धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रकाश पर्व दीपावली की औपचारिक शुरुआत समूचे विश्व में सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन से होने जा रही है। सनातन परंपरा के तहत किसी भी बड़े उत्सव का शुभारंभ अवंतिकानाथ के दरबार से ही किया जाता है। इसी प्राचीन मान्यताओं का निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी आम जनमानस से एक दिन पहले, यानी 20 अक्टूबर को महाकालेश्वर मंदिर में उल्लास के साथ दीपोत्सव मनाया जाएगा। पर्व को लेकर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और दर्शनार्थियों की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देश भी लागू कर दिए हैं।
राजा के आंगन से त्योहार की शुरुआत की प्राचीन परंपरा
उज्जैन में हर प्रमुख हिंदू पर्व को आम जनता से एक दिन पूर्व मनाने के पीछे एक बेहद खास ऐतिहासिक व धार्मिक कारण जुड़ा है। महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश गुरु ने स्पष्ट किया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल को अवंतिका अर्थात उज्जैन का वास्तविक राजा माना जाता है। सनातन परंपरा यह विधान तय करती है कि किसी भी राज्य में उत्सव का श्रीगणेश सबसे पहले राजा के महल और आंगन से होना चाहिए। जब राजा के प्रांगण में उत्सव प्रारंभ हो जाता है, उसके पश्चात ही प्रजा अपने घरों में खुशियां मनाना शुरू करती है। अनादिकाल से चली आ रही इसी रीति के कारण इस वर्ष भी 20 अक्टूबर को महाकाल मंदिर में दीपावली का उल्लास छाएगा।
चारों प्रमुख आरतियों में जलेगी सिर्फ एक प्रतीकात्मक फूलझड़ी
मंदिर प्रबंध समिति द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार, 20 अक्टूबर को भगवान श्री महाकालेश्वर की दिनभर होने वाली सभी प्रमुख आरतियों में विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होगी। इस क्रम में भोर की भस्म आरती, अभ्यंग स्नान के बाद होने वाली आरती, संध्या आरती और रात्रि की शयन आरती के दौरान विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक आरती के समय परंपरा का पालन करते हुए केवल एक फूलझड़ी जलाई जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया पूर्णत: धार्मिक मर्यादा, शास्त्रीय विधान और पारंपरिक गरिमा के दायरे में रहकर पूरी की जाएगी ताकि मंदिर की मूल आध्यात्मिक पहचान बनी रहे।
सुरक्षा को लेकर कड़े नियम, पटाखों पर पूर्ण पाबंदी
अतीत में महाकाल दरबार के खुले स्थानों पर आतिशबाजी देखने को मिलती थी, परंतु वर्तमान परिस्थितियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि मंदिर के गर्भगृह, कोटी तीर्थ कुंड, मुख्य मंदिर परिसर और श्री महाकाल महालोक क्षेत्र में किसी भी तरह के पटाखे, अनार, आतिशबाजी या ज्वलनशील सामग्री लाने और जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने और श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही बनाए रखने के लिए यह सख्त निर्णय लिया गया है।
प्रशासन की अपील: मर्यादा और अनुशासन में मनाएं पर्व
दीपावली के पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के संग त्योहार मनाने और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेने उज्जैन पहुंचते हैं। इस भारी आवक को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन ने सभी स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले भक्तों से अपील की है कि वे दीपोत्सव को शांतिपूर्ण, पारंपरिक और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न करें। परिसर की स्वच्छता, अनुशासन और आध्यात्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी से सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग का अनुरोध किया गया है।
















