उम्र के असर को धीमा करने और मानव शरीर की जैविक घड़ी की रफ्तार मोड़ने की दिशा में काम कर रही जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों में एक नई हलचल देखी जा रही है। कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू स्थित रुबेडो लाइफ साइंसेज ने उम्र बढ़ने के सबसे प्रत्यक्ष संकेत यानी इंसानी त्वचा को केंद्र में रखकर एक खास शोध आगे बढ़ाया है। कंपनी ने हाल ही में बोस्टन शहर में आयोजित एजिंग रिसर्च एंड ड्रग डिस्कवरी बैठक के दौरान अपने प्रायोगिक टॉपिकल उपचार से जुड़े शुरुआती आंकड़े साझा किए हैं। इन नतीजों से संकेत मिलता है कि यह दवा त्वचा पर दिखने वाले बुढ़ापे के लक्षणों को प्रभावी रूप से कम करने की क्षमता रखती है।
जॉम्बी कोशिकाओं का खात्मा और परीक्षण के नतीजे
इस शुरुआती परीक्षण में शोधकर्ताओं ने एटोपिक डर्मेटाइटिस से जूझ रहे 11 मरीजों की त्वचा पर अपनी प्रयोगात्मक क्रीम का इस्तेमाल किया। एटोपिक डर्मेटाइटिस दरअसल एक्जिमा का सबसे आम प्रकार है, जिसमें त्वचा गंभीर सूजन और जलन की चपेट में आ जाती है। यह दवा सीधे तौर पर कोशिकीय सेनेसेंस की प्रक्रिया को लक्षित करती है। सेनेसेंस एक ऐसी जैविक अवस्था होती है जिसमें क्षतिग्रस्त अथवा तनावग्रस्त कोशिकाएं हमेशा के लिए विभाजित होना बंद कर देती हैं, मगर पूरी तरह मरती भी नहीं हैं। वैज्ञानिक जगत में जॉम्बी सेल्स के नाम से पहचानी जाने वाली ये निष्क्रिय कोशिकाएं उम्र बढ़ने के साथ शरीर में जमा होने लगती हैं। धीरे-धीरे ये ऐसे रासायनिक तत्व छोड़ती हैं जो आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं और सूजन पैदा करके बीमारियों का कारण बनते हैं।
लगातार चार हफ्तों तक इस क्रीम का उपयोग करने के बाद प्रतिभागियों की त्वचा की जैविक उम्र में औसतन दो वर्ष की गिरावट दर्ज की गई। इस उम्र की गणना मिट्रा बायो नामक एक स्वतंत्र कंपनी द्वारा तैयार की गई एजिंग क्लॉक के जरिए की गई, जिसने त्वचा के नमूनों का स्वतंत्र वैज्ञानिक विश्लेषण किया। परीक्षण में शामिल एक प्रतिभागी की त्वचा की जैविक उम्र में 11 वर्ष से अधिक की कमी देखी गई। इसके साथ ही रुबेडो के अध्ययन में यह भी सामने आया कि इस उपचार से शरीर में सूजन बढ़ाने वाले जैविक मार्करों में कमी आई और त्वचा के लचीलेपन और बनावट के लिए आवश्यक एक खास कोलेजन में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
जैविक घड़ी और जीपीएक्स4 प्रोटीन पर लक्षित हमला
जैविक अथवा एपिजेनेटिक उम्र इस बात का पैमाना होती है कि कैलेंडर की तारीखों की तुलना में किसी व्यक्ति का शरीर कितनी तेजी से या धीमी गति से बूढ़ा हो रहा है। मिट्रा बायो जैसी एजिंग क्लॉक डीएनए पर होने वाले रासायनिक बदलावों, जिन्हें मिथाइलेशन कहा जाता है, के पैटर्न का अध्ययन करके इस उम्र का हिसाब लगाती हैं। ये रासायनिक बदलाव तय करते हैं कि हमारे जीन किस तरह काम करेंगे और समय के साथ इनमें कैसे परिवर्तन आते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल मिथाइलेशन का बदलना ही इस बात का पुख्ता प्रमाण नहीं है कि अंग अथवा ऊतक व्यावहारिक रूप से भी युवा हो चुके हैं।
