कैलिफोर्निया के इरविन शहर में स्थित एक नवाचार कंपनी के परिसर में सुबह की धूप चढ़ने के साथ ही बीस फीट ऊंची धातु की एक विशाल मशीन सक्रिय दिखती है। बाहर का तापमान 80 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर पहुंच चुका है और तकनीकी दल के सदस्य आईपैड स्क्रीन पर लगातार ऊपर की ओर जाती रेखा की निगरानी कर रहे हैं। यह मशीन किसी भारी भरकम मोटर या ग्रिड कनेक्शन पर निर्भर हुए बिना, सूखी हवा से सीधे पानी सोखने और उसे उपयोगी तरल में बदलने के लिए बनाई गई है। इस पूरी प्रक्रिया की रीढ़ धातु-जैविक ढांचा (मेटल ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क यानी MOF) नाम का खास पदार्थ है।
इस क्रांतिकारी रासायनिक संरचना के जनक और कंपनी के संस्थापक उमर यागी हैं, जिन्हें वर्ष 2025 में रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी कंपनी अटोको ने शुरुआती प्रोटोटाइप के जरिए यह साबित किया है कि यह तकनीक हर दिन गैलन के हिसाब से पानी का उत्पादन कर सकती है। इस नए मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे हवा से नमी सोखने या फिर उस पदार्थ में से पानी निचोड़कर बाहर निकालने के लिए किसी बिजली कनेक्शन या भारी पावर ग्रिड की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है।
डेटा सेंटरों की व्यर्थ गर्मी बनेगी पानी का ईंधन
इस पूरे चक्र को पूरा करने के लिए केवल कम तापमान वाली औद्योगिक गर्मी की जरूरत होती है। यही वजह है कि इसे आज के समय में तेजी से फैल रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI डेटा सेंटरों के साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। ये बड़े डेटा सेंटर दिन-रात जटिल गणनाओं और सर्वर लोड के कारण भारी मात्रा में अत्यधिक गर्म हवा बाहर फेंकते हैं और साथ ही अपने उपकरणों को ठंडा रखने के लिए लाखों गैलन पानी की खपत करते हैं।
अटोको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सामर ताहा बताते हैं कि चार या पांच साल पहले तक उन्होंने कभी AI डेटा सेंटरों के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा था। मगर दुनिया भर में डेटा केंद्रों के अप्रत्याशित विस्तार ने एक ऐसा अवसर तैयार कर दिया है, जिससे जल संकट से जूझ रहे इलाकों तक राहत पहुंचाने के बड़े लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकता है।
आणविक स्पंज की तरह काम करती है यह अनूठी सामग्री
यूसी इरविन के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज के डीन सेथ कोहेन, जो इस कंपनी से सीधे जुड़े हुए नहीं हैं, इस ढांचागत पदार्थ की तुलना बच्चों के खेलने वाले 'जंगल जिम' जैसी जालीदार संरचना से करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से MOF दरअसल ऐसे ठोस आणविक स्पंज हैं, जो हवा में मौजूद अन्य अणुओं को अपने भीतर तेजी से और भारी मात्रा में सोखने में बेहद माहिर होते हैं। जिस तरह एक साधारण स्पंज को दबाकर पानी निकाला जाता है, उसी तरह इस सामग्री पर नियंत्रित गर्मी देकर इसके भीतर जमे अणुओं को मुक्त कराया जाता है।
इस सूक्ष्म जालीदार बनावट के अंदर अकल्पनीय मात्रा में खाली जगह होती है, जिसे रासायनिक स्तर पर मामूली बदलाव करके और भी बढ़ाया जा सकता है। उमर यागी का कहना है कि सिर्फ एक ग्राम MOF के भीतर की आंतरिक सतह का कुल क्षेत्रफल दो फुटबॉल मैदानों के बराबर फैल सकता है। इस अथाह जगह का इस्तेमाल स्वच्छ ऊर्जा के लिए हाइड्रोजन रखने, स्वच्छ हवा के लिए कार्बन डाइऑक्साइड रोकने या फिर पानी की बूंदों को संचित करने के लिए किया जा सकता है।
