रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव 2026 के अवसर पर देश और दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के जुटने की पूरी संभावना बन रही है। इसी भारी आमद की वजह से शहर भर के होटलों, गेस्ट हाउसों और होमस्टे में ठहरने के लिए एडवांस बुकिंग में जबर्दस्त तेजी देखने को मिल रही है। अगर आप भी इस पावन अवसर पर रामलला के दर्शन और भव्य दीपोत्सव का साक्षी बनने की तैयारी में हैं, तो यात्रा शुरू करने से पहले ठहरने के प्रबंधों की वास्तविक स्थिति को समझ लेना बेहद जरूरी है।
होटल एसोसिएशन ने दी कमरों की उपलब्धता पर जानकारी
होटल एसोसिएशन के महासचिव पंकज गुप्ता ने बताया कि अयोध्या के होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे में लगभग 80 से 90 प्रतिशत कमरे पहले ही आरक्षित हो चुके हैं। इस भारी बुकिंग की वजह से त्योहार के मुख्य दिनों में शहर के भीतर ठहरने के लिए कमरों की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। जो श्रद्धालु अंतिम पलों में बिना किसी पूर्व तैयारी के अयोध्या पहुंचने का सोच रहे हैं, उन्हें ठहरने की जगह खोजने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दिवाली और उससे एक दिन पहले सबसे अधिक मांग
मिथिला गेस्ट हाउस के मालिक अंशुमान तिवारी ने पुष्टि की है कि उनके प्रतिष्ठान में 90 प्रतिशत से ज्यादा कमरों की एडवांस बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है। कमरों के लिए सबसे ज्यादा पूछताछ और मारामारी दिवाली के मुख्य पर्व तथा उससे ठीक एक दिन पहले के समय के लिए देखी जा रही है। इन दो विशेष दिनों में शहर में ठहरने की जगह पाना सबसे चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में उछाल
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद से ही अयोध्या आने वाले तीर्थयात्रियों और सैलानियों की संख्या में अभूतपूर्व इजाफा दर्ज किया गया है। अब भारत के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु लगातार रामनगरी पहुंच रहे हैं। ऐसे में दीपोत्सव अब सिर्फ एक पारंपरिक धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अयोध्या के पर्यटन उद्योग और पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संबल बन चुका है। शहर के सभी होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे कारोबारी इस पूरे त्योहारी सीजन में भरपूर ग्राहकों के आगमन की आस लगाए बैठे हैं। कमरों की इस तेज मांग को देखते हुए अयोध्या यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों को समय रहते अपनी बुकिंग पक्की कर लेनी चाहिए, हालांकि अभी सभी कमरों के शत-प्रतिशत भर जाने की स्थिति नहीं बनी है।



