रुबेडो के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी मार्को क्वार्टा का कहना है कि उम्र बढ़ना जटिल है, जिसके कई तंत्र हैं लेकिन कोशिकीय सेनेसेंस उनमें से एक है। सामान्य जैविक चक्र में सेनेसेंट कोशिकाएं घाव भरने और ट्यूमर को दबाने जैसे जरूरी कामों में भी भूमिका निभाती हैं। लेकिन लंबे समय तक इनका शरीर में टिके रहना और इकट्ठा होना बुढ़ापे से जुड़ी कई व्याधियों की जड़ बन जाता है। रुबेडो की यह दवा जीपीएक्स4 नामक एक खास प्रोटीन को निशाना बनाती है, जो कोशिकाओं के जीवित रहने के लिए गेटकीपर का काम करता है। दवा इस प्रोटीन को थोड़े समय के लिए निष्क्रिय कर देती है, जिससे सेनेसेंट कोशिकाएं फेरोप्टोसिस नामक नियंत्रित प्रक्रिया के तहत नष्ट हो जाती हैं, जबकि पास की तनावग्रस्त सामान्य कोशिकाओं को दोबारा उबरने का मौका मिलता है।
सूरज की धूप से हुए नुकसान और बालों के झड़ने पर शोध
कंपनी ने एक अलग नैदानिक अध्ययन में इस दवा का असर एक्टिनिक केराटोसिस पर भी परखा। यह बीमारी सूरज की पराबैंगनी किरणों से हुए नुकसान के कारण होती है, जिसमें त्वचा पर खुरदुरे और पपड़ीदार चकत्ते बन जाते हैं जो आगे चलकर त्वचा कैंसर का रूप भी ले सकते हैं। इस अध्ययन में 18 लोगों को शामिल किया गया और एक महीने तक क्रीम का इस्तेमाल कराने के बाद उनकी त्वचा पर मौजूद कुल घावों और चकत्तों में 46 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
शोध दल अब इस दवा का मूल्यांकन सोरायसिस और धूप से झुलसी त्वचा पर करने में जुटा हुआ है। आने वाले समय में कंपनी एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया पर भी इसका परीक्षण शुरू करेगी, जो आनुवंशिक रूप से बाल झड़ने की एक बहुत आम समस्या है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फ्रेडरिक बेडिंगफील्ड, जो पहले एलेरगन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी रह चुके हैं और बोटॉक्स की शुरुआत से जुड़े रहे हैं, सामान्य त्वचा के लिए इसका एक कम क्षमता वाला ओवर द काउंटर संस्करण लाने की संभावना देख रहे हैं। यदि ऐसा संस्करण तैयार होता है तो यह बाजार में रेटिनॉल जैसी लोकप्रिय एंटी-एजिंग सामग्रियों को सीधी चुनौती दे सकता है। इसके अलावा कंपनी इस दवा का एक गोली वाला रूप भी तैयार कर रही है, ताकि उम्र बढ़ने से जुड़ी चयापचय संबंधी बीमारियों का इलाज खोजा जा सके।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौतियां
इस तरह के वैज्ञानिक अध्ययनों को लेकर दीर्घायु और उम्र संबंधी अनुसंधान के क्षेत्र से जुड़ी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। बक इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एजिंग के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक वर्डिन ने इस दिशा में हो रहे काम का स्वागत किया, लेकिन साथ ही जैविक घड़ियों की विश्वसनीयता को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने टिप्पणी की कि वह इस बात को लेकर थोड़े सतर्क रहेंगे कि ये घड़ियां वास्तव में क्या मापती हैं। मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि उनकी त्वचा देखने और छूने में कैसी महसूस होती है, न कि किसी जैविक उम्र की जांच का सैद्धांतिक आंकड़ा।
मेमोरियल स्लोअन केटरिंग कैंसर सेंटर के त्वचा रोग विशेषज्ञ एंथनी रॉसी ने भी रेखांकित किया कि सेनेसेंस बुढ़ापे की इस पूरी पहेली का केवल एक हिस्सा भर है। उनका कहना है कि कुछ सेनेसेंट कोशिकाएं अच्छी होती हैं क्योंकि वे कैंसर जैसी घातक बीमारियों के फैलाव को रोकने का काम करती हैं। रॉसी के अनुसार यह विज्ञान बिल्कुल नया है लेकिन शोध अभी बेहद शुरुआती दौर में है। स्वस्थ त्वचा वाले लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना बाकी है। वर्तमान समय में जीवनशैली के बुनियादी नियम, यानी पूरी नींद, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम ही त्वचा को स्वस्थ रखने का सबसे प्रमाणित तरीका बने हुए हैं।



