कंपनी के शोध एवं विकास (R&D) विभाग के उपाध्यक्ष बेनजी लिमकेटकाई के अनुसार, उन्होंने ऐसी सटीक सामग्री विकसित की है जो पानी को आकर्षित तो करती है, लेकिन उसे इस कदर जकड़कर नहीं रखती कि उसे बाहर निकालना असंभव हो जाए। इसे व्यावसायिक रूप से सफल बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि पानी निकालने में न्यूनतम ऊर्जा लगे। सामर ताहा के मुताबिक वैज्ञानिकों ने उस स्तर की शुद्धता हासिल की है, जहां उन्हें सामग्री के भीतर हर एक परमाणु के सटीक कोण तक का ज्ञान होता है।
कम नमी और कम गर्मी में भी काम करने की क्षमता
जब हवा इस खास MOF से होकर गुजरती है, तो पानी के अणु इसके छिद्रों से चिपक जाते हैं। पूरी तरह नमी से भर जाने के बावजूद यह पदार्थ छूने पर बिल्कुल सूखा महसूस होता है और हाथ से दबाने पर इसमें से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती। पानी को बाहर लाने के लिए कंपनी कम तापमान वाली गर्मी का सहारा लेती है। हवा से पानी खींचने के लिए आमतौर पर सिलिका जैसे पदार्थों का भी उपयोग किया जाता है, लेकिन सेथ कोहेन बताते हैं कि सिलिका बहुत कम नमी रोक पाता है और उससे पानी छुड़ाने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान पर तपाना पड़ता है।
इरविन स्थित परिसर में रखी यह मशीन कई दशकों के सटीक वैज्ञानिक अनुसंधान का परिणाम है। यह उपकरण 10 से 19 प्रतिशत जैसी बेहद कम सापेक्षिक आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) वाले सूखे वातावरण में भी काम करने में सक्षम है। ताहा के अनुसार, इसमें लगे MOF मात्र 100 डिग्री फारेनहाइट जितनी हल्की गर्मी पाकर भी पानी को सोखने और मुक्त करने का काम कर सकते हैं।
परीक्षण के दौरान निकट में कोई वास्तविक डेटा सेंटर न होने के कारण, लगभग 150 डिग्री फारेनहाइट तापमान वाले स्रोत से पाइप के जरिए गर्मी भेजकर कृत्रिम माहौल तैयार किया गया। मशीन में लगी छोटी सौर प्लेट केवल सहायक प्रणालियों को चलाती है, न कि पानी खींचने की मुख्य प्रक्रिया को। सुबह 9 बजे के कुछ देर बाद, जब बाहर का पारा 90 डिग्री फारेनहाइट पार कर गया, तब एक बटन दबाकर नल की टोंटी घुमाते ही उसमें से शीशे की तरह साफ पानी की धार बहने लगी। हालांकि कानूनी नियमों के कारण इसे सीधे पीने के लिए नहीं दिया जा सकता, लेकिन यह आसुत जल (डिस्टिल्ड वॉटर) के बराबर शुद्ध है क्योंकि यह सामग्री हवा के प्रदूषण को अपने भीतर नहीं खींचती।
औद्योगिक बर्बादी से स्वच्छ जल का सृजन
सामर ताहा बताते हैं कि दुनिया भर में लगभग 70 प्रतिशत औद्योगिक अपशिष्ट गर्मी कम स्तर की होती है, जिसका कोई इस्तेमाल नहीं होता और उसे यूं ही समुद्र या वायुमंडल में छोड़ दिया जाता है। यदि इस बेकार बहने वाली गर्मी को इस तकनीक से स्वच्छ पानी में बदला जाए, तो खरबों लीटर पीने योग्य पानी का उत्पादन किया जा सकता है।
डेटा सेंटर आज इस गर्मी का सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत बन चुके हैं। एक अकेला बड़ा डेटा केंद्र हजारों घरों जितनी गर्मी बाहर निकाल सकता है। ऑपरेटरों को इस भारी ताप को आसपास के पर्यावरण में छोड़ना पड़ता है, जिससे गर्मी के द्वीप (हीट आइलैंड) बनते हैं और साथ ही उन्हें भारी-भरकम शीतलन प्रणालियों का खर्च उठाना पड़ता है। इनमें से कई कूलिंग सिस्टम पानी पर आधारित होते हैं और रोजाना लाखों गैलन पानी पी जाते हैं। अटोको की यह व्यवस्था डेटा सेंटरों की दोनों बड़ी समस्याओं का एक साथ समाधान करती है—वे गर्मी से छुटकारा पाने के लिए भारी निवेश करते हैं और यह मशीन उसी गर्मी को सोखकर उन्हें बदले में वही पानी लौटा देती है जिसकी उन्हें जरूरत होती है।
