भारत के युवा एथलीट्स अब उन खेलों में भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं, जिनमें देश की उपस्थिति पारंपरिक रूप से सीमित रही है। उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी 21 साल के युवा अद्युत डोभाल ने एडवेंचर स्पोर्ट्स की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। फिलीपींस के गहरे पानी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय फ्रीडाइविंग प्रतियोगिता के दौरान अद्युत ने 102 मीटर की कुल दूरी तय करके नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। 2 अगस्त को संपन्न हुई इस प्रतियोगिता में उन्होंने फ्री इमर्शन श्रेणी में भाग लेते हुए यह उपलब्धि हासिल की। वह भारत के सबसे कम उम्र के ऐसे एथलीट बन गए हैं, जिन्होंने इस चुनौतीपूर्ण विधा में इस स्तर पर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है।
FIM कैटेगरी में 102 मीटर का ऐतिहासिक सफर
फ्रीडाइविंग की फ्री इमर्शन (FIM) श्रेणी में गोताखोर बिना किसी सांस लेने वाले उपकरण के, केवल एक रस्सी को पकड़कर गहराई में उतरते हैं और वापस ऊपर आते हैं। अद्युत डोभाल ने इस जलपरी जैसी कला का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए 51 मीटर नीचे पानी की गहराई तक गोता लगाया और फिर सुरक्षित रूप से सतह पर वापस लौट आए। इस प्रकार उन्होंने कुल 102 मीटर की दूरी महज 2 मिनट 40 सेकंड के आश्चर्यजनक समय में पूरी की। इस कठिन स्पर्धा की तैयारी उन्होंने जुलाई महीने से ही शुरू कर दी थी। अपनी ट्रेनिंग को पुख्ता करने के लिए अद्युत खुद फिलीपींस में रहकर कई हफ्तों तक कड़ा अभ्यास करते रहे, ताकि वहां की समुद्री परिस्थितियों और दबाव से तालमेल बिठा सकें।
योग और मानसिक मजबूती का बड़ा योगदान
अद्युत पिछले तीन वर्षों से फ्रीडाइविंग के खेल से जुड़े हुए हैं। इतनी गहराई में पानी का दबाव शरीर और फेफड़ों पर अत्यधिक प्रभाव डालता है। अद्युत ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए उनका मुख्य ध्यान गहराई में जाने के दौरान फेफड़ों की सुरक्षा और चोट से बचने पर था। उनके अनुसार, फ्रीडाइविंग केवल शारीरिक ताकत का खेल नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक मजबूती बेहद निर्णायक भूमिका निभाती है। अपने दिमाग को शांत रखने और तनावमुक्त रहने के लिए वह नियमित रूप से योग का सहारा लेते हैं। उनका मानना है कि मन जितना शांत और स्थिर रहेगा, पानी के भीतर सांस को नियंत्रित करना उतना ही आसान होता है। अद्युत फ्रीडाइविंग को एक प्रकार का ध्यान या मेडिटेशन मानते हैं, जो जीवन के हर पहलू में मदद करता है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और बहुआयामी प्रतिभा
अद्युत डोभाल की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का अटूट समर्थन रहा है। उनके पिता सुरेश दत्त डोभाल स्वयं एक कुशल और पेशेवर फ्रीडाइवर हैं, जिनसे अद्युत को इस खेल की शुरुआती प्रेरणा मिली। खेलकूद के साथ-साथ अद्युत पढ़ाई में भी काफी अव्वल हैं। वह वर्तमान में ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी से कानून (लॉ) की पढ़ाई कर रहे हैं। अपनी पढ़ाई के व्यस्त शेड्यूल के बावजूद, वह पर्वतारोहण, बॉक्सिंग, MMA, बाइकिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे विभिन्न साहसिक खेलों में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक और सम्मान जीते हैं। अद्युत का कहना है कि भारत में अब तक डेप्थ फ्रीडाइविंग का रिकॉर्ड लगभग 50 मीटर तक ही सीमित था, ऐसे में 102 मीटर की दूरी को छूना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के साहसिक खेल परिदृश्य के लिए एक मील का पत्थर है।
बेंगलुरु प्रतियोगिता और सांस रोकने का अगला लक्ष्य
भारत में फ्रीडाइविंग का भविष्य अब एक नया मोड़ ले रहा है। अद्युत ने जानकारी दी कि जल्द ही कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में भारत की पहली पूल फ्रीडाइविंग प्रतियोगिता का आयोजन होने जा रहा है। हालांकि यह समुद्र की गहराई वाली स्पर्धा नहीं होगी, लेकिन देश में इस तरह के आयोजन की शुरुआत होना भारतीय एथलीट्स के लिए बहुत बड़ा कदम है। इसके अलावा, अद्युत ने अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में भी बात की। भारत में पानी से बाहर (स्टैटिक एपनिया) सांस रोकने का मौजूदा रिकॉर्ड करीब 5 मिनट 15 सेकंड का है। अद्युत वर्तमान में लगभग 5 मिनट तक अपनी सांस रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि सही प्रशिक्षण और सही अवसर मिलने पर वह सांस रोकने के इस राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी ध्वस्त करने का पूरा प्रयास करेंगे।



















