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भाद्रपद में मंगलवार और भौम प्रदोष का दुर्लभ मेल, जानिए शिव पूजन का सटीक समय और पंचांगअध्यात्म
22 सित॰ 2026, 10:42 pm (20 मिनट पहले)· 0

भाद्रपद में मंगलवार और भौम प्रदोष का दुर्लभ मेल, जानिए शिव पूजन का सटीक समय और पंचांग

8 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी के बाद त्रयोदशी तिथि लग रही है, जिससे भौम प्रदोष और मंगलवार व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार प्रदोष काल में शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक शिव अर्चना का उत्तम समय रहेगा।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में 8 सितंबर 2026 को एक अत्यंत कल्याणकारी धार्मिक संयोग बन रहा है। इस दिन द्वादशी तिथि के उपरांत त्रयोदशी तिथि का प्रवेश हो रहा है, जिसके चलते मंगलवार व्रत के साथ सितंबर महीने का प्रथम भौम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार यह दिन पुष्य नक्षत्र, तैतिल करण तथा परिघ योग के प्रभाव में रहेगा। जब भी त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो शास्त्रों में उसे भौम प्रदोष की संज्ञा दी जाती है। यह दिन देवों के देव महादेव और संकटमोचन हनुमान जी की संयुक्त आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है।

भौम प्रदोष और मंगलवार व्रत का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन मंगल ग्रह और भगवान हनुमान को समर्पित रहता है। वहीं प्रदोष व्रत पूर्णतः भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का पर्व है। इस प्रकार जब मंगलवार को प्रदोष व्रत का मेल होता है, तब भक्तों को शिव परिवार के साथ साथ रामभक्त हनुमान जी की भी असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को साहस, पराक्रम, शक्ति और ऊर्जा का मुख्य कारक ग्रह माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह से संबंधित दोष या परेशानियां चल रही हों, उनके लिए भौम प्रदोष का व्रत और पूजन कष्टों के निवारण हेतु अत्यंत प्रभावी माना गया है। इस दिन पूर्ण निष्ठा से व्रत और पूजन करने से जीवन में आत्मविश्वास, साहस, सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

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पूजन विधि और शुभ काल

भौम प्रदोष के पावन अवसर पर भगवान शिव की उपासना सायंकालीन प्रदोष काल में करना सर्वोत्तम फल प्रदान करता है। आज प्रदोष काल में शिव पूजन का शुभ समय शाम 6:35 बजे से लेकर रात 8:52 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में देवाधिदेव महादेव की पूजा करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है। दूसरी ओर, मंगलवार व्रत का संकल्प लेने वाले भक्त प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र धारण करते हैं और भगवान हनुमान का स्मरण करते हैं। हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा है।

प्रदोष काल के दौरान श्रद्धालु शिवलिंग का अभिषेक जल और गाय के दूध से करते हैं। इसके उपरांत शिवलिंग पर बेलपत्र, अक्षत और ताजे पुष्प चढ़ाए जाते हैं। पूजन के पश्चात शिव पंचाक्षरी मंत्र का जप, आरती और प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा का श्रवण किया जाता है। आज के दिन शिववास दोपहर 02:42 बजे तक नन्दी पर रहेगा, जिसके बाद वह भोजन में रहेगा।

ग्रह स्थिति और दिशाशूल का विचार

ग्रह गोचर की स्थिति देखें तो आज सूर्य देव पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में संचरण करेंगे। चंद्रमा दिन के समय पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में उपस्थित रहेंगे। शाम 04:39 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद आश्लेषा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। पंचांग के अनुसार आज उत्तर दिशा में दिशाशूल प्रभावी रहेगा। ज्योतिष और वास्तु नियमों के अनुसार दिशाशूल की दिशा में सामान्य रूप से यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी अपरिहार्य कारण से उत्तर दिशा की यात्रा करनी आवश्यक हो, तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करके ही प्रस्थान करना हितकर रहता है।

सूर्य और चंद्रमा का समय

आज सुबह 6:15 बजे सूर्योदय होगा और शाम 6:34 बजे सूर्यास्त दर्ज किया जाएगा। वहीं चंद्र दर्शन की बात करें तो रात 3:02 बजे चंद्रोदय और दोपहर 4:46 बजे चंद्रास्त का समय रहेगा। इसके अतिरिक्त 9 सितंबर की भोर में चंद्रोदय 03:59 बजे रहेगा।

तिथि, नक्षत्र, करण और योग का विवरण

  • तिथि: द्वादशी तिथि दोपहर 02:42 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी।
  • नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र शाम 04:39 बजे तक रहेगा, जिसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग जाएगा।
  • करण: तैतिल करण दोपहर 02:42 बजे तक रहेगा, जिसके बाद गर करण 9 सितंबर की रात 01:35 बजे तक रहेगा।
  • योग: परिघ योग 9 सितंबर की मध्यरात्रि 12:40 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शिव योग शुरू होगा।

आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त

दैनिक जीवन में नए कार्यों के शुभारंभ और अनुष्ठान के लिए शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व होता है। आज के प्रमुख शुभ काल इस प्रकार हैं

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:32 बजे से प्रातः 05:18 बजे तक रहेगा।
  • अमृत काल: प्रातः 10:40 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक उपलब्ध रहेगा।
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक रहेगा।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:25 बजे से दोपहर 03:15 बजे तक रहेगा।
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:35 बजे से शाम 06:58 बजे तक रहेगा।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 04:39 बजे से अगली सुबह यानी 9 सितंबर को 06:04 बजे तक प्रभावी रहेगा।
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:57 बजे से देर रात 12:43 बजे (9 सितंबर) तक रहेगा।

आज के अशुभ समय और वर्जित काल

पंचांग के नियमों के अनुसार अशुभ समय के दौरान मांगलिक या नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए

  • राहुकाल: दोपहर 03:27 बजे से शाम 05:01 बजे तक रहेगा।
  • यमगण्ड: प्रातः 09:11 बजे से प्रातः 10:45 बजे तक रहेगा।
  • गुलिक काल: दोपहर 12:19 बजे से दोपहर 01:53 बजे तक रहेगा।
  • दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:34 बजे से प्रातः 09:24 बजे तक रहेगा।
  • वर्ज्य: शाम 04:41 बजे से अगली सुबह 06:12 बजे (9 सितंबर) तक रहेगा।
  • विडाल योग: शाम 04:39 बजे से अगली सुबह 06:04 बजे (9 सितंबर) तक रहेगा।
  • गण्ड मूल: शाम 04:39 बजे से अगली सुबह 06:04 बजे (9 सितंबर) तक रहेगा।

सवाल-जवाब

भौम प्रदोष व्रत किस दिन रखा जा रहा है?
यह व्रत 8 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल द्वादशी के उपरांत त्रयोदशी तिथि लगने पर रखा जा रहा है।
भौम प्रदोष के दिन शिव पूजन का सबसे शुभ समय क्या है?
शाम को प्रदोष काल के दौरान 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक शिव पूजन का सर्वोत्तम समय है।
8 सितंबर 2026 को राहुकाल का समय क्या रहेगा?
इस दिन राहुकाल दोपहर 03:27 बजे से शाम 05:01 बजे तक प्रभावी रहेगा।
आज के दिन किस दिशा में दिशाशूल रहेगा?
पंचांग के अनुसार आज उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।
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