रात के वक्त समुद्र तट पर खड़े होने पर कई बार एक बेहद अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। जब पानी की लहरें किनारे की तरफ बढ़ती हैं, तो उनका रंग नीला चमकने लगता है। पानी को हाथ से छूने या हिलाने पर भी वैसी ही नीली चमक पैदा होती है, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो समंदर के अंदर कोई बिजली दौड़ रही हो। यह कोई जादू-टोना नहीं बल्कि प्रकृति का एक वैज्ञानिक करिश्मा है, जिसे बायोल्यूमिनेसेंस कहा जाता है।
समुद्र के भीतर चमक पैदा करने वाले सूक्ष्म जीव
समुंदर का पानी खुद से किसी प्रकार की रोशनी उत्पन्न नहीं करता है। इसके पीछे असल वजह पानी के अंदर तैरने वाले अत्यंत सूक्ष्म जीव होते हैं, जिन्हें डाइनोफ्लैजेलेट कहा जाता है। ये इतने छोटे जीव होते हैं कि इन्हें खुली आंखों से देखना मुश्किल होता है, लेकिन इनकी कुछ प्रजातियों के पास अपने शरीर के भीतर एक विशेष रासायनिक प्रक्रिया करने की क्षमता होती है। जब रात के अंधेरे में पानी हिलता-डुलता है या लहरें उठती हैं, तो ये जीव सक्रिय होकर नीली रोशनी बाहर छोड़ते हैं।
हलचल होने पर कैसे जगमगा उठता है पानी
इस पूरी प्राकृतिक घटना का सबसे खास पहलू यह है कि यह पानी में होने वाली किसी भी प्रकार की हलचल के बाद ही नजर आती है। जब कोई इंसान समुद्र के पानी में अपने हाथ से लहरें पैदा करता है, कोई नाव पानी को चीरते हुए आगे निकलती है या फिर समंदर की लहरें चट्टानों और किनारे से टकराती हैं, तब ये जीव रक्षात्मक या स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में रोशनी उत्सर्जित करते हैं। इसी वजह से कई बार लहरों के किनारों पर लंबी नीली रेखाएं उभर आती हैं।
पैरों के आसपास चमक और जीवों की संख्या का खेल
कोई व्यक्ति जब इस तरह के पानी से होकर गुजरता है, तो उसके पैरों के आसपास भी नीली चमक साफ दिखाई दे सकती है। हालांकि, यह जादुई नजारा पूरी तरह से इस बात पर टिका होता है कि उस खास हिस्से में उन सूक्ष्म जीवों की आबादी कितनी घनी है। इसके अलावा, पर्यावरण की परिस्थितियां उन जीवों के चमकने के अनुकूल हैं या नहीं, यह बात भी इस चमकीले प्रभाव को तय करती है।
बायोल्यूमिनेसेंट बे और अंधेरे का महत्व
ऐसी खाड़ियां जहां यह अनोखी घटना बहुत स्पष्ट रूप से और बड़े पैमाने पर दिखाई देती है, उन्हें बायोल्यूमिनेसेंट बे के नाम से जाना जाता है। इन जगहों पर पानी के भीतर प्रकाश पैदा करने वाले जीवों की तादाद बहुत अधिक होती है, जिसकी वजह से पूरी पानी की सतह नीली चमक से सराबोर हो जाती है। यह खूबसूरत नजारा रात के घुप अंधेरे में सबसे ज्यादा साफ दिखाई देता है, क्योंकि आसपास की अन्य कृत्रिम या तेज रोशनी के कम होने पर पानी की यह भीतरी चमक आंखों को साफ नजर आती है।
प्रकृति का वैज्ञानिक चमत्कार और भ्रम
कई लोग इस अद्भुत दृश्य को देखकर इसे कोई रहस्यमयी या जादुई करिश्मा मान बैठते हैं, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। बायोल्यूमिनेसेंस प्रकृति का एक पूरी तरह से स्थापित वैज्ञानिक प्रभाव है, जिसे जीव विज्ञान के जरिए आसानी से समझाया जा सकता है। समुद्र में पाए जाने वाले कुछ खास सूक्ष्म जीव अपने शरीर के भीतर होने वाली रासायनिक क्रिया के बल पर प्रकाश बाहर निकालते हैं और पानी की हलचल इस छिपी हुई चमक को बाहर लाने का जरिया बनती है।
कल्पना और हकीकत का मेल
संक्षेप में कहा जाए तो समुद्र के भीतर नीली बिजली जैसी दिखने वाली यह चमक असल में उन नन्हें-मुन्ने जीवों की देन है। रात का अंधेरा, उठती हुई समंदर की लहरें और पानी के अंदर इन जीवों की मौजूदगी मिलकर एक ऐसा सम्मोहक वातावरण तैयार करती हैं, जो किसी परी कथा या काल्पनिक दुनिया जैसा महसूस होता है।


















