कड़ाके की ठंड वाली रातों के दौरान जब कभी सड़क के लैंपों के ऊपर से आसमान तक जाती हुई लंबी और चमकदार पट्टियां नजर आती हैं, तो यह नजारा किसी जादू या तिलिस्म जैसा अहसास कराता है। देखने में ऐसा प्रतीत होता है मानो आसमान में रोशनी के बड़े-बड़े खंभे खड़े कर दिए गए हों। हालांकि, इस अद्भुत दृश्य के पीछे कोई रहस्य या चमत्कार नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से विज्ञान से जुड़ी एक दिलचस्प प्राकृतिक घटना है जिसे लाइट पिलर्स के नाम से जाना जाता है।
ये लाइट पिलर्स आकाश में दिखाई देने वाली सीधी, लंबी और बेहद चमकदार लकीरें होती हैं। ये आमतौर पर स्ट्रीट लैंप, ऊंची इमारतों पर लगी लाइटों या प्रकाश के अन्य कृत्रिम स्रोतों के ठीक ऊपर उभरती हैं। कुछ विशेष और दुर्लभ परिस्थितियों में सूरज और चांद की रोशनी से भी इस तरह के प्रकाश स्तंभ निर्मित हो सकते हैं। इस प्रकार का यह अनोखा नजारा खास तौर पर अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में देखने को मिलता है, जहां की हवा में बर्फ के अतिसूक्ष्म क्रिस्टल तैरते रहते हैं।
आसमान में इन प्रकाश स्तंभों के निर्माण के पीछे मुख्य रूप से बर्फ के क्रिस्टल्स और जमीन से आने वाली रोशनी की अहम भूमिका होती है। इस पूरी प्रक्रिया को तीन सरल चरणों के जरिए आसानी से समझा जा सकता है। सबसे पहले चरण में, अत्यधिक ठंडे मौसम के दौरान हवा में बर्फ के बेहद छोटे कण तैरने लगते हैं, जो इतने बारीक होते हैं कि इन्हें नग्न आंखों से देखना कठिन होता है। दूसरे चरण में, सड़क पर लगी लाइटों या किसी इमारत से निकलने वाली कृत्रिम रोशनी इन सूक्ष्म क्रिस्टल्स पर पड़ती है, जहां इन क्रिस्टल की सतहें छोटे दर्पणों की तरह काम करते हुए प्रकाश को परावर्तित करने लगती हैं। तीसरे और अंतिम चरण में जब बहुत बड़ी संख्या में इन क्रिस्टल्स की दिशा एक अनुकूल क्रम में होती है, तो उनसे परावर्तित होने वाली रोशनी सीधे हमारी आंखों तक पहुंचती है। इन सभी से मिलने वाला प्रकाश मिलकर आकाश में एक लंबी चमकदार पट्टी का भ्रम पैदा करता है, यानी असल में आसमान में कोई ठोस खंभा नहीं बनता, बल्कि यह केवल रोशनी और बर्फ के क्रिस्टल्स से पैदा होने वाला एक प्रकाशीय प्रभाव होता है।
लोगों के मन में यह सवाल भी अक्सर आता है कि क्या ऐसे लाइट पिलर्स हर ठंडी रात में दिखाई देते हैं। इसका जवाब है कि ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। केवल तापमान का गिरना इसके लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ हवा में बर्फ के क्रिस्टल्स का होना, उनकी दिशा का अनुकूल होना और आसपास पर्याप्त मात्रा में रोशनी का मौजूद होना भी जरूरी है। जब ये सभी परिस्थितियां एक साथ एक ही समय पर मिलती हैं, तभी यह आकर्षक नजारा देखने को मिलता है।
इन लाइट पिलर्स का रंग भी अलग-अलग स्रोतों के हिसाब से भिन्न हो सकता है। पीली रंग की स्ट्रीट लाइटों से बनने वाले प्रकाश स्तंभ सुनहरे रंग के दिखाई दे सकते हैं, जबकि सफेद रोशनी से बनने वाले स्तंभ बिल्कुल सफेद नजर आते हैं। इसके अलावा, सूर्यास्त के समय प्राकृतिक रोशनी से बनने वाले इन स्तंभों में नारंगी या लाल रंग की झलक भी साफ दिखाई दे सकती है।
क्या इस तरह की खगोलीय घटनाएं किसी प्रकार से खतरनाक होती हैं? लाइट पिलर्स अपने स्वभाव में किसी भी तरह से खतरनाक नहीं होते हैं। यह विशुद्ध रूप से एक प्राकृतिक प्रकाशीय घटना है और यह किसी भी आने वाली प्राकृतिक आपदा का पूर्व संकेत नहीं देती है। हालांकि, जिन इलाकों में इस प्रकार के नजारे अक्सर दिखाई देते हैं, वहां की कड़ाके की ठंड और बर्फीले मौसम से जुड़ी सावधानियां बरतना आवश्यक होता है.
इस पूरी परिघटना की सबसे दिलचस्प बात यह है कि आसमान में खड़े नजर आने वाले ये रोशनी के खंभे असल में हवा में मौजूद बर्फ के छोटे क्रिस्टल्स से परावर्तित प्रकाश का ही कमाल होते हैं। मौसम की सही स्थिति, प्रकाश का उचित स्रोत और क्रिस्टल्स की अनुकूल दिशा मिलकर एक ऐसा दृश्य रचते हैं जो पहली नजर में किसी काल्पनिक फिल्म के दृश्य जैसा प्रतीत होता है।


















