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दिवाली पर मुख्य द्वार की खास सजावट से आकर्षित करें सुख-समृद्धि, जानें पांच पारंपरिक विधानअध्यात्म
4 अक्तू॰ 2026, 3:36 am (13 दिन पहले)· 0

दिवाली पर मुख्य द्वार की खास सजावट से आकर्षित करें सुख-समृद्धि, जानें पांच पारंपरिक विधान

दिवाली की शाम घर के मुख्य द्वार पर शुभ प्रतीक और कलश स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

रोशनी के महापर्व दिवाली पर घर की शुद्धि, स्वच्छता और श्रद्धा भाव को समृद्धि के आगमन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर निर्मलता और सकारात्मक वातावरण रहता है, वहीं वैभव और आनंद का स्थायी निवास होता है। इसी कारण पर्व के अवसर पर आवास की सजावट, विशेषकर प्रवेश द्वार के प्रबंधन को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

बल्लभगढ़ स्थित उदासीन आश्रम के महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, प्रवेश द्वार ही किसी भी आवास में सकारात्मक शक्तियों के स्वागत की पहली सीढ़ी होता है। जब मुख्य देहरी को पारंपरिक मंगल प्रतीकों से विधिवत सजाया जाता है, तो परिवार के लिए उन्नति और सुख-शांति के मार्ग अपने आप सुलभ हो जाते हैं।

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चौखट पर चरण चिह्न और मंगलकारी प्रतीक

दिवाली की शाम को मुख्य द्वार की चौखट पर मां लक्ष्मी के नन्हे पदचिह्न अंकित करने की सुदीर्घ परंपरा रही है। यह विधान घर के भीतर शुभता के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जिससे परिवार में शांति, सौहार्द और आर्थिक स्थिरता की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, मुख्य द्वार पर लाल रंग से स्वास्तिक और ॐ के पावन चिह्न अंकित करने का विशेष महत्व बताया गया है। जहां स्वास्तिक सौभाग्य और कल्याण का परिचायक है, वहीं ॐ का अंकन पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करता है, जिससे नकारात्मकता का नाश होकर वातावरण पूर्णतः पवित्र हो जाता है।

जल से भरा कलश और दीप प्रज्वलन का विधान

द्वार पर जल से भरा एक मंगल कलश स्थापित करना भी अत्यधिक शुभकारी माना जाता है। इस कलश के मुख पर आम के हरे पत्ते और जटाधारी नारियल रखा जाता है, जिसके साथ चावल और सुपारी समर्पित करने का नियम है। यह प्रबंध संपन्नता और वैभव का सूचक है, जिससे घर में धन-धान्य की निरंतरता बनी रहने की मान्यता है। कलश की स्थापना के निकट ही एक घी अथवा तेल का दीपक जलाना आवश्यक माना गया है। दीपक का प्रकाश केवल बाहरी अंधकार को ही दूर नहीं करता, बल्कि वातावरण में दिव्यता का संचार कर सौभाग्य के द्वार खोलता है।

पत्तों का तोरण और फूलों का संजाल

प्रवेश द्वार की ऊपरी देहरी पर अशोक अथवा पान के ताजे पत्तों से निर्मित तोरण बांधना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस बंदनवार में लाल और पीले रंग के ताजे फूल पिरोए जाते हैं। यह प्राकृतिक शृंगार न केवल भवन के बाहरी सौंदर्य को भव्यता प्रदान करता है, बल्कि घर में शांत, शीतल और समृद्ध परिवेश का निर्माण भी करता है। ऐसे पवित्र और सुव्यवस्थित द्वार से प्रवाहित होने वाली सकारात्मकता परिवार के जीवन में दीर्घकालिक उल्लास लाती है।

सवाल-जवाब

दिवाली पर मुख्य द्वार पर किस रंग से स्वास्तिक और ॐ बनाना चाहिए?
मुख्य द्वार पर लाल रंग से स्वास्तिक और ॐ का चिह्न बनाना चाहिए, क्योंकि यह सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
द्वार पर स्थापित कलश में कौन-सी सामग्री रखी जाती है?
जल से भरे कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है, साथ ही उस पर चावल और सुपारी अर्पित किए जाते हैं।
कलश के पास दीया जलाना क्यों जरूरी माना गया है?
कलश के समीप दीपक जलाने से अंधकार दूर होता है, वातावरण में रोशनी फैलती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
मुख्य द्वार के तोरण में किन पत्तों का उपयोग करने की सलाह दी गई है?
तोरण बनाने के लिए अशोक या पान के पत्तों का उपयोग किया जाता है, जिसमें लाल और पीले फूल पिरोए जाते हैं।
देहली पर मां लक्ष्मी के पदचिह्न कब और क्यों बनाए जाते हैं?
दिवाली की शाम को चौखट पर पदचिह्न बनाए जाते हैं, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि के आगमन का संकेत माने जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·12 दिन पहले

दादी हर साल दिवाली पर आम के पत्तों का तोरण खुद अपने हाथों से बनाती थीं। मेन गेट पर वो जो फ्रेश फूलों की खुशबू आती थी, पूरा मोहल्ला महक उठता था।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·12 दिन पहले

बल्लभगढ़ के उदासीन आश्रम वाले महंत जी ने बिल्कुल सही बात पकड़ी है कि चौखट से ही घर की ऊर्जा तय होती है। अशोक के पत्तों का तोरण और जल से भरा कलश दरवाजे पर रखना हमारे प्राचीन खगोलीय और वास्तु विधान का बहुत सुंदर हिस्सा है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·12 दिन पहले

अदित्य जी, अशोक के पत्तों का तोरण सच में दरवाजे की रौनक ही बदल देता है, त्योहार पर घर सजाने का यह तरीका सदाबहार है!

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

दिवाली की सजावट पर तो बात हो गई, लेकिन क्या इन पारंपरिक नियमों को आज के फ्लैट या अपार्टमेंट के छोटे दरवाजों पर भी ठीक से आजमाया जा सकता है?

Meera Joshi@meera-joshi·12 दिन पहले

करन, बिल्कुल! महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने भी तो यही कहा है कि मुख्य देहरी ही सकारात्मकता का पहला द्वार है, जगह छोटी हो या बड़ी।

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