हिंदू पंचांग में कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु गंगा समेत विभिन्न पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और जरूरतमंदों को दान-पुण्य देकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर किए गए सत्कर्मों और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। पूर्णिया के पंडित मनोतपल झा के अनुसार, वर्ष 2025 में कार्तिक पूर्णिमा की पावन तिथि 5 नवंबर, दिन बुधवार को पड़ रही है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह पूरा दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित रहता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। ऐसे में इस दिन पवित्र जलाशयों में स्नान करने तथा दीप प्रज्वलित करने से पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
माता लक्ष्मी और श्रीहरि की कृपा दिलाती हैं ये पांच वस्तुएं
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर कुछ खास वस्तुओं का दान करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संपन्नता बढ़ती है। पंडित मनोतपल झा ने इस दिन किए जाने वाले पांच मुख्य दानों का विशेष उल्लेख किया है, जिनसे परिवार में धन-वैभव और खुशहाली का स्थायी वास होता है।
दूध और वस्त्रों का पुण्यकारी दान
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर दूध का दान करना बेहद फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन दूध अर्पित करने या जरूरतमंदों को देने से धन-संपत्ति में लगातार बढ़ोतरी होती है और घर में देवी लक्ष्मी का स्थायी वास बना रहता है। इसके साथ ही निर्धन और असहाय लोगों को नए अथवा स्वच्छ वस्त्र भेंट करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। वस्त्र दान से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है, समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अन्न, गुड़ और दीपदान का धार्मिक महत्व
अनाज का दान सनातन परंपरा में सर्वोत्तम माना गया है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भूखे और जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करने से अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा और धन की देवी मां लक्ष्मी दोनों अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इससे घर-परिवार में अन्न और धन के भंडार सदैव भरे रहते हैं। इसके अलावा गुड़ का दान करना भी इस तिथि पर विशेष शुभ माना गया है। मान्यता है कि गुड़ बांटने से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का संयुक्त आशीर्वाद मिलता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती।
दान-पुण्य के साथ-साथ इस दिन दीपदान की परंपरा अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है। कार्तिक पूर्णिमा की शाम को पवित्र नदी, सरोवर के तटों, तुलसी के पौधे तथा पीपल के वृक्ष के पास दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से जीवन के कष्ट और अज्ञानता रूपी अंधकार समाप्त होते हैं, तथा घर के भीतर शांति, सामंजस्य और संपन्नता का आगमन होता है।



















