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नागोया में बरानिका एलांगोवन ने रचा कीर्तिमान, एशियन गेम्स पोल वॉल्ट में भारत को दिलाया पहला कांस्य पदकखेल
25 सित॰ 2026, 7:49 pm (20 मिनट पहले)· 0

नागोया में बरानिका एलांगोवन ने रचा कीर्तिमान, एशियन गेम्स पोल वॉल्ट में भारत को दिलाया पहला कांस्य पदक

तमिलनाडु की 29 वर्षीय एथलीट बरानिका एलांगोवन ने नागोया एशियन गेम्स के पोल वॉल्ट इवेंट में 4.15 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता, जो इस खेल में भारत का पहला पदक है.

जापान के नागोया में आयोजित एशियन गेम्स के ट्रैक एंड फील्ड मुकाबलों से भारत के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है. तमिलनाडु के मयिलादुथुरई की रहने वाली 29 साल की महिला एथलीट बरानिका एलांगोवन ने पोल वॉल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया है. एशियन गेम्स के पूरे इतिहास में भारत ने कभी भी पोल वॉल्ट के खेल में कोई पदक नहीं जीता था, चाहे वह पुरुषों का वर्ग रहा हो या महिलाओं का. बरानिका ने फाइनल मुकाबले में 4.15 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार करते हुए इस सूखे को समाप्त कर दिया. उनके साथ रूस की पोलिना इवानोवा ने भी 4.15 मीटर की छलांग लगाई. जब दोनों ही खिलाड़ी 4.25 मीटर के अगले प्रयास में विफल रहीं, तब प्रतियोगिता के काउंटबैक नियम के तहत दोनों एथलीटों को संयुक्त रूप से कांस्य पदक प्रदान किया गया.

शुरुआती सफर और खेल का चुनाव

बरानिका एलांगोवन का जन्म 3 फरवरी 1997 को हुआ था. खेल की दुनिया में कदम रखते समय उनका पहला लगाव पोल वॉल्ट से बिल्कुल नहीं था. मयिलादुथुरई से जब वह अपनी कॉलेज की उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए चेन्नई पहुंचीं, तब वह लॉन्ग जंप और ट्रिपल जंप जैसे पारंपरिक जंपिंग इवेंट्स में हिस्सा लिया करती थीं. उस समय उनका शारीरिक वजन केवल 42 किग्रा था. इतने कम वजन की वजह से उनके मन में यह हिचक रहती थी कि भारी पोल को थामकर तेज रफ्तार से दौड़ना और शरीर को ऊपर उठाना उनके बस की बात नहीं होगी. उन्हें लगता था कि पोल वॉल्ट जैसे अत्यधिक ताकतवर खेल के लिए उनका शरीर उपयुक्त नहीं है.

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उनकी खेल यात्रा में निर्णायक मोड़ साल 2016 में आया. चेन्नई के इथिराज कॉलेज के शारीरिक शिक्षा निदेशक ने बरानिका की एथलेटिक क्षमता को पहचाना और उनका परिचय कोच मिल्बर बर्ट्रेंड रसेल से कराया. जब बरानिका ने मैदान पर दूसरे एथलीटों को एक लचीले पोल के सहारे हवा में कई मीटर ऊंची बाउंड्री पार करते देखा, तो उनके भीतर भी इस साहसिक खेल को अपनाने का जज्बा जागा. उन्होंने मन ही मन पोल वॉल्ट की जटिलताओं को सीखने और हवा में छलांग लगाने का फैसला किया. पोल वॉल्ट तकनीक, संतुलन और विस्फोटक ताकत की मांग करने वाला खेल है, इसलिए शुरुआती दिनों में उन्हें अपनी मांसपेशियों को मजबूत करने और खेल की मूलभूत तकनीक को समझने में काफी समय और पसीना बहाना पड़ा.

भयंकर चोट और करियर पर संकट

जब बरानिका का खेल धीरे-धीरे संवर रहा था, तभी साल 2019 में उनके खेल जीवन पर एक बड़ा संकट आ गया. एक नियमित अभ्यास सत्र के दौरान लैंडिंग मैट की खराबी के कारण वह सीधे पोल-वॉल्ट बॉक्स के कठोर हिस्से में जा गिरीं. यह दुर्घटना बेहद गंभीर थी. उनके बाएं पैर के घुटने की एसीएल (ACL) और मेनिस्कस की मांसपेशियां पूरी तरह फट गईं. पोल वॉल्ट में टेक-ऑफ करने के लिए बायां पैर ही उनका मुख्य आधार था, इसलिए इस चोट ने उनके पूरे एथलेटिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया था. डॉक्टरों ने तत्काल सर्जरी की सलाह दी, जिसके बाद उन्हें एक लंबी और पीड़ादायक पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.

सर्जरी के बाद ट्रैक पर लौटना आसान नहीं रहा. समुचित देखभाल और आधुनिक रिहैबिलिटेशन सुविधाओं की भारी कमी के चलते उन्हें वर्षों तक असहनीय दर्द सहना पड़ा. शारीरिक कमजोरी इस कदर हावी थी कि वह रोजाना अभ्यास भी नहीं कर पाती थीं और उन्हें एक दिन छोड़कर ही ट्रेनिंग करनी पड़ती थी. इन तमाम मानसिक और शारीरिक बाधाओं के बावजूद बरानिका ने कभी हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने धैर्यपूर्वक अपनी रिकवरी पर काम किया और धीरे-धीरे ट्रैक पर अपनी गति और ताकत को दोबारा हासिल किया.

