ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान शानदार खेल दिखाने वाले भारतीय भारोत्तोलन दल के सदस्यों को राजधानी दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खिलाड़ियों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि मंच पर हासिल किया गया उनका हर एक तमगा पूरे देश के लिए अत्यंत गर्व और आनंद का विषय बनता है।
भारोत्तोलकों का शानदार प्रदर्शन और पुरस्कार राशि
इस प्रतिष्ठित महाकुंभ में भारतीय दल ने कुल मिलाकर आठ पदक अपने नाम किए, जिसमें एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य पदक शामिल रहा। दिग्गज भारोत्तोलक और ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू इस स्पर्धा में देश के लिए एकमात्र स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहीं। उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें तीस लाख रुपये की पुरस्कार राशि का चेक सौंपा गया। इसके अलावा, रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को बीस लाख रुपये और कांस्य पदक पर कब्जा जमाने वाले एथलीट को दस लाख रुपये प्रदान किए गए।
संसद में गूंजी पदकवीरों की सफलता
खिलाड़ियों के सम्मान में आयोजित समारोह में बोलते हुए खेल मंत्री ने उनकी मेहनत की सराहना की और बताया कि किस तरह राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की जीत का असर संसद भवन के भीतर भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान जब भी किसी भारतीय एथलीट ने पदक अपने नाम किया, तो संसद की विधिवत कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सदन में इस बात की घोषणा की गई थी। साथ ही, उन्होंने उन खिलाड़ियों का भी हौसला बढ़ाया जो इस बार पोडियम तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि कोई भी खिलाड़ी कभी पराजित नहीं होता, बल्कि वह या तो जीत हासिल करता है या फिर भविष्य के लिए सीख लेता है.
मीराबाई चानू का अगला लक्ष्य एशियाई खेल
ग्लास्गो के इस संस्करण में स्वर्ण पदक जीतकर मीराबाई ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान हासिल करने का गौरव प्राप्त किया। इससे पहले उन्होंने साल 2018 और 2022 के आयोजनों में भी सोने के तमगे अपने नाम किए थे। सम्मान समारोह के समापन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपार स्नेह और सम्मान मिला है तथा देश के लिए कुछ कर पाना उनके लिए गर्व की बात है। आगामी योजनाओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों में जुट गई हैं, जहां वह 49 किलोग्राम भार वर्ग में उतरेंगी क्योंकि 48 किलोग्राम वर्ग को अब हटा दिया गया है।
भविष्य की रणनीतियां और ओलंपिक पर विचार
एशियाई खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस स्टार एथलीट ने बताया कि यह पदक उनके करियर के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यही एकमात्र ऐसा बड़ा तमगा है जो फिलहाल उनके नाम के आगे नहीं जुड़ा है। उन्होंने स्वीकार किया कि आगामी प्रतियोगिता में मुकाबला बेहद कठिन रहने वाला है, लेकिन वह उस विशिष्ट पदक को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देंगी। ओलंपिक खेलों की तैयारियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्होंने ओलंपिक को लेकर कोई विस्तृत योजना नहीं बनाई है और उनका पूरा ध्यान केवल एशियाई खेलों पर केंद्रित है, जिसके बाद ही वह अगले पड़ाव के बारे में सोचेंगी।



















