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उपग्रह के गुरुत्वाकर्षण आंकड़ों से उजागर हुआ पृथ्वी का उबड़-खाबड़ रूप और तेजी से पिघलती बर्फविज्ञान
29 जुल॰ 2026, 3:20 pm (91 दिन पहले)· 3

उपग्रह के गुरुत्वाकर्षण आंकड़ों से उजागर हुआ पृथ्वी का उबड़-खाबड़ रूप और तेजी से पिघलती बर्फ

नासा ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का एक नया 3D जियोइड मॉडल जारी किया है जो ग्रह के भीतर द्रव्यमान के असमान वितरण को दर्शाता है। 15 वर्षों के उपग्रहीय आंकड़ों पर आधारित यह मॉडल ध्रुवीय बर्फ के पिघलने और भूजल की कमी को मापने में मदद कर रहा है।

हमारी पृथ्वी एक बिल्कुल चिकना गोला नहीं है, जैसा कि नासा द्वारा जारी किए गए नए जियोइड मॉडल से स्पष्ट होता है। यह मॉडल ग्रह के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में मौजूद सूक्ष्म विविधताओं को प्रस्तुत करता है। पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सों में द्रव्यमान और घनत्व के असमान वितरण के कारण इसकी सतह पर कई जगह हल्के उभार और गड्ढे बन जाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, जियोइड उस काल्पनिक समुद्री सतह को दर्शाता है जो केवल पृथ्वी के अपने गुरुत्वाकर्षण और उसके घूर्णन (रोटेशन) के प्रभाव से बनती है, जिसमें हवा या समुद्री धाराओं की कोई भूमिका नहीं होती।

10,000 गुना उभरा मॉडल और 15 साल का डेटा

गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में मौजूद मामूली अंतर को मानवीय आंखों के लिए स्पष्ट रूप से दृश्यमान बनाने के लिए, इस मॉडल में ऊंचाइयों को 10,000 गुना बढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है। पृथ्वी के इस उबड़-खाबड़ स्वरूप को तैयार करने में 15 वर्षों के दौरान एकत्र किए गए विशाल उपग्रहीय आंकड़ों का उपयोग किया गया है। इसमें 100 करोड़ (1 अरब) से अधिक अवलोकन शामिल हैं, जो अंतरिक्ष से गुरुत्वाकर्षण के सूक्ष्म बदलावों को दर्ज करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही एक इंटरएक्टिव 3D मॉडल और एक विस्तृत वीडियो भी साझा किया गया है।

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गुरुत्वाकर्षण का यह सटीक मापन केवल नाटकीय तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा वैज्ञानिक महत्व है। नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी के विशेष उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र पर लगातार नजर रखते हैं ताकि पर्यावरण में हो रहे बड़े बदलावों का अध्ययन किया जा सके।

अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में बर्फ का नुकसान

ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ की चादरों में आ रही कमी को मापने के लिए गुरुत्वाकर्षण के ये आंकड़े बेहद मददगार साबित हो रहे हैं। नासा के GRACE (ग्रेविटी रिकवरी एंड क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट) उपग्रह मिशन के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2002 से 2025 के बीच अंटार्कटिका ने प्रतिवर्ष औसतन 135 गीगाटन बर्फ खोई है। इसी समयावधि के दौरान ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की दर और भी अधिक रही, जहां हर साल लगभग 264 गीगाटन बर्फ नष्ट हुई। इन अनुमानों में सुधार करना समुद्र के बढ़ते जलस्तर को समझने और भविष्य के खतरों का आकलन करने के लिए बेहद जरूरी है।

भूजल की कमी और भीषण सूखे पर नजर

ध्रुवीय क्षेत्रों के अलावा, GRACE उपग्रह के आंकड़े दुनिया भर में भूजल के गिरते स्तर और सूखे की स्थिति की निगरानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस डेटासेट के दीर्घकालिक अध्ययनों से अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में भूजल के बड़े पैमाने पर कम होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, यह डेटा अचानक पड़ने वाले भीषण सूखे को भी उजागर करता है। उदाहरण के लिए, इस गर्मी स्पेन और फ्रांस में जंगलों की आग को भड़काने वाला चरम सूखा GRACE के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का द्वारा गुरुत्वाकर्षण आंकड़ों का उपयोग करके किए गए एक विश्लेषण से पता चला है कि प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और उथला भूजल रिकॉर्ड निचले स्तर पर या उसके बेहद करीब पहुंच गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे के बढ़ते संकट को देखते हुए, ये उपग्रहीय अवलोकन शुष्क क्षेत्रों में जल प्रबंधकों के लिए बेहद उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं।

सवाल-जवाब

नासा का 3D जियोइड मॉडल पृथ्वी को उबड़-खाबड़ क्यों दिखाता है?
पृथ्वी के अंदर द्रव्यमान और घनत्व का वितरण असमान है, जिससे गुरुत्वाकर्षण बल में अंतर आता है। इस सूक्ष्म बदलाव को आंखों से दिखाने के लिए मॉडल में ऊंचाइयों को 10,000 गुना बढ़ाकर दर्शाया गया है।
जियोइड मॉडल क्या होता है?
जियोइड मॉडल उस काल्पनिक समुद्री सतह का प्रतिनिधित्व करता है जो हवा या ज्वार-भाटे के बिना, केवल पृथ्वी के अपने गुरुत्वाकर्षण और घूर्णन (रोटेशन) के प्रभाव से बनती है।
अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में हर साल कितनी बर्फ पिघल रही है?
GRACE उपग्रह के 2002 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, अंटार्कटिका में सालाना औसतन 135 गीगाटन और ग्रीनलैंड में लगभग 264 गीगाटन बर्फ नष्ट हो रही है।
गुरुत्वाकर्षण मापने से सूखे का पता कैसे चलता है?
मिट्टी और भूमिगत जलभंडारों में पानी कम होने से उस क्षेत्र का द्रव्यमान घट जाता है, जिससे वहां के स्थानीय गुरुत्वाकर्षण में बदलाव आता है जिसे उपग्रह पकड़ लेते हैं।
इस डेटा में किन क्षेत्रों में भूजल की भारी कमी देखी गई?
आंकड़ों में अमेरिका के पश्चिमी क्षेत्रों में लंबे समय से भूजल की कमी और इस गर्मी स्पेन व फ्रांस के जंगलों में आग भड़काने वाले भीषण सूखे की पुष्टि हुई है।
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