अंतरिक्ष की गहराइयों में सदियों पहले घटी एक दुर्लभ खगोलीय घटना अब आधुनिक विज्ञान की मदद से बेहद स्पष्ट रूप में सामने आई है। हवाई स्थित जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप से ली गई ताजा तस्वीरों ने एक प्राचीन सुपरनोवा के मलबे में छिपे ऐसे जटिल ढांचों को उजागर किया है, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। इन नए अवलोकनों से इस सुपरनोवा अवशेष में पहले की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक संरचनाएं दिखाई दी हैं। पहले जहां केवल आतिशबाजी या सिंहपर्णी (डैंडेलियन) के फूल जैसी गैस की लंबी और निरंतर दिखने वाली लपटें नजर आती थीं, वहीं अब उच्च रिज़ॉल्यूशन के कारण यह साफ हो गया है कि वे धागे लगातार फैले हुए नहीं हैं। इसके विपरीत, वे किसी धागे में पिरोए गए दानों या मोतियों की लड़ी जैसे दिखते हैं, जो अपेक्षाकृत एक समान आकार की गैस की गांठों से मिलकर बने हैं।
सौरमंडल से भी विशाल हैं अंतरिक्ष की यह मोतियां
द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिखने में मोतियों जैसी लगने वाली यह संरचनाएं असल में बेहद विशाल हैं। इनमें से प्रत्येक गांठ का व्यास लगभग चार प्रकाश-दिवस (चार लाइट-डे) के बराबर आंका गया है। अध्ययन की सह-लेखक इलारिया कैयाजो ने एक प्रेस विज्ञप्ति में इन संरचनाओं के अकल्पनीय पैमाने को स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारे सौर मंडल का पूरा ग्रहीय क्षेत्र इनमें से प्रत्येक गांठ में लगभग 10 बार समा सकता है और फिर भी जगह बची रहेगी।" उन्होंने आगे बताया कि ये गांठें दिखने में आश्चर्यजनक रूप से एक समान हैं और वैज्ञानिक इनका कंप्यूटर मॉडल तैयार करने को लेकर काफी उत्साहित हैं।
विस्फोट के मलबे में दिखा अनोखा क्रम
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि गैस के यह मोती किस तरह बने, हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि यह तारे के विस्फोट के दौरान बाहर निकले मलबे का सघन जमावड़ा हैं। खगोलविदों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि सुपरनोवा जैसे भीषण धमाके के बाद मलबा आमतौर पर बेहद बेतरतीब और अजीबोगरीब आकारों में बिखरता है। इसके विपरीत, इस अवशेष में मौजूद सभी गांठें न केवल आकार में एक जैसी हैं, बल्कि वे तंतुओं की कतार में बिल्कुल व्यवस्थित तरीके से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। मलबे के भीतर मौजूद यह अनोखा क्रम एक नया रहस्य है, जो तारों के अंत और उनकी मृत्यु की प्रक्रिया को गहराई से समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है।
धमाके में बच निकला असामान्य जॉम्बी तारा
इस नेबुला, जिसे Pa 30 नाम दिया गया है, की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसके केंद्र में मौजूद तारा पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ है। वैज्ञानिक इसे एक जॉम्बी तारा मानते हैं। आम तौर पर थर्मोन्यूक्लियर सुपरनोवा किसी तारे की सबसे हिंसक मौत होती है, जिसमें तारा पूरी तरह से तबाह हो जाता है। हालांकि, कुछ अत्यंत दुर्लभ मामलों में तारे का एक हिस्सा इस महाविनाशकारी विस्फोट के बाद भी बच जाता है। वैज्ञानिक अभी तक पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि ऐसा कैसे और क्यों होता है। Pa 30 के तंतुओं और गांठों की यह अनोखी बनावट खगोलविदों को यह समझने में मदद करेगी कि ऐसे विस्फोट किस तरह होते हैं और कोई तारा जीवित बचकर जॉम्बी तारा कैसे बना रहता है।
1181 के ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुड़ा आधुनिक विज्ञान
वैज्ञानिकों के लिए Pa 30 का अध्ययन इसलिए भी खास है क्योंकि यह आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान को आठ सदियों से भी अधिक पुराने मानव इतिहास से सीधे जोड़ता है। इस नेबुला की स्थिति और लक्षण 1181 में चीनी और जापानी खगोलविदों द्वारा दर्ज किए गए ऐतिहासिक रिकॉर्ड से बिल्कुल मेल खाते हैं। उस समय के खगोलविदों ने आकाश में एक नए चमकीले तारे के प्रकट होने का विवरण लिखा था, जो कई महीनों तक लगातार दिखाई देता रहा था। उस दौर में लोगों के लिए यह जानना मुमकिन नहीं था कि वे वास्तव में एक विशालकाय तारे के महाविस्फोट को देख रहे थे। सदियों बाद आधुनिक वैज्ञानिकों ने उस प्राचीन ऐतिहासिक घटना की कड़ियों को जोड़ते हुए साबित किया कि वह विस्फोट इसी Pa 30 नेबुला का जन्म था।



















