देशभर में हर साल हजारों लोग, मवेशी और बेजुबान वन्यजीव हाईटेंशन बिजली की तारों और करंट की चपेट में आने से अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं. गांवों की पगडंडियों से लेकर शहरों तक फैले बिजली नेटवर्क में फॉल्ट की वजह से होने वाले हादसे आम बात हैं. आए दिन होने वाले इन जानलेवा हादसों की खबरें पढ़कर और इंटरनेट पर देखकर राजस्थान में भारत और पाकिस्तान की सीमा के पास बसे बाड़मेर के एक स्कूली छात्र ने इस गंभीर समस्या का तकनीकी हल ढूंढ निकाला है.
चौहटन के सरकारी स्कूल के छात्र ने तैयार किया खास प्रोजेक्ट
बाड़मेर जिले के चौहटन उपखंड क्षेत्र में स्थित डेलूओ का तला गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के छात्र महेंद्र चौधरी ने ट्रांसमिशन लाइन फॉल्ट सेफ्टी प्रोजेक्ट तैयार किया है. महेंद्र ने अपने इस नवाचार के माध्यम से ट्रांसमिशन लाइनों में होने वाली तकनीकी गड़बड़ियों के समय तुरंत सुरक्षा मुहैया कराने का एक मॉडल पेश किया है.
लाइन टू लाइन और लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट पर तुरंत कटेगी बिजली
महेंद्र चौधरी ने अपने इस मॉडल में बिजली परिपथ में पैदा होने वाली जटिल तकनीकी समस्याओं को बहुत बारीकी से सुलझाने की व्यवस्था की है. जब भी ट्रांसमिशन लाइन में लाइन टू लाइन फॉल्ट आता है या फिर कोई तार टूटकर जमीन के संपर्क में आकर लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट का कारण बनता है, तो यह सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है. ऐसी आपात स्थिति पैदा होते ही यह डिवाइस बिना किसी देरी के स्वतः ही बिजली आपूर्ति बंद कर देता है, जिससे करंट फैलने का खतरा खत्म हो जाता है.
कम लागत में इंसान और बेजुबानों की रक्षा का सरल समाधान
इस पूरे सुरक्षा उपकरण को बहुत ही न्यूनतम खर्च पर विकसित किया गया है ताकि इसे आसानी से उपयोग में लाया जा सके. महेंद्र ने बताया कि उनके घर के आसपास करंट लगने से वन्यजीवों और पक्षियों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं, जिसने उन्हें यह मॉडल बनाने की प्रेरणा दी. इस स्वचालित सिस्टम के जरिए अब इंसानों, मवेशियों और वन्यजीवों को असमय मौत से बचाया जा सकता है. सीमावर्ती गांव की स्कूल से निकली इस पहल ने साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगन और सूझबूझ से बड़े सामाजिक संकटों का समाधान निकाला जा सकता है.



















