आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखती है, विशेषकर इसलिए क्योंकि यह पितृपक्ष के दौरान आती है। 6 अक्टूबर 2026 को इस पावन तिथि के साथ मंगलवार का दिन जुड़ने से एक अत्यंत फलदायी धार्मिक संयोग बन रहा है। इस दिन श्रद्धालु जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु की आराधना के साथ-साथ अपने पितरों की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं, वहीं मंगलवार का दिन होने से संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। उदया तिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी का व्रत इसी दिन रखा जा रहा है, जिससे भगवान विष्णु, पितृगण और मारुति नंदन तीनों की कृपा एक साथ प्राप्त करने का मार्ग खुलता है।
इंदिरा एकादशी का धार्मिक महात्म्य और पितृ उद्धार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति और मोक्ष प्रदान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति पूर्ण निष्ठा से इस एकादशी का उपवास रखकर अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध कर्म और अन्न-वस्त्र का दान करता है, तो उसके पितरों को यमयातना तथा पिशाच योनि के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत कुल के पूर्वजों को सद्गति प्रदान करने वाला माना गया है। पंचांग गणना के मुताबिक, एकादशी तिथि का आरंभ 6 अक्टूबर को देर रात 2:07 बजे हो रहा है और यह 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे तक प्रभावी रहेगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण एकादशी से जुड़े सभी अनुष्ठान 6 अक्टूबर को ही पूर्ण किए जाएंगे।
मंगलवार व्रत और संकटमोचन हनुमान जी की उपासना
ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक विधानों में मंगलवार का दिन मारुति नंदन हनुमान जी तथा नवग्रहों में सेनापति माने जाने वाले मंगल ग्रह को समर्पित है। इस दिन सुबह नित्यकर्मों और स्नान से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के पश्चात पवनपुत्र के समक्ष व्रत और पूजन का संकल्प लिया जाता है। पूजन क्रम में हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल पुष्प, गुड़ और चने का भोग अर्पित करने की परंपरा है। इसके उपरांत हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। साधना के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के नाम का स्मरण और जाप अवश्य करना चाहिए। शाम के समय मंदिर में दीप प्रज्वलित कर आरती करने से साधक को मानसिक संबल और शांति मिलती है।
मंगल दोष निवारण और ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जिन जातकों की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर स्थिति में हो अथवा मंगल दोष के कारण जीवन में बाधाएं आ रही हों, उनके लिए मंगलवार के दिन हनुमान साधना विशेष रूप से लाभकारी होती है। इस अवसर पर हनुमान जी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने, लाल रंग की वस्तुओं का दान करने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से मंगल ग्रह के प्रतिकूल प्रभाव शांत होते हैं तथा शुभ फलों में वृद्धि होती है। इस प्रकार एकादशी और मंगलवार के इस युगल योग में श्रीहरि, पितृ देवता और महावीर हनुमान की संयुक्त आराधना समस्त अमंगलों को दूर करने वाली मानी गई है।
6 अक्टूबर 2026 की पंचांगीय स्थिति
पंचांगीय विवरण के अनुसार, इस दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 12:34 बजे तक रहेगी। नक्षत्रों की बात करें तो अश्लेशा नक्षत्र रात 10:17 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मघा नक्षत्र का आरंभ होगा। करण में बव करण दोपहर 01:19 बजे तक रहेगा, जिसके बाद बालव करण 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे तक विद्यमान रहेगा। योग के अंतर्गत सिद्ध योग सुबह 07:20 बजे तक रहेगा, तत्पश्चात साध्य योग 7 अक्टूबर को सुबह 05:00 बजे तक प्रभावी रहेगा। चंद्र राशि कर्क रहेगी, जो बाद में सिंह राशि में संचरण करेगी। दिशाशूल की स्थिति उत्तर दिशा में रहेगी। चंद्रोदय का समय 7 अक्टूबर को तड़के 02:53 बजे दर्ज किया गया है। शिववास की स्थिति 7 अक्टूबर की रात 12:34 बजे तक कैलाश पर रहेगी, इसके बाद नंदी पर वास रहेगा।
दिन के शुभ मुहूर्त और विशेष योग
दैनिक कार्यों और मांगलिक अनुष्ठानों के लिए शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व रहता है। दिन के मुख्य शुभ काल इस प्रकार रहेंगे
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 बजे से 05:28 बजे तक रहेगा।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक (तथा अन्य गणना में सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक) रहेगा।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 बजे से 02:54 बजे तक रहेगा।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से 06:27 बजे तक रहेगा।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:46 बजे से 7 अक्टूबर की रात 12:35 बजे तक रहेगा।
- अमृत काल: रात 08:44 बजे से 10:16 बजे तक (एवं 10:17 बजे तक) रहेगा।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:17 बजे से रात 10:17 बजे तक बना रहेगा।
अशुभ काल और वर्जित समय सारणी
किसी भी नए अथवा महत्वपूर्ण कार्य को आरंभ करते समय अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है। दिन के प्रमुख अशुभ काल निम्नलिखित हैं
- राहुकाल: दोपहर 03:06 बजे से शाम 04:34 बजे तक (तथा दोपहर 3:10 बजे से शाम 4:38 बजे तक) रहेगा।
- यमगण्ड काल: सुबह 09:14 बजे से 10:42 बजे तक प्रभावी रहेगा।
- गुलिक काल: दोपहर 12:10 बजे से 01:38 बजे तक (तथा दोपहर 12:15 बजे से 1:42 बजे तक) रहेगा।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 08:38 बजे से 09:25 बजे तक रहेगा।
- वर्ज्य काल: सुबह 11:29 बजे से दोपहर 01:02 बजे तक रहेगा।



















