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भीषण गर्मी में सांस रोक रहे कैलिफोर्निया के प्राचीन रेडवुड के पेड़, वैज्ञानिकों ने पहचानी गंभीर कमजोरीविज्ञान
11 अक्तू॰ 2026, 2:35 pm (25 मिनट पहले)· 0

भीषण गर्मी में सांस रोक रहे कैलिफोर्निया के प्राचीन रेडवुड के पेड़, वैज्ञानिकों ने पहचानी गंभीर कमजोरी

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस के दो साल के शोध से खुलासा हुआ है कि अत्यधिक तापमान के दौरान तटीय रेडवुड अपने छिद्र बंद कर प्रकाश संश्लेषण घटा देते हैं, जिससे उनके अस्तित्व पर कार्बन भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है।

धरती के सबसे विशाल और सदियों पुराने पेड़ों की छत्रछाया में ऊपर आसमान की ऊंचाई पर अपनी ही एक पूरी दुनिया बसती है। सैकड़ों फीट ऊंचे कैनोपी वाले इन इलाकों में वांडरिंग सैलामैंडर जैसे अनोखे जीव रहते हैं, जो अपने पूरे जीवन चक्र को जमीन पर कदम रखे बिना सिर्फ एक ही विशाल पेड़ की फुनगियों पर बिता सकते हैं। वहीं मार्बल्ड मुरलेट नाम का समुद्री पक्षी भी इन्हीं शाखाओं की गहराइयों में छिपकर घोंसला बनाता है, जिसका यह रहस्य 1974 तक दुनिया से पूरी तरह छिपा रहा था, जब 150 फीट ऊपर काम कर रहे एक ट्री-ट्रिमर ने दुर्घटनावश उसका घोंसला देखा था। कई बार तो सिटका स्प्रूस, ओक या खुद दूसरे रेडवुड का कोई आवारा बीज इन विशालकाय पेड़ों की भारी-भरकम डालियों पर पहुंच जाता है और वहीं मिट्टी व फर्न के बिछौने पर एक बिल्कुल नया पेड़ उगकर खड़ा हो जाता है।

हजारों वर्षों से रेडवुड के ये जंगल एक बेहद मजबूत और स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र की धुरी बने रहे हैं, जो उन भयंकर दावानलों को भी आसानी से झेल लेते हैं जो दूसरे पेड़ों को राख में बदल देते हैं। इसके साथ ही ये पेड़ इंसानों को विस्मय से भरने के अलावा कैलिफोर्निया के पर्यटन उद्योग को हर साल करोड़ों डॉलर का राजस्व भी प्रदान करते हैं। लेकिन धरती पर बढ़ते पारे के प्रकोप से ये विशालकाय पेड़ भी अछूते नहीं रह सके हैं, और हाल ही में सामने आए वैज्ञानिक विश्लेषण में इन प्राचीन वृक्षों की एक बड़ी और गंभीर जैविक कमजोरी उजागर हुई है।

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गंभीर गर्मी में अपनी सांस और भोजन प्रक्रिया धीमी कर रहे हैं रेडवुड

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा दो वर्षों तक हर महीने दो बार दर्ज किए गए आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि अत्यधिक गर्मी के दिनों में तटीय रेडवुड (कोस्ट रेडवुड) की पत्तियां अपनी प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की गति को बेहद धीमा कर देती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब आसपास का तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ता है और पेड़ खुद को पर्याप्त तेजी से ठंडा रखने में असमर्थ हो जाते हैं, तो वे अपनी श्वसन प्रक्रिया और पोषक तत्व बनाने की प्रक्रिया दोनों पर ब्रेक लगा देते हैं। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है, यह जैविक संकट और विकराल रूप ले सकता है, जिससे इन ऐतिहासिक पेड़ों और उनकी शाखाओं पर निर्भर जीवन की कई परतों के भविष्य पर गंभीर सवालिया निशान लग गया है।

