई हैं। वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण अत्यधिक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इसके साथ ही भारतीय सनातन परंपरा में इसका गहरा धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी स्वीकार किया गया है। वर्ष 2027 में कुल दो सूर्य ग्रहण लगने का योग बन रहा है, जिनमें से एक ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। पहला ग्रहण 6 फरवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर पड़ेगा, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अगस्त को घटित होगा।
6 फरवरी 2027 का पहला सूर्य ग्रहण: मकर राशि, श्रवण नक्षत्र और दृश्यता
वर्ष 2027 का पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी को मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर लगेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस ग्रहण की अवधि के दौरान सूर्य देव मकर राशि और श्रवण नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। मकर राशि और श्रवण नक्षत्र का यह संयोग धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, भारतीय संदर्भ में इस ग्रहण की विशेष बात यह है कि यह ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। खगोलीय नियमों और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण किसी स्थान पर दृश्य नहीं होता, उसका वहां कोई धार्मिक या आध्यात्मिक प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए 6 फरवरी के ग्रहण के दौरान भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा और न ही दैनिक पूजा-पाठ व मांगलिक कार्यों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लागू होगा।
2 अगस्त 2027 का दूसरा सूर्य ग्रहण: भारत में समय और 6 मिनट 23 सेकंड का महा-अंधेरा
साल 2027 का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा। यह ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार इस ग्रहण का प्रारंभ दोपहर करीब 3:53 बजे होगा और इसका समापन शाम 5:02 बजे होगा। जब यह ग्रहण घटित होगा, उस समय सूर्य देव कर्क राशि और पुष्य नक्षत्र में संचार कर रहे होंगे।
यह घटना 21वीं सदी का दूसरा सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होने जा रही है। ग्रहण के चरम के दौरान दुनिया के कुछ चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों में दिन के समय ही पूर्ण अंधेरा छा जाएगा। यह अनोखा अंधकार लगभग 6 मिनट और 23 सेकंड तक बना रहेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी स्पेन, मोरक्को, लीबिया, मिस्र, सूडान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, यमन और सोमालिया जैसे देशों में नजर आएगा। विशेष रूप से मिस्र के ऐतिहासिक लक्सर शहर के निवासियों और पर्यटकों को सबसे लंबी अवधि तक इस पूर्ण सूर्य ग्रहण का विहंगम दृश्य अनुभव करने का अवसर मिलेगा। भारत में यह ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखेगा।
सूर्य ग्रहण काल के नियम: क्या करें और क्या न करें
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्रों में सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है ताकि इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सके
- भोजन संबंधी नियम: ग्रहण काल के दौरान भोजन पकाना और भोजन ग्रहण करना दोनों ही वर्जित माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण की किरणें खाद्य पदार्थों को प्रभावित करती हैं।
- घर से बाहर निकलने पर रोक: ग्रहण के समय सामान्य जन और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए, ताकि अवांछित किरणों का प्रभाव न पड़े।
- पूजा-पाठ एवं मंदिर: ग्रहण काल में मूर्तियों को स्पर्श करना और औपचारिक पूजा-पाठ करना मना होता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट पूरी तरह बंद रखे जाते हैं।
- शारीरिक गतिविधियां: ग्रहण अवधि में सोना, नहाना, शरीर की मालिश करना, बाल काटना और नाखून काटना जैसे कार्य अशुभ माने गए हैं।
- मंत्र जाप और स्मरण: ग्रहण के दौरान मन ही मन इष्ट देव या भगवान के मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव निष्प्रभावी हो जाते हैं।
- ग्रहण के बाद दान: ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद स्नान करना चाहिए और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान करना चाहिए।



















