हिन्दू परंपरा में हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दीपावली का पावन पर्व अत्यंत उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर घरों के प्रत्येक हिस्से को मिट्टी के दीयों से रोशन किया जाता है, जिससे चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस विशेष निशा में धन की देवी माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आराधना करने की शास्त्रीय परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक पूजन करने से जीवन से व्याधियां, दुख और कष्ट दूर होते हैं तथा परिवार में संपन्नता का वास होता है। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस शुभ अवसर पर कुछ विशेष और प्राचीन रीति-रिवाजों का पालन करने से देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
माता लक्ष्मी के समक्ष बहुमुखी दीपक प्रज्वलित करने का विधान
दीपावली की संध्या पर देवी लक्ष्मी की अनुकंपा प्राप्त करने के लिए उनके सम्मुख शुद्ध देशी घी का विशेष दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान सात अथवा नौ मुख वाला घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस अनुष्ठान से घर के सभी परिजनों की आर्थिक दशा सुधरती है और धन संबंधी रुकावटें दूर होती हैं।
नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं से मुक्ति के लिए काली मिर्च का प्रयोग
पर्व के दिन नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को खत्म करने के लिए काली मिर्च से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय प्रचलित है। इसके अंतर्गत काली मिर्च के 7 या 11 दाने लिए जाते हैं। फिर इन्हें स्वयं तथा परिवार के सभी सदस्यों के सिर से घड़ी की उल्टी दिशा में कुल 7 बार घुमाया जाता है। इसके पश्चात इन दानों को घर के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ फेंक दिया जाता है। इस विधि से परिवार में धन-धान्य की वृद्धि होने और गुप्त शत्रुओं के भय से मुक्ति मिलने का विश्वास है।
पीपल के वृक्ष के समीप आर्थिक बाधा निवारण अनुष्ठान
दीपावली की रात अमावस्या होने के कारण इसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस संध्या पर आर्थिक तंगी से राहत पाने के लिए एक विशेष परंपरा निभाई जाती है। इसके तहत सिंदूर, थोड़ा दही और साबुत उड़द की दाल लेकर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित की जाती है। साथ ही वहां एक दीपक भी प्रज्वलित किया जाता है। माना जाता है कि इस क्रिया से लंबे समय से चली आ रही आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है।
पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर शुभ सामग्रियों की पोटली
घर और कार्यस्थल पर निरंतर समृद्धि बनाए रखने के लिए पांच-पांच की संख्या में सुपारी, हल्दी की साबुत गांठ, कौड़ी और गोमती चक्र एकत्र करने का विधान है। इन सभी पवित्र वस्तुओं को एक लाल वस्त्र में सुरक्षित बांधकर दीपावली की पूजा के समय पूजन स्थल पर रख दिया जाता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा संपन्न होने के उपरांत इस लाल पोटली को घर अथवा अपनी दुकान की चौखट पर बांध दिया जाता है। इससे धन के आगमन के मार्ग खुलते हैं और सुख-शांति बनी रहती है।
व्यापार में वृद्धि और नजर दोष निवारण हेतु फिटकरी का उपाय
यदि व्यापार या दुकानदारी में लगातार अड़चनें आ रही हों, तो फिटकरी का यह पारंपरिक टोटका प्रभावी माना जाता है। दीपावली की रात एक साबुत फिटकरी का टुकड़ा लेकर उसे अपनी दुकान के चारों कोनों और पूरे परिसर में घुमाया जाता है। इसके बाद उस फिटकरी को उत्तर दिशा की तरफ फेंकने की परंपरा है। ऐसा करने से व्यवसाय को लगी बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है और बिक्री में सुधार देखने को मिलता है।
















