रोशनी के महापर्व दिवाली पर घर की शुद्धि, स्वच्छता और श्रद्धा भाव को समृद्धि के आगमन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर निर्मलता और सकारात्मक वातावरण रहता है, वहीं वैभव और आनंद का स्थायी निवास होता है। इसी कारण पर्व के अवसर पर आवास की सजावट, विशेषकर प्रवेश द्वार के प्रबंधन को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
बल्लभगढ़ स्थित उदासीन आश्रम के महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, प्रवेश द्वार ही किसी भी आवास में सकारात्मक शक्तियों के स्वागत की पहली सीढ़ी होता है। जब मुख्य देहरी को पारंपरिक मंगल प्रतीकों से विधिवत सजाया जाता है, तो परिवार के लिए उन्नति और सुख-शांति के मार्ग अपने आप सुलभ हो जाते हैं।
चौखट पर चरण चिह्न और मंगलकारी प्रतीक
दिवाली की शाम को मुख्य द्वार की चौखट पर मां लक्ष्मी के नन्हे पदचिह्न अंकित करने की सुदीर्घ परंपरा रही है। यह विधान घर के भीतर शुभता के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जिससे परिवार में शांति, सौहार्द और आर्थिक स्थिरता की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, मुख्य द्वार पर लाल रंग से स्वास्तिक और ॐ के पावन चिह्न अंकित करने का विशेष महत्व बताया गया है। जहां स्वास्तिक सौभाग्य और कल्याण का परिचायक है, वहीं ॐ का अंकन पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करता है, जिससे नकारात्मकता का नाश होकर वातावरण पूर्णतः पवित्र हो जाता है।
जल से भरा कलश और दीप प्रज्वलन का विधान
द्वार पर जल से भरा एक मंगल कलश स्थापित करना भी अत्यधिक शुभकारी माना जाता है। इस कलश के मुख पर आम के हरे पत्ते और जटाधारी नारियल रखा जाता है, जिसके साथ चावल और सुपारी समर्पित करने का नियम है। यह प्रबंध संपन्नता और वैभव का सूचक है, जिससे घर में धन-धान्य की निरंतरता बनी रहने की मान्यता है। कलश की स्थापना के निकट ही एक घी अथवा तेल का दीपक जलाना आवश्यक माना गया है। दीपक का प्रकाश केवल बाहरी अंधकार को ही दूर नहीं करता, बल्कि वातावरण में दिव्यता का संचार कर सौभाग्य के द्वार खोलता है।
पत्तों का तोरण और फूलों का संजाल
प्रवेश द्वार की ऊपरी देहरी पर अशोक अथवा पान के ताजे पत्तों से निर्मित तोरण बांधना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस बंदनवार में लाल और पीले रंग के ताजे फूल पिरोए जाते हैं। यह प्राकृतिक शृंगार न केवल भवन के बाहरी सौंदर्य को भव्यता प्रदान करता है, बल्कि घर में शांत, शीतल और समृद्ध परिवेश का निर्माण भी करता है। ऐसे पवित्र और सुव्यवस्थित द्वार से प्रवाहित होने वाली सकारात्मकता परिवार के जीवन में दीर्घकालिक उल्लास लाती है।
















