जापान के नागोया में जारी एशियन गेम्स 2026 में 2 अक्टूबर का दिन भारतीय दल के लिए बेहद यादगार साबित हुआ, जहां देश की झोली में एक ही दिन 5 गोल्ड मेडल आए। इन ऐतिहासिक पलों के बीच भारतीय महिला मुक्केबाज परवीन हुड्डा ने बॉक्सिंग रिंग के भीतर जबरदस्त दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। 65 किग्रा भार वर्ग के खिताबी मुकाबले में उन्होंने चीनी ताइपे की अनुभवी मुक्केबाज चेन निएन-चिन को बेहद कड़े मुकाबले में 3-2 के स्प्लिट डिसिजन से पराजित कर भारत के लिए स्वर्णिम सफलता हासिल की। चार साल पुराने विवाद और करियर पर लगे लंबे ग्रहण के बाद यह मुकाबला परवीन के लिए केवल एक पदक की जंग नहीं, बल्कि खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोबारा साबित करने की ऐतिहासिक चुनौती थी।
22 महीने के लंबे बैन और पदक छिनने का गहरा दर्द
परवीन हुड्डा के करियर का सफर आसान नहीं रहा है। चार वर्ष पहले साल 2022 के एशियन गेम्स में उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। हालांकि, इसके बाद अपने ठिकाने की सही जानकारी दर्ज न कराने यानी व्हेयरअबाउट्स से जुड़े नियमों के उल्लंघन के चलते इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने उन पर कड़ा रुख अख्तियार किया। इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परवीन पर 22 महीने का निलंबन लगा दिया था। इस सख्त फैसले के परिणामस्वरूप हांगझोऊ एशियन गेम्स में जीता हुआ उनका ब्रॉन्ज मेडल वापस छीन लिया गया। इतना ही नहीं, खेल पंचाट और एजेंसी के नियमों के तहत 11 दिसंबर 2022 से लेकर 17 मई 2024 के बीच दर्ज किए गए उनके सभी आधिकारिक मुकाबलों के नतीजों को पूरी तरह अमान्य घोषित कर दिया गया था।
टूटा था पेरिस ओलंपिक का सपना, फिर भी नहीं डिगा हौसला
निलंबन का सबसे बड़ा झटका परवीन के उस सपने को लगा, जिसे हर एथलीट अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है। 22 महीने के इस बैन के कारण वह पेरिस ओलंपिक के क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट्स में भाग लेने से वंचित रह गईं। ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका हाथ से निकल जाने के बाद किसी भी खिलाड़ी के लिए वापसी करना मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है। इसके बावजूद परवीन ने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और रिंग में लौटने के संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया। 17 मई 2024 को निलंबन अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने रिंग में नई ऊर्जा के साथ कदम रखा और अपनी तकनीकी कमजोरियों को दूर करने में पूरी ताकत झोंक दी।
रिंग में सटीक रणनीति और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की फेहरिस्त
परवीन हुड्डा इससे पहले 63 किग्रा भार वर्ग में भी भारतीय मुक्केबाजी का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। रिंग के भीतर उनकी पहचान तेज तर्रार फुटवर्क, सटीक पंचिंग रेंज, प्रतिद्वंद्वी के हमलों को भांपने की अद्भुत क्षमता और अंतिम पलों के भारी दबाव को संभालने की रणनीति के लिए है। वैश्विक पटल पर उन्हें वास्तविक ख्याति साल 2022 की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मिली थी, जब उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। उसी साल उन्होंने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्णिम पंच लगाते हुए गोल्ड मेडल जीता था। अपनी फॉर्म को लगातार निखारते हुए उन्होंने वर्ष 2025 के वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भी गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मजबूत वापसी का ऐलान किया था। अब नागोया में 65 किग्रा वर्ग का यह एशियन गेम्स गोल्ड उनकी शानदार खेल यात्रा का सबसे गौरवशाली पड़ाव बन गया है।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर परवीन हुड्डा के पदक
परवीन हुड्डा ने अपने मुक्केबाजी करियर में देश के लिए कई बड़े सम्मान अर्जित किए हैं, जिनका ब्योरा इस प्रकार है
- 2026 एशियन गेम्स: गोल्ड मेडल (65 किग्रा भार वर्ग)
- 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल: गोल्ड मेडल
- 2022 एशियन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप: गोल्ड मेडल
- 2022 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप: ब्रॉन्ज मेडल



