भविष्य का विस्तार और व्यावसायिक चुनौतियां
इसके अलावा कंपनी उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक भी पानी पहुंचाना चाहती है, जहां बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण जल निगमों को टैंकरों से पानी ढोना पड़ता है। हालांकि इस स्तर पर पहुंचने के लिए उत्पादन क्षमता को बहुत बड़ा रूप देना होगा। वर्तमान प्रोटोटाइप रोजाना 300 लीटर तक पानी पैदा कर सकता है। कंपनी की योजना कई इकाइयों को ग्रिड के रूप में जोड़कर बड़े डेटा सेंटरों में लगाने की है और वह एक ऐसी व्यावसायिक इकाई पर काम कर रही है जो प्रतिदिन 1,000 लीटर पानी दे सकेगी। मौजूदा मॉडल 20 किलोवाट क्षमता वाले डेटा सेंटर की गर्मी के बराबर ऊर्जा पर चलता है, जबकि विशाल हाइपरस्केल डेटा सेंटर इससे कई गुना बड़े होते हैं।
अटोको ने अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में अपने भागीदारों के साथ पांच प्रोटोटाइप परीक्षण शुरू किए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि वह इस वर्ष के अंत तक अपने पहले उत्पाद के लिए व्यावसायिक ऑर्डर लेना शुरू कर देगी। बड़े तकनीकी दिग्गजों के साथ डेटा सेंटरों में पायलट प्रोजेक्ट लगाने को लेकर बातचीत चल रही है। बाजार में इसके लिए अनुकूल माहौल भी है क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेज़न वेब सर्विसेज जैसी प्रमुख कंपनियों ने वर्ष 2030 तक 'वॉटर पॉजिटिव' बनने का संकल्प लिया है, जिसका अर्थ है कि वे जितना पानी इस्तेमाल करेंगी, उससे अधिक समुदायों को वापस लौटाएंगी।
डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) में MOF परियोजनाओं पर काम कर चुके सेथ कोहेन आगाह करते हैं कि यद्यपि यह सामग्री असीम संभावनाओं से भरी है, फिर भी यह हर जगह पानी की समस्या का जादुई समाधान नहीं हो सकती। यदि बाहर से मिलने वाली गर्मी का कोई स्रोत न हो, तो बेहतरीन MOF को भी पानी निकालने के लिए बाहरी ऊर्जा की दरकार होगी। यह पहलू ग्रामीण इलाकों में तैनाती को कठिन बना सकता है, क्योंकि वहां अक्सर ऊर्जा ढांचे की भारी कमी होती है।
लागत के मोर्चे पर ताहा बताते हैं कि कंपनी 5 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की लागत से पानी बना सकती है, जो पुराने खारे पानी को मीठा बनाने वाले डिसेलिनेशन संयंत्रों के बराबर है। हालांकि आधुनिक नए डिसेलिनेशन प्लांट 2 डॉलर प्रति टन या उससे भी कम लागत में पानी तैयार कर लेते हैं, और उस आंकड़े तक पहुंचने में अटोको को अभी तीन से पांच साल का समय लग सकता है।
उमर यागी अपने बचपन को याद करते हैं जब वह जॉर्डन में एक फिलिस्तीनी शरणार्थी के रूप में पले-बढ़े थे। उस समय हर दो हफ्ते में पानी का एक टैंकर आता था और उनकी जिम्मेदारी अपने घर के लिए ज्यादा से ज्यादा बर्तनों में पानी भरकर रखने की होती थी। उनका कहना है कि उस अनुभव ने उन्हें पानी की कमी और उसकी कीमत को गहराई से समझना सिखाया, और अब यह तकनीक उसी अभाव को प्रचुरता में बदलने का प्रयास कर रही है।



