रेडवुड के भीतर चल रहे इस संघर्ष को समझने के लिए वनस्पति विज्ञान और पेड़ों की शारीरिक बनावट के कुछ बुनियादी पहलुओं को देखना जरूरी है। पेड़ अपनी पत्तियों पर मौजूद अतिसूक्ष्म छिद्रों, जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है, के जरिए दो मुख्य कार्य पूरे करते हैं। वे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को भीतर खींचते हैं और पत्तियों से पानी को वाष्प के रूप में बाहर छोड़ते हैं। जब स्टोमेटा खुले होते हैं, तब पेड़ बाहर से कार्बन डाइऑक्साइड अंदर लेकर प्रकाश संश्लेषण करते हैं और भोजन तैयार करते हैं, लेकिन इसी दौरान उनके भीतर से पानी भी भाप बनकर उड़ता है। इसके विपरीत, जब स्टोमेटा पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तो पेड़ अपने भीतर का कीमती पानी तो बचा लेते हैं, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड का प्रवेश रुक जाने के कारण प्रकाश संश्लेषण लगभग ठप हो जाता है।

डामर की सड़क की तरह तपती हैं पत्तियां, पसीना बहाकर ठंडा होने में लाचारी

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस में पीएचडी छात्रा और इस अध्ययन की मुख्य लेखिका लिली क्लाइनक के अनुसार पत्तियां प्रकाश सोखने वाली एक भौतिक वस्तु हैं, जिसके कारण वे तेज धूप में ठीक उसी तरह तपती हैं जैसे सड़क का डामर तपता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पत्तियां अपने आसपास की हवा की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गर्म होती हैं। ऐसे हालात से निपटने के लिए पेड़ अपने स्टोमेटा खोलकर पानी को वाष्पीकृत करते हैं, जो ठीक उसी प्रकार काम करता है जैसे इंसानों का पसीना निकलने पर शरीर ठंडा होता है। जब हमारी त्वचा से पानी भाप बनता है तो ठंडक महसूस होती है, और यही नियम पत्तियों पर लागू होता है, लेकिन वे ऐसा तभी कर सकती हैं जब उनके पास भाप बनाकर उड़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद हो।

लिली क्लाइनक और उनके साथी वैज्ञानिकों ने मेंडोकिनो काउंटी में कोस्ट रेडवुड के दक्षिणी वितरण क्षेत्र के पास स्थित पेड़ों का गहन अध्ययन किया। वहां वैज्ञानिकों ने विशेष आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके पत्तियों के स्तर पर यह जांच की कि गर्मी के चरम दौर में वे वास्तव में प्रकाश संश्लेषण कर रही हैं या नहीं। निष्कर्षों से पता चला कि हीटवेव या लू के थपेड़ों के दौरान कोस्ट रेडवुड एक ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं जहां वे खुद को तेजी से ठंडा करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं, और इसलिए वे अपने स्टोमेटा को लगातार बंद ही रखते हैं। हालांकि इससे पानी का नुकसान रुक जाता है, लेकिन पेड़ कार्बन सोखना बंद कर देता है, जिसका सीधा मतलब है कि वह अपना भोजन नहीं बना पाता और नई वृद्धि के लिए जरूरी ऊर्जा जमा नहीं कर पाता।

कार्बन भुखमरी का दुष्चक्र और जंगलों की सेहत पर संकट

वृक्ष शरीर क्रिया विज्ञान का यह तंत्र पहली नजर में केवल एक तकनीकी बारीकी लग सकता है, लेकिन यह जंगलों के अस्तित्व के लिए एक खतरनाक और जानलेवा दुष्चक्र पैदा कर सकता है। जब पेड़ों के पास पर्याप्त कार्बन संचित नहीं होगा, तो वे भविष्य में अपनी नई पत्तियों का निर्माण नहीं कर सकेंगे। नई पत्तियों की कमी के चलते उनकी प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता और कमजोर हो जाएगी, जिससे वे भूख के संकट में और ज्यादा घिरते चले जाएंगे, और यह सिलसिला तब तक दोहराता रहेगा जब तक कि पेड़ धीरे-धीरे दम न तोड़ दें। इस तरह का व्यवहार इससे पहले उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) जंगलों के पेड़ों में देखा गया था, लेकिन यह पहला मौका है जब किसी अध्ययन में कोस्ट रेडवुड पर गर्मी के इस तनाव के प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया गया है।

ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वन पारिस्थितिकी विज्ञानी क्रिस स्टिल, जो सीधे तौर पर इस शोध का हिस्सा नहीं थे, ने इस स्थिति को कार्बन स्टार्वेशन या कार्बन भुखमरी का नाम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पौधे के लिए नई पत्तियों का निर्माण करना बहुत अधिक ऊर्जा और संसाधनों की मांग करता है। आज के समय में कैलिफोर्निया और पैसिफिक नॉर्थवेस्ट में खड़े अधिकांश रेडवुड जंगल पिछले कुछ सौ वर्षों के दौरान उगे नए जंगल हैं। इसका मतलब यह है कि पुराने जंगलों के विशाल बुजुर्ग पेड़ों की तुलना में ये तेजी से बढ़ते किशोरों की तरह हैं, जिन्हें अधिक लंबाई हासिल करने के लिए भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की लगातार जरूरत होती है।

कार्बन सोखने की अद्भुत क्षमता पर चोट और कैनोपी का उजड़ता संसार

रेडवुड पृथ्वी पर सबसे बेहतरीन कार्बन सिंक माने जाते हैं। अपने विशाल तने और लंबी उम्र की बदौलत ये पेड़ दुनिया के किसी भी अन्य जंगल की तुलना में प्रति एकड़ सबसे ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड जमा करके रखने की क्षमता रखते हैं। प्राचीन वन सोसाइटी (एंशिएंट फॉरेस्ट सोसाइटी) के सह-संस्थापक और पादप शारीरिक पारिस्थितिकी विज्ञानी एंथनी एम्ब्रोस के अनुसार, यह गिरावट न केवल जलवायु प्रणाली के लिए एक नकारात्मक झटका है क्योंकि जंगलों की कार्बन सोखने की रफ्तार घट जाएगी, बल्कि पेड़ खुद भी पहले जितने विशाल आकार में विकसित नहीं हो पाएंगे। अगर पेड़ किसी तरह जीवित बच भी जाते हैं, तो उनकी शाखाओं पर मिट्टी और फर्न के फैलाव के लिए उतनी जगह नहीं बचेगी, जिसका मतलब है कि उनमें पनाह लेने वाले दुर्लभ जीवों के लिए प्राकृतिक आवास सिकुड़ जाएगा। साथ ही, जब वे पहले जितनी ऊंचाई नहीं पा सकेंगे, तो यह उनकी दीर्घकालिक मजबूती को भी चोट पहुंचाएगा।

रेडवुड के सामने गर्मी के सीधे तनाव के अलावा एक और बड़ा खतरा मंडरा रहा है, और वह है उनकी नमी और सुरक्षा के सबसे बड़े स्रोत का छिन जाना। लिली क्लाइनक के अनुसार, कोस्ट रेडवुड का उत्तरी कैलिफोर्निया और पैसिफिक नॉर्थवेस्ट के तटीय कोहरे के साथ एक बेहद गहरा और नाजुक संबंध रहा है। ये पेड़ इतने गगनचुंबी होते हैं कि इनकी ऊपरी कैनोपी सीधे कोहरे की परतों तक पहुंच जाती है, जहां से वे सीधे बादलों और धुंध से पानी पी लेते हैं। कोहरा इन पेड़ों को तीखी धूप से ढाल भी प्रदान करता है और इनके चारों ओर एक खास माइक्रोक्लाइमेट या स्थानीय शीतल वातावरण बनाता है, जिसकी वजह से ये जंगल आसपास के मैदानी इलाकों की तुलना में काफी ठंडे रहते हैं। लेकिन गर्म होते महासागरों और शुष्क होती हवा के चलते कोहरा अब दुर्लभ और अनियमित होता जा रहा है, जिससे पेड़ों को गर्मी से मिलने वाली वह प्राकृतिक राहत छिन रही है जो अब और ज्यादा जानलेवा हो चुकी है।

कोहरे की कमी और तापमान की मार से दोहरी मुसीबत

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले के पादप इकोफिजियोलॉजिस्ट टॉड डॉसन, जो इस शोध में शामिल नहीं थे, ने इसे पेड़ों के लिए एक दोहरी मार करार दिया है। उनके अनुसार, पेड़ एक तरफ पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं और दूसरी तरफ अत्यधिक गर्मी के तनाव को झेल रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ये पेड़ ऐतिहासिक रूप से 8 से 27 डिग्री सेल्सियस (लगभग 46 से 80 डिग्री फारेनहाइट) के एक बेहद संकीर्ण तापमान दायरे में जीने के आदी रहे हैं। कैलिफोर्निया में अब पहले की तुलना में लंबे समय तक भीषण गर्म दिन दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर जो कोहरा इनके लिए एक प्राकृतिक एयर कंडीशनर का काम करता था, उसमें 30 से 40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ चुकी है।

