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सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन बनाकर भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में चमकी अग्निकुलस्टार्टअप्स
7 अक्तू॰ 2026, 8:50 am (22 दिन पहले)· 1

सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन बनाकर भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में चमकी अग्निकुल

चेन्नई के एयरोस्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉस्मॉस ने महज 75 घंटों में सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन तैयार कर अंतरिक्ष इतिहास में नया मुकाम हासिल किया है।

निजी अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉस्मॉस ने एक अभूतपूर्व तकनीकी सफलता हासिल की है। कंपनी ने आधुनिक 3D प्रिंटिंग तकनीक का सहारा लेकर दुनिया का पहला ऐसा रॉकेट इंजन तैयार किया है, जो पूरी तरह से सिंगल-पीस यानी एक ही टुकड़े में ढाला गया है। इस उपलब्धि ने न केवल वैश्विक अंतरिक्ष बिरादरी में स्टार्टअप की धाक जमाई है, बल्कि भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष विनिर्माण तंत्र को भी नई बुलंदी दी है।

30 मई 2024 का ऐतिहासिक प्रक्षेपण और सिंगल-पीस डिज़ाइन

इस नवाचार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इंजन को अलग-अलग हिस्सों में तैयार करने के बजाय सीधे एक संपूर्ण इकाई के रूप में प्रिंट किया गया है। पारंपरिक रूप से रॉकेट इंजनों के सैकड़ों छोटे-बड़े पुर्जे अलग-अलग मशीनों में बनते थे और फिर उन्हें बेहद जटिल प्रक्रिया के जरिए असेंबल किया जाता था। अग्निकुल ने इस पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए 30 मई 2024 को अपने इस नए इंजन का सफल परीक्षण और प्रक्षेपण किया, जिससे यह साबित हुआ कि संपूर्ण इंजन को एक ही बार में प्रिंट करके अंतरिक्ष मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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75 घंटे में निर्माण और समय की भारी बचत

3D प्रिंटिंग प्रक्रिया को अपनाने से विनिर्माण की लागत और समय दोनों में ऐतिहासिक कमी आई है। पारंपरिक विनिर्माण विधियों में जहां एक रॉकेट इंजन को तैयार करने में 10 से 12 सप्ताह तक का लंबा वक्त खप जाता था, वहीं अग्निकुल ने इस 3D प्रिंटेड इंजन को महज 75 घंटे के भीतर बनाकर खड़ा कर दिया। निर्माण समय में आई इस भारी गिरावट से रॉकेट विकास चक्र कई हफ्तों से सिमटकर केवल 3 से 4 दिनों में आ गया है, जिससे मिशन लागत में भारी बचत होगी और तेज गति से प्रक्षेपण संभव हो सकेंगे।

चेन्नई स्थित स्टार्टअप और अग्निबाण रॉकेट की क्षमता

अग्निकुल कॉस्मॉस की शुरुआत लगभग 7 साल पहले वर्ष 2017 में हुई थी, जिसका मुख्यालय तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित है। इस उद्यम की नींव इसके संस्थापक श्रीनाथ रविचंद्रन और मोइन एसपीएम ने रखी थी। कंपनी मुख्य रूप से छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

स्टार्टअप का पहला प्रमुख प्रक्षेपण यान अग्निबाण रॉकेट है, जिसे ग्राहकों की आवश्यकतानुसार पूरी तरह कस्टमाइज करने योग्य बनाया गया है। यह हल्का और किफायती रॉकेट 100 किलोग्राम तक के नीतभार को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) तक सुरक्षित पहुंचाने में सक्षम है। छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के इच्छुक वाणिज्यिक उद्यमों के लिए यह यान बेहद किफायती और सुलभ विकल्प पेश करता है।

अग्रिम पेटेंट और अंतरिक्ष उद्योग का बदलता परिदृश्य

अग्निकुल ने रॉकेट इंजन निर्माण की इस अत्याधुनिक 3D प्रिंटिंग तकनीक पर पहले ही कानूनी पेटेंट हासिल कर लिया था। इस बौद्धिक संपदा सुरक्षा के साथ कंपनी ने अंतरिक्ष उद्योग को यह दिखा दिया है कि जटिल एयरोस्पेस उपकरणों का उत्पादन अब महीनों के बजाय दिनों में मुमकिन है। पूरी वैश्विक अंतरिक्ष बिरादरी इस नवाचार को वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देख रही है।

सवाल-जवाब

अग्निकुल कॉस्मॉस ने कौन सी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है?
कंपनी ने 3D प्रिंटिंग तकनीक से दुनिया का पहला सिंगल-पीस रॉकेट इंजन बनाया और 30 मई 2024 को इसका सफल प्रक्षेपण किया।
इस रॉकेट इंजन को बनाने में कितना समय लगा?
अग्निकुल ने 3D प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग कर यह रॉकेट इंजन मात्र 75 घंटों में तैयार कर लिया।
पारंपरिक तरीके से रॉकेट इंजन बनाