कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान मीराबाई चानू के प्रदर्शन को लेकर काफी चर्चा हो चुकी है, और एशियन गेम्स के शुरू होने तक यह सिलसिला जारी रहने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, इस बात से कोई इंकार नहीं किया जा सकता कि कॉमनवेल्थ में जिस शानदार अंदाज में मीराबाई चानू ने खेल दिखाया, वह देश के उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी सीख है जो खुद के लिए और भारत के लिए खेल की दुनिया में ऊंचा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं।
गोल्ड मेडल जीतने के अगले ही दिन ट्रेनिंग सेंटर पहुंचीं
जिस दिन मीराबाई चानू ने अपना गोल्ड मेडल अपने नाम किया, उस समय हर किसी को यही उम्मीद थी कि वह थोड़ा विश्राम करेंगी और सुकून के कुछ पल बिताएंगी। आखिरकार, यह उनका लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड था। ग्लासगो में मौजूद कुछ पत्रकारों ने उन्हें चुपचाप एसईसी के ट्रेनिंग सेंटर की ओर जाते हुए देखा था। जब उनसे यह सवाल किया गया कि वह वहां क्या करने जा रही हैं, तो मीराबाई चानू का जवाब बेहद स्पष्ट था कि वह ट्रेनिंग के लिए जा रही हैं और एक भी दिन का अभ्यास मिस नहीं कर सकतीं। एक सच्चे चैंपियन से इसी तरह के जवाब की उम्मीद की जाती है जो अपनी सफलता के बाद भी रुकना नहीं जानता।
एशियन गेम्स पर टिकी है अगली नजर
मीराबाई चानू ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दृढ़ता के साथ कहा कि वह केवल कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता पर रुकना नहीं चाहती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य अब एशियन गेम्स है और वहां बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए वह अपनी तरफ से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगी। इस दौरान उनकी आंखों में एक गजब की जिद और गंभीरता साफ नजर आ रही थी, जो उनकी सामान्य हंसमुख छवि से बिल्कुल अलग एक बेहद समर्पित एथलीट की थी। उनके कोच ने भी इस बात को दोहराया कि यही वह कभी न बुझने वाली भूख है जो मीराबाई के भीतर हमेशा जलती रहती है और उन्हें हर दिन और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।
चैंपियन बनने के लिए लीक से हटकर चलना पड़ता है
मीराबाई चानू के कोच विजय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया में सबसे आगे यानी वर्ल्ड-बीटर बनने के लिए आपको सामान्य से अलग रास्ता चुनना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि भले ही आपने कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड जीत लिया हो, लेकिन आप इस एक सफलता से संतुष्ट होकर नहीं बैठ सकते हैं। खिलाड़ी को उस स्वर्ण पदक को पीछे छोड़कर एशियन गेम्स जैसी और भी अधिक कठिन प्रतियोगिता के लिए तुरंत अभ्यास शुरू करना होता है, जो कि एक बहुत बड़ी चुनौती है। कोच की इच्छा है कि खेल जगत की हर युवा प्रतिभा की सोच ऐसी ही बने। सवाल यह उठता है कि आखिर देश में केवल एक ही मीराबाई क्यों हो, बल्कि बाकी एथलीटों को भी उनसे सीख लेनी चाहिए ताकि देश को कई और मीराबाई मिल सकें, हालांकि यह भी सच है कि मीराबाई चानू जैसी लगन हर किसी में आसानी से नहीं मिलती।



















