कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ विलिस्टन रिजर्वायर के पानी के बीचों-बीच पेड़ों से ढका एक पूरा टापू तैरता हुआ दिखाई दिया। इस अजीबोगरीब और अनोखे नजारे ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी गहरी सोच में डाल दिया है। पानी की सतह पर तैरते इस विशाल भू-भाग को देखकर ऐसा लगता था मानों कोई पूरा जंगल ही झील के पानी पर सैर कर रहा हो। हालांकि, इस घटना से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य यह है कि कुछ ही हफ्तों के भीतर यह तैरता हुआ द्वीप अचानक सैटेलाइट तस्वीरों से पूरी तरह गायब हो गया।
नाविक की नजर से सामने आया रहस्य
इस अद्भुत और रहस्यमयी नजारे की तस्वीर सबसे पहले एक स्थानीय नाविक ने अपने कैमरे में कैद की थी। जैसे ही यह तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच इसे देखने और जानने की उत्सुकता तेजी से बढ़ गई। देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इस पोस्ट को देखा। शुरुआत में स्थिति यह थी कि सरकारी अधिकारियों को भी इस बात पर आसानी से यकीन नहीं हुआ कि तस्वीर में दिखाई दे रहा यह विशाल टुकड़ा वास्तव में पानी पर तैर रहा है। इस बात की भी शुरुआती आशंका जताई गई कि कहीं यह तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से तो नहीं बनाई गई है।
सैटेलाइट तस्वीरों से हुई पुष्टि और आकार
लोगों के मन में उठ रहे तमाम संदेहों को दूर करने का काम अंतरिक्ष से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों ने किया। बीसी हाइड्रो (BC Hydro) ने 20 से 21 जुलाई के बीच ली गई सैटेलाइट तस्वीरों की जांच के बाद इस तैरते हुए भू-भाग के वास्तविक रूप से मौजूद होने की आधिकारिक पुष्टि की। इस तैरते हुए द्वीप का आकार लगभग 70 मीटर चौड़ा और 140 मीटर लंबा था। क्षेत्रफल के हिसाब से यह करीब 9,800 वर्ग मीटर में फैला हुआ था, जो आकार में लगभग दो एनएफएल (NFL) फुटबॉल मैदानों जितना बड़ा बैठता है। भौगोलिक स्थिति के अनुसार, यह फिनले बे के पश्चिम में और डब्ल्यू.ए.सी. बेनेट डैम (W.A.C. Bennett Dam) से लगभग 60 मील की दूरी पर रिजर्वायर के मुख्य हिस्से में तैरता हुआ पाया गया था।
अचानक गायब होने की पहेली
इस पूरी घटना में असली रोमांच और रहस्य तब जुड़ा जब कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया। जब अधिकारियों ने 5 अगस्त की नई सैटेलाइट तस्वीरों की जांच की, तो वह विशाल तैरता हुआ जंगल अपनी जगह पर बिल्कुल भी मौजूद नहीं था। वहां ऐसा कोई निशान या स्पष्ट सुराग नहीं बचा था जिससे यह पता चल सके कि वह आखिर गायब होकर कहां चला गया। पानी की उस खुली सतह पर उस विशालकाय ढांचे का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं बचा था, जिससे यह मामला पूरी तरह एक अनसुलझा रहस्य बन गया।
संभावित निर्माण और गायब होने के कारण
विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों के पास इस तैरते हुए ढांचे के बनने को लेकर एक संभावित वैज्ञानिक वजह जरूर मौजूद है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय से झील के किनारे पर जमा होती रही लकड़ियां और जैविक मलबा धीरे-धीरे आपस में सड़ते गए होंगे। इसी सड़े हुए मलबे और लकड़ियों के ऊपर पौधों तथा पेड़ों की जड़ें आपस में फैलती चली गईं और समय बीतने के साथ एक विशाल तैरता हुआ ढांचा तैयार हो गया। जब रिजर्वायर का जलस्तर बढ़ा, तो यह मुख्य किनारे से टूटकर अलग हो गया होगा और बहते हुए खुले पानी में आ गया होगा। हालांकि, इसके गायब होने की गुत्थी अभी भी पूरी तरह अनसुलझी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह पानी में डूब गया हो, बल्कि यह भी संभव है कि यह बहकर किसी शांत या ऐसे सुरक्षित हिस्से में चला गया हो जो मौजूदा सैटेलाइट तस्वीरों के दायरे में नजर नहीं आ रहा हो। इसके छोटे-छोटे हिस्सों में टूटने या पूरी तरह डूब जाने की संभावनाएं भी अपनी जगह बनी हुई हैं और बीसी हाइड्रो इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।



















