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नीति आयोग की 10 सदस्यीय टास्क फोर्स संभालेगी जिम्मा, भारत में फॉर्मूला वन की 2028 में वापसी की तैयारीखेल
19 सित॰ 2026, 6:16 pm (38 दिन पहले)· 0

नीति आयोग की 10 सदस्यीय टास्क फोर्स संभालेगी जिम्मा, भारत में फॉर्मूला वन की 2028 में वापसी की तैयारी

केंद्र सरकार ने देश में फॉर्मूला वन और मोटर स्पोर्ट्स को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर काम करने के लिए नीति आयोग की अगुवाई में एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है.

देश के मोटर स्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए एक बेहद उत्साहजनक पहल सामने आई है. भारत में शीर्ष स्तरीय कार रेसिंग की बहाली को लेकर आधिकारिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं. केंद्र सरकार ने मोटर स्पोर्ट्स और फॉर्मूला वन को घरेलू ट्रैक पर वापस लाने के मकसद से एक समर्पित टास्क फोर्स का गठन किया है. इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2028 तक भारत में ग्रां प्री के सफल आयोजन की व्यावहारिक संभावनाओं को तलाशना और जरूरी कदम उठाना है.

नीति आयोग के नेतृत्व में बनी 10 सदस्यीय टीम

इस विशेष टास्क फोर्स की कमान नीति आयोग को सौंपी गई है, जिसमें लगभग 10 सदस्य शामिल किए जाएंगे. प्रशासनिक स्तर पर युगल किशोर जोशी को इस पूरी टीम की बागडोर दी गई है. यह दल केवल आयोजनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के पूरे मोटर स्पोर्ट्स तंत्र का गहन विश्लेषण भी करेगा. टीम की प्राथमिक जिम्मेदारी यह पता लगाना होगी कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत में रेसिंग का सुरक्षित और निर्बाध माहौल कैसे तैयार किया जाए.

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टैक्स विवाद और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने की चुनौती

भारत में मोटर रेसिंग के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा पूर्व में उपजे टैक्स और नीतिगत विवाद रहे हैं. नई टास्क फोर्स के सामने सबसे अहम कार्य इन्हीं आर्थिक और वैधानिक जटिलताओं का स्थाई समाधान तलाशना होगा. इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए खेल मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही मोटर स्पोर्ट्स क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों की सलाह से एक स्पष्ट रोडमैप बनाया जाएगा, ताकि 2028 में प्रस्तावित ग्रां प्री का आयोजन कानूनी और वित्तीय रूप से पूरी तरह व्यावहारिक साबित हो सके.

बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का इतिहास और विदाई के कारण

भारतीय रेस ट्रैक पर आखिरी आधिकारिक फॉर्मूला वन रेस 27 अक्टूबर 2013 को ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर आयोजित की गई थी. देश में कुल तीन बार 2011, 2012 और 2013 में इस अंतरराष्ट्रीय रेस का रोमांच देखा गया था. इन तीनों ही सत्रों में दिग्गज रेसर सेबेस्टियन वेट्टेल ने खिताबी जीत दर्ज की थी. इसके बाद प्रशासनिक अड़चनों के चलते इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का भारत में सफर थम गया था.

मनोरंजन कर और आर्थिक बोझ से थमी थी रफ्तार

भारत से इस आयोजन के हटने का मुख्य आधार तत्कालीन कराधान व्यवस्था थी. उस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने फॉर्मूला वन को खेल गतिविधि मानने के बजाय मनोरंजन की श्रेणी में वर्गीकृत कर दिया था. इस निर्णय के चलते आयोजकों पर भारी भरकम मनोरंजन कर थोप दिया गया था. इसके अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी, भारी लाइसेंस फीस और उस दौर में जरूरी सरकारी सहयोग के अभाव ने इवेंट पर आर्थिक दबाव असहनीय बना दिया था. अब करीब 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सरकारी पहल से उम्मीद बंधी है कि दुनिया की सबसे तेज रफ्तार कारें फिर से भारतीय सर्किट पर गरजती दिख सकती हैं.

सवाल-जवाब

भारत में फॉर्मूला वन की वापसी के लिए किस संस्थान की अगुवाई में टीम बनाई गई है?
केंद्र सरकार ने नीति आयोग की अध्यक्षता में एक 10 सदस्यीय टास्क फोर्स गठित की है, जिसकी जिम्मेदारी युगल किशोर जोशी को दी गई है.
भारत में दोबारा ग्रां प्री आयोजित करने का लक्ष्य किस वर्ष के लिए तय किया गया है?
टास्क फोर्स वर्ष 2028 में भारत में दोबारा फॉर्मूला वन ग्रां प्री आयोजित करने की संभावना और व्यवहारिकता पर काम कर रही है.
भारत में आखिरी बार फॉर्मूला वन रेस कब और कहां आयोजित हुई थी?
देश में आखिरी फॉर्मूला वन रेस 27 अक्टूबर 2013 को ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर आयोजित की गई थी.
भारत में आयोजित हुई तीनों फॉर्मूला वन रेस किस ड्राइवर ने जीती थीं?
भारत में 2011, 2012 और 2013 में कुल तीन रेस आयोजित हुई थीं और तीनों ही बार सेबेस्टियन वेट्टेल ने जीत दर्ज की थी.
2013 के बाद भारत से फॉर्मूला वन बंद होने का मुख्य कारण क्या था?
मुख्य वजह तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इसे खेल के बजाय मनोरंजन श्रेणी में रखकर भारी टैक्स लगाना, लाइसेंस शुल्क, सीमा शुल्क और सरकारी सहयोग का अभाव था.
नई टास्क फोर्स में कौन-कौन से प्रमुख मंत्रालय और विशेषज्ञ शामिल होंगे?
इस कार्ययोजना में खेल मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मोटर स्पोर्ट्स के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे.
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