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अंतरिक्ष में भारत बढ़ाएगा निगरानी की ताकत, इसरो 4 सितंबर को लॉन्च करेगा अत्याधुनिक सैटेलाइट EOS-05विज्ञान
3 सित॰ 2026, 12:58 pm (1 दिन पहले)· 1

अंतरिक्ष में भारत बढ़ाएगा निगरानी की ताकत, इसरो 4 सितंबर को लॉन्च करेगा अत्याधुनिक सैटेलाइट EOS-05

इसरो 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है। जियोसिंक्रोनस कक्षा से यह उपग्रह आपदा प्रबंधन, कृषि और सीमा सुरक्षा की लगातार निगरानी करेगा।

भारत अंतरिक्ष से अपनी धरती और सीमाओं पर नजर रखने की क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 4 सितंबर को तड़के 2.55 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को लॉन्च करेगा। यह मिशन केवल एक नियमित उपग्रह प्रक्षेपण नहीं है, बल्कि देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली, पर्यावरणीय निगरानी और रणनीतिक सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जियोसिंक्रोनस कक्षा और हाई-फ्रीक्वेंसी इमेजरी की ताकत

EOS-05 सैटेलाइट को पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इस विशेष ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह उपग्रह एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र पर लगातार और बिना रुके नजर बनाए रखने में सक्षम होगा। इस उपग्रह की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत इसकी हाई-फ्रीक्वेंसी इमेजिंग क्षमता है। यह प्रणाली चुने हुए संवेदनशील क्षेत्रों की तस्वीरें हर पांच मिनट में उपलब्ध करा सकती है। वहीं, पूरे भारतीय भूभाग का व्यापक कवरेज करीब 30 मिनट के अंतराल पर हासिल किया जा सकेगा, जिससे जमीनी गतिविधियों की सटीक जानकारी मिलती रहेगी।

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आपदा प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में बहुआयामी उपयोग

लगातार मिलने वाली उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों से नागरिक प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भारी मदद मिलेगी। प्राकृतिक आपदाओं जैसे अचानक आने वाली बाढ़, समुद्री चक्रवात और जंगलों में लगने वाली भीषण आग की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की योजना तेजी से बनाई जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, कृषि और पर्यावरण निगरानी के क्षेत्र में भी यह सैटेलाइट इमेजरी अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इसके माध्यम से फसलों की स्थिति, वनस्पतियों के स्वास्थ्य और मौसमी बदलावों का सटीक आकलन किया जा सकेगा, जो देश की खाद्य सुरक्षा और संसाधन प्रबंधन के लिए सहायक होगा।

सीमा सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी में भूमिका

सरकारी दस्तावेजों में EOS-05 को रणनीतिक उपयोगकर्ताओं के लिए तैयार अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह के रूप में भी दर्ज किया गया है। लगातार इमेजरी प्राप्त होने से देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और तटीय समुद्री क्षेत्रों में होने वाली हर हलचल पर नजर रखी जा सकेगी। इस उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों को जमीन पर मौजूद सर्विलांस सिस्टम, अन्य सैटेलाइट नेटवर्क और खुफिया जानकारियों के साथ मिलाकर रणनीतिक योजनाएं तैयार करने में बड़ी मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा और स्पेस एसेट का सुदृढ़ीकरण

यद्यपि EOS-05 को सीधे तौर पर एक सैन्य जासूसी उपग्रह नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसका प्राथमिक स्वरूप अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह का ही है, लेकिन इसकी निरंतर निगरानी क्षमता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्ति बनाती है। GSLV-F17 के माध्यम से इस उपग्रह का प्रक्षेपण भारत की देखने, समझने और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को नए आयाम देगा। यही कारण है कि इस आधुनिक उपग्रह को अंतरिक्ष में भारत की नई और सबसे असरदार नजर के रूप में देखा जा रहा है।

सवाल-जवाब

EOS-05 सैटेलाइट कब और कहां से लॉन्च होगा?
यह सैटेलाइट 4 सितंबर को सुबह 2.55 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाएगा।
EOS-05 को किस कक्षा में स्थापित किया जाएगा?
इसे पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
यह सैटेलाइट कितनी बार तस्वीरें भेजने में सक्षम है?
यह उपग्रह चुने हुए संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें हर 5 मिनट में और व्यापक भारतीय क्षेत्र की कवरेज हर 30 मिनट में उपलब्ध करा सकता है।
EOS-05 का मुख्य उद्देश्य और उपयोग क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन, फसलों व पर्यावरण की निगरानी करना तथा सीमाओं एवं समुद्री क्षेत्रों की रणनीतिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
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