तापमान में आने वाले ये तीव्र बदलाव उन तमाम जीवों को भी तबाह कर सकते हैं जो पेड़ों की फुनगियों पर बसते हैं। एंथनी एम्ब्रोस ने चेतावनी दी कि यदि पूरी गर्मियों के दौरान यह असहनीय गर्मी लगातार बनी रहती है, तो शाखाओं पर जमी मिट्टी और फर्न की नमी बहुत तेजी से सूख जाएगी। ऐसे में वहां रहने वाले सैलामैंडर और पक्षी अपना अस्तित्व नहीं बचा पाएंगे, और इसके बाद पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र में एक के बाद एक विनाशकारी प्रभाव देखने को मिलेंगे।

हालांकि, लिली क्लाइनक ने एक सकारात्मक संकेत की ओर भी ध्यान दिलाया कि अत्यधिक गर्मी का दौर गुजर जाने के बाद पेड़ खुद को संभालते नजर आते हैं। शोध दल ने दो साल के दौरान जिन पत्तियों की निगरानी की, वे अत्यधिक गर्मी की आदी तो नहीं बनीं, लेकिन लू बीत जाने के बाद उनकी प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता नष्ट भी नहीं हुई। यह लचीलापन उम्मीद की एक किरण जरूर जगाता है, लेकिन इससे इन पेड़ों पर जलवायु परिवर्तन के असर को गंभीरता से समझने और वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने की तात्कालिक आवश्यकता कम नहीं हो जाती।

क्लाइनक ने आगाह किया कि वर्तमान समय में पतझड़ और सर्दियों के महीनों में तापमान वापस सामान्य स्तर पर लौट आता है, जिससे पेड़ों को संभलने का मौका मिल जाता है। लेकिन अगले पांच या 10 वर्षों में यदि तापमान और अधिक बढ़ गया और लू के थपेड़े पहले से ज्यादा बार-बार चले, तो यह कोई नहीं जानता कि क्या पेड़ दोबारा संभल पाएंगे। फिलहाल, सैलामैंडर और समुद्री पक्षी रेडवुड की शाखाओं पर अपने घोंसलों में बचे हुए हैं। लेकिन भले ही इंसान इन जंगलों से दूर रहते हों, वे भी इस व्यापक तंत्र का एक अभिन्न हिस्सा हैं, क्योंकि पृथ्वी को रहने लायक बनाए रखने में इन पेड़ों की भूमिका अद्वितीय है। अध्ययन में शामिल पेड़ों के पास एक हजार साल से भी ज्यादा जीने की क्षमता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इंसान उन्हें उतना लंबा जीवन जीने देगा।

सवाल-जवाब

अत्यधिक गर्मी के दौरान कोस्ट रेडवुड के पत्तों में क्या बदलाव आता है?
भीषण गर्मी में रेडवुड के पत्ते अपने स्टोमेटा यानी सूक्ष्म छिद्र बंद कर लेते हैं, जिससे पानी का नुकसान तो रुकता है लेकिन प्रकाश संश्लेषण और कार्बन का अवशोषण ठप हो जाता है।
यह शोध किस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है?
यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस की मुख्य लेखिका लिली क्लाइनक और उनके साथी शोधकर्ताओं द्वारा दो साल तक मेंडोकिनो काउंटी में किया गया।
पेड़ों में कार्बन भुखमरी या कार्बन स्टार्वेशन का क्या मतलब है?
जब पेड़ लंबे समय तक कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण नहीं कर पाते, तो उनके पास नई पत्तियां बनाने और बढ़ने के लिए ऊर्जा नहीं बचती, जिससे वे धीरे-धीरे कमजोर होकर सूख सकते हैं।
तटीय कोहरा रेडवुड के पेड़ों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
रेडवुड की ऊंची शाखाएं कोहरे से सीधे पानी सोखती हैं और यह कोहरा एक प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह काम करके जंगलों को ठंडा रखता है, लेकिन इसमें 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आई है।
क्या गर्मी की लहर बीत जाने के बाद पेड़ ठीक हो जाते हैं?
अध्ययन के अनुसार अत्यधिक गर्मी बीतने के बाद पत्तियों की प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता वापस लौट आती है, लेकिन बार-बार पड़ने वाली भीषण गर्मी से दीर्घकालिक नुकसान का खतरा बना हुआ है।
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