नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पनामा के खिलाफ इंग्लैंड के मुकाबले को काफी आसान माना जा रहा था, लेकिन मैच के पहले हाफ में पनामा ने जिस तरह की कड़ी टक्कर दी, उसने दर्शकों को हैरान कर दिया। हालांकि, दूसरे हाफ में जूड बेलिंगहैम और हैरी केन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड की जीत सुनिश्चित की। मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने 2-0 से जीत हासिल की। थॉमस टुखेल की कोचिंग में इंग्लैंड की टीम ने ग्रुप L में पहला स्थान हासिल कर लिया है और अब वे अंतिम 32 के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
बेलिंगहैम और केन का जादुई प्रदर्शन
न्यू जर्सी में बारिश से भीगे मैदान पर मैच के लगभग एक घंटे बीत जाने के बाद, रियल मैड्रिड के स्टार खिलाड़ी जूड बेलिंगहैम ने मैच का रुख मोड़ दिया। उन्होंने बुकायो साका द्वारा लिए गए कॉर्नर किक पर शानदार गोल करके इंग्लैंड को बढ़त दिलाई। इससे पहले तक इंग्लैंड का खेल ज्यादा प्रभावशाली नजर नहीं आ रहा था, हालांकि गोल करने के अवसर लगातार बन रहे थे।
पहला गोल करने के बाद बेलिंगहैम ने अपनी लय बरकरार रखी और एक बेहतरीन क्रॉस दिया, जिस पर कप्तान हैरी केन ने हेडर के जरिए गेंद को गोल पोस्ट के अंदर भेज दिया। इस टूर्नामेंट में हैरी केन का यह तीसरा गोल है। इसके साथ ही केन ने गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और अब वे वर्ल्ड कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। केन के नाम वर्ल्ड कप में कुल 11 गोल हो चुके हैं।
ग्रुप स्टेज का विश्लेषण और पनामा की स्थिति
इस मैच के पहले घंटे तक इंग्लैंड की वर्ल्ड कप तैयारियों पर सवालिया निशान उठ रहे थे। टीम अभी तक क्रोएशिया के खिलाफ मिली जीत वाली लय को वापस पाने के लिए संघर्ष करती दिखी। हालांकि, तीन मैचों में 7 अंक हासिल कर ग्रुप में शीर्ष पर रहने के साथ ही इंग्लैंड ने अगले दौर में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है। अब इंग्लैंड की टीम अगले बुधवार, 1 जुलाई को अटलांटा में उस टीम के खिलाफ खेलेगी जो अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही है।
दूसरी ओर, दुनिया की 34वीं रैंक वाली टीम पनामा ने काफी मेहनत की, लेकिन वे प्रभावी मौके बनाने में नाकाम रहे। इस वर्ल्ड कप में पनामा एक भी अंक हासिल नहीं कर सका और टूर्नामेंट से बाहर हो गया है। पनामा ने 2018 में अपने पहले वर्ल्ड कप में भी तीनों मैच हारे थे और इस बार भी वे तीनों मैच हारकर बाहर हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि पनामा इस वर्ल्ड कप में एक भी गोल करने में असफल रहा है।
मैच के अहम पल
शुरुआती 10 मिनट के भीतर ही मार्कस रैशफोर्ड ने पनामा के गोलकीपर ऑरलांडो मोस्केरा से एक शानदार बचाव करवाया था। इसके अलावा इलियट एंडरसन के क्रॉस पर भी रैशफोर्ड ने हेडर से गोल करने की कोशिश की, जो बार के ऊपर से निकल गई। पहले हाफ के इंजरी टाइम में उनकी फ्री-किक भी पोस्ट के बेहद करीब से बाहर चली गई। पहले हाफ में इंग्लैंड का खेल काफी धीमा था, लेकिन ब्रेक के बाद टीम ने आक्रामक रुख अपनाया।
जोस कॉर्डोबा की एक गलत क्लियरेंस उनके साथी खिलाड़ी एंड्रेस आंद्रादे से टकराकर आत्मघाती गोल में बदलने वाली थी, लेकिन किस्मत से गेंद बार के ऊपर से निकल गई। दबाव लगातार बढ़ रहा था और 62वें मिनट में इंग्लैंड को सफलता मिल ही गई। साका के कॉर्नर पर बेलिंगहैम ने जॉर्ज गुटिएरेज को पीछे छोड़ते हुए गेंद को नेट में डाल दिया। अंत में पनामा के खिलाड़ी जोस फाजार्डो ने एक गोल किया, लेकिन उसे ऑफसाइड होने के कारण अमान्य घोषित कर दिया गया। 2014 के बाद से यह इंग्लैंड का वर्ल्ड कप ग्रुप स्टेज में अब तक का सबसे औसत प्रदर्शन माना जा रहा है।













