कैलिफोर्निया के केवल 54 प्रतिशत घरों में सेंट्रल एयर-कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन लगातार बढ़ते तापमान के कारण अब ठंडक की यह व्यवस्था एक बड़ी जरूरत बनती जा रही है। इस गर्मी को अवसर मानते हुए, वयू और वोल्टहब द्वारा पिछले साल कैलिफोर्निया हीट पंप ग्रुप बाय योजना शुरू की गई थी। इसके जरिए कई घरों को एक साथ जोड़कर रियायती दरों पर कार्बन-मुक्त हीटिंग और कूलिंग तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है।
सामूहिक खरीदारी और वल्क डिस्काउंट का मॉडल
हीट पंप की शुरुआती कीमत अक्सर पारंपरिक कूलिंग-ओनली एयर कंडीशनर से ज्यादा होती है, जिसकी वजह से अमेरिका में इनका प्रसार उस तेजी से नहीं हो पाया है। हालांकि, यह सामूहिक खरीदारी का तरीका खरीदारों को एक बड़ा थोक डिस्काउंट दिलाता है, जिससे कुल लागत कम हो जाती है। इस प्रक्रिया से इंस्टॉलर्स को भी एक कतार में कई काम मिल जाते हैं, जिससे पूरे मोहल्ले में इन उपकरणों को लगवाना आसान हो जाता है।
शुरुआत और मौसम का असर
वयू के सह-संस्थापक ने इस पहल की शुरुआत करते हुए बताया कि इस तरह का कार्यक्रम कैलिफोर्निया में पहले कभी नहीं हुआ था। हालांकि, शुरुआती दौर में मौसम के कारण कुछ रुकावटें भी आईं और 2026 की शुरुआत में लोगों की रुचि न होने के कारण यह योजना फीकी पड़ गई थी। लेकिन जैसे ही भीषण गर्मी और हीट वेव्स ने कैलिफोर्निया को अपनी चपेट में लिया, ऑनलाइन पूछताछ और आवेदनों की बाढ़ आ गई।
उपभोक्ताओं का अनुभव और तकनीक
बे एरिया के सैन मातेओ में रहने वाले डेटा साइंटिस्ट नाओया कानाई इस योजना के शुरुआती ग्राहकों में शामिल थे। उन्होंने अपने दो मंजिला उपनगरीय घर में लगभग 14,500 डॉलर की लागत से यह नया हीट पंप सिस्टम लगवाया। इसके जरिए उन्हें पुराने गैस फर्नेस की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और आरामदायक तापमान मिला। इसके अलावा, ओटावा के पॉल होरॉल्ड जैसे निवासियों ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लगभग 20,000 कनाडाई डॉलर खर्च कर इस तकनीक को अपनाया।
विशेषज्ञों की राय और चुनौतियां
नेस्टा के एक निदेशक एंड्रयू सिंसंस का कहना है कि जब लोग अपने पड़ोसियों के घरों में ऐसे उपकरण देखते हैं, तो वे भी प्रेरित होते हैं, जिससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव की लहर दौड़ती है। हालांकि, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर द एनवायरनमेंट की रोक्साना शफीए का मानना है कि हर जगह बिजली के दाम अलग होने के कारण कुछ घरों में बिल बढ़ भी सकते हैं। इसके बावजूद, सामूहिक खरीदारी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है।



