ओडिशा में नया ठिकाना और तकनीकी सुधार

अपने करियर को नई उड़ान देने के इरादे से बरानिका ने साल 2023 में एक बड़ा निर्णय लिया और अपनी ट्रेनिंग का ठिकाना तमिलनाडु से बदलकर ओडिशा स्थानांतरित कर लिया. भुवनेश्वर स्थित कलिंगा स्टेडियम की विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना, आधुनिक उपकरणों और बेहतर माहौल ने उनके खेल को नई दिशा प्रदान की. हालांकि तीन बार नेशनल आउटडोर चैंपियन रहने के बाद भी 2023 की एशियन चैंपियनशिप में वह एक भी वैध छलांग नहीं लगा सकी थीं और उन्हें नो-मार्क का निराशाजनक परिणाम झेलना पड़ा था. लेकिन इस असफलता से टूटने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और 2026 के नए सीजन में पूरी तैयारी के साथ वापसी की.

साल 2026 में राष्ट्रीय रिकॉर्ड का सफर

साल 2026 बरानिका एलांगोवन के खेल जीवन का स्वर्णिम दौर साबित हुआ. इस सीजन में उन्होंने लगातार कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किए. मार्च 2026 में बेंगलुरु के मैदान पर आयोजित इंडियन ओपन जंप्स प्रतियोगिता में उन्होंने 4.10 मीटर की दूरी पार कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया और साथ ही एशियन गेम्स के लिए तय क्वालीफाइंग मार्क भी हासिल कर लिया. इसके कुछ ही दिनों बाद भुवनेश्वर में पहली नेशनल इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन हुआ, जहां उन्होंने 4.22 मीटर की ऊंचाई नापकर रोज़ी मीना पॉलराज के 4.21 मीटर के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया.

अपनी इस लय को बरकरार रखते हुए उन्होंने ठीक पांच हफ्ते बाद, 3 मई को भुवनेश्वर में ही इंडियन इंडोर ओपन कंबाइंड इवेंट्स एंड पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. यहां तीसरे प्रयास में 4.23 मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने अपने ही बनाए राष्ट्रीय रिकॉर्ड को फिर से बेहतर किया. इस स्पर्धा में नितिका अनूप अकारे और ब्लेसी कुंजुमन 3.90 मीटर के प्रदर्शन के साथ काफी पीछे रह गईं और बरानिका ने आसानी से पहला स्थान हासिल किया. इसके बाद जून के महीने में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 4.20 मीटर का आंकड़ा पार करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया.

नागोया के मंच पर ऐतिहासिक प्रदर्शन

नागोया एशियन गेम्स के मुख्य मुकाबले में उतरने से पहले बरानिका का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 4.23 मीटर दर्ज था. पूरे 2026 के घरेलू सीजन में उनकी ट्रेनिंग पार्टनर और साथी फाइनलिस्ट सिंधुश्री गणेशा के साथ उनका कड़ा मुकाबला चलता रहा था. दोनों भारतीय एथलीटों के बीच की इस सकारात्मक प्रतिद्वंद्विता ने दोनों के खेल के स्तर को ऊपर उठाने में बड़ी भूमिका निभाई. जब नागोया में एशियन गेम्स का फाइनल शुरू हुआ, तब सिंधुश्री तीन लगातार असफल प्रयासों के कारण मुकाबले से जल्दी बाहर हो गईं. लेकिन बरानिका ने दबाव के क्षणों में अपने संयम को बनाए रखा और 4.15 मीटर का मार्क क्लीयर करके पोडियम पर अपनी जगह पक्की की. इस ऐतिहासिक पदक ने न केवल बरानिका के संघर्ष को सम्मान दिलाया, बल्कि भारतीय पोल वॉल्ट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया.

सवाल-जवाब

बरानिका एलांगोवन ने नागोया एशियन गेम्स में कौन सा पदक जीता?
बरानिका एलांगोवन ने महिलाओं की पोल वॉल्ट स्पर्धा में 4.15 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता.
पोल वॉल्ट में भारत के लिए यह पदक क्यों ऐतिहासिक है?
एशियन गेम्स के इतिहास में पुरुषों और महिलाओं दोनों वर्गों को मिलाकर यह पोल वॉल्ट में भारत का पहला पदक है.
फाइनल में कांस्य पदक का फैसला कैसे हुआ?
बरानिका और रूस की पोलिना इवानोवा दोनों ने 4.15 मीटर की कूद लगाई और 4.25 मीटर में विफल रहीं, जिसके बाद काउंटबैक नियम से दोनों को कांस्य पदक मिला.
बरानिका एलांगोवन मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं?
बरानिका एलांगोवन तमिलनाडु के मयिलादुथुरई की रहने वाली हैं.
साल 2019 में बरानिका के साथ क्या हादसा हुआ था?
अभ्यास के दौरान खराब लैंडिंग मैट की वजह से वह पोल-वॉल्ट बॉक्स में गिर गईं, जिससे उनके बाएं पैर के घुटने की एसीएल और मेनिस्कस की मांसपेशियां फट गई थीं.
बरानिका का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ और राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रदर्शन क्या रहा है?
उन्होंने मई 2026 में भुवनेश्वर में 4.23 मीटर की छलांग लगाकर अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ भी है.
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