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जबलपुर की दो इंजीनियरों ने बनाई अनोखी सुरक्षा जैकेट, छेड़खानी की कोशिश पर लगेगा बिजली का झटकास्टार्टअप्स
7 अक्तू॰ 2026, 9:17 am (40 मिनट पहले)· 1

जबलपुर की दो इंजीनियरों ने बनाई अनोखी सुरक्षा जैकेट, छेड़खानी की कोशिश पर लगेगा बिजली का झटका

जबलपुर में महिला इंजीनियरों ने 2,700 रुपये की लागत से एक स्मार्ट सुरक्षा जैकेट बनाई है, जो हमलावर को 3 एम्पीयर का झटका देने के साथ पांच आपातकालीन संपर्कों को तुरंत लोकेशन अलर्ट भेजती है।

महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश के जबलपुर में दो युवा महिला इंजीनियरों ने एक तकनीकी नवाचार किया है। देर रात काम से लौटने वाली और अकेले सफर करने वाली युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने एक विशेष जैकेट तैयार की है। पहली नज़र में यह बिल्कुल सामान्य कपड़ों जैसी दिखती है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना या हमले की स्थिति में यह आत्मरक्षा का प्रभावी साधन बन जाती है। इस परिधान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गलत नीयत से छूने या छेड़खानी की कोशिश करने वाले को यह बिजली का जोरदार झटका देती है। शुरुआती परीक्षण चरण में इस पूरे सुरक्षा उपकरण को महज 2,700 रुपये की निर्माण लागत में विकसित किया गया है।

स्टार्टअप की शुरुआत और निर्माण का उद्देश्य

इस प्रोटोटाइप को तैयार करने वाली युवा इंजीनियर अदिति और रिया का अपना एक स्टार्टअप है, जो जबलपुर इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। दोनों इंजीनियरों का लक्ष्य ऐसी तकनीक पेश करना था जो आपातकालीन स्थिति में तुरंत रक्षा कर सके। फिलहाल यह प्रोजेक्ट अपने शुरुआती चरण में है, इसलिए प्रति जैकेट निर्माण खर्च 2,700 रुपये आया है। हालांकि, बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने और बाजार में व्यावसायिक रूप से उतरने के बाद इसकी कीमत और भी कम होने की संभावना है। इसमें आधुनिक तकनीक और विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है। इसे विशेष रूप से उन महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जिन्हें रोजाना अकेले यात्रा करनी पड़ती है या रात में कार्यस्थल से घर लौटना होता है।

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तकनीकी सर्किट और करंट लगने की प्रक्रिया

डेवलपर्स ने इस परिधान का नाम वूमेन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी जैकेट रखा है। यह न सिर्फ शारीरिक हमले से बचाव करती है, बल्कि आपातकालीन संपर्कों तक तुरंत संदेश भी पहुंचाती है। जैकेट की बुनावट को एक आंतरिक विद्युत सर्किट से जोड़ा गया है। इसकी जेब में पावर बैंक जैसी दिखने वाली एक छोटी मशीन लगाई गई है, जिसमें एक पैनिक स्विच मौजूद रहता है। इससे जैकेट का पूरा नियंत्रण पहनने वाली महिला के हाथों में रहता है। जैसे ही संकट के समय पैनिक स्विच ऑन किया जाता है, जैकेट सक्रिय हो जाती है और इसके बाहरी हिस्से में करंट प्रवाहित होने लगता है। इस स्थिति में यदि कोई व्यक्ति गलत नीयत से महिला को छूता है, तो उसे 3 एम्पीयर का तीव्र झटका लगता है, जिससे हमलावर तुरंत पीछे हटने पर मजबूर हो जाता है।

इंटरनेट कनेक्टिविटी और पांच नंबरों पर अलर्ट

शारीरिक झटके के अलावा इसमें डिजिटल सुरक्षा नेटवर्क भी जोड़ा गया है। जैकेट को इंटरनेट और एक मोबाइल ऐप के जरिए कनेक्ट किया गया है। यदि कोई भी व्यक्ति जैकेट को स्पर्श करता है, तो सिस्टम स्वतः ही पूर्व-निर्धारित आपातकालीन नंबरों पर अलर्ट जारी कर देता है। इस चेतावनी संदेश के साथ उपयोगकर्ता की वास्तविक लोकेशन भी तत्काल साझा हो जाती है। सिस्टम में कुल पांच आपातकालीन संपर्क जोड़े जा सकते हैं, जिनमें माता-पिता, रिश्तेदार या करीबी दोस्त शामिल हो सकते हैं। इस अलर्ट के जरिए संकट की स्थिति में परिजनों को तुरंत पता चल जाता है कि युवती कहां पर है और उसे तत्काल मदद की जरूरत है।

जम्मू से जबलपुर यात्रा का अनुभव बना प्रेरणा

इस विचार के पीछे इन दोनों इंजीनियरों का अपना व्यक्तिगत अनुभव रहा है। अदिति और रिया जब जम्मू से जबलपुर के बीच रेल या सड़क मार्ग से सफर करती थीं, तो वे यात्रा के दौरान अक्सर असहजता महसूस करती थीं। इसी असहजता और असुरक्षा के माहौल से निपटने के लिए उनके मन में एक ऐसा परिधान तैयार करने का विचार आया जो संकट के समय ढाल बन सके। इसके बाद दोनों ने मिलकर इस सुरक्षा जैकेट को हकीकत का रूप दिया। वर्तमान में इस प्रोटोटाइप में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और इसे नए फीचर्स के साथ अपडेट किया जा रहा है। दोनों इंजीनियर औद्योगिक कंपनियों के संपर्क में भी हैं। उनका मानना है कि यदि इस उत्पाद के लिए थोक ऑर्डर प्राप्त होते हैं, तो उत्पादन लागत काफी घट जाएगी और यह जैकेट बेहद किफायती दामों पर आम महिलाओं तक आसानी से पहुंच सकेगी।

सवाल-जवाब

यह सुरक्षा जैकेट किसने बनाई है?
इस जैकेट को युवा महिला इंजीनियरों अदिति और रिया ने तैयार किया है, जिनका स्टार्टअप जबलपुर इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है।
हमलावर को इस जैकेट से कितना करंट लगता है?
पैनिक स्विच चालू होने के बाद यदि कोई जैकेट को छूता है, तो उसे 3 एम्पीयर का बिजली का झटका लगता है।
प्रोटोटाइप जैकेट को तैयार करने में कितना खर्च आया?
इस प्रोटोटाइप जैकेट को तैयार करने में शुरुआती दौर में 2,700 रुपये की लागत आई है।
यह जैकेट परिजनों को अलर्ट कैसे भेजती है?
जैकेट इंटरनेट और मोबाइल ऐप से जुड़ी है, जो किसी के छूते ही पांच पूर्व-निर्धारित आपातकालीन नंबरों पर अलर्ट और लाइव लोकेशन भेज देती है।
इंजीनियरों को इस जैकेट को बनाने का विचार कैसे आया?
जम्मू से जबलपुर के बीच यात्रा करते समय असुरक्षा और असहजता महसूस होने के बाद दोनों इंजीनियरों के दिमाग में यह विचार आया था।
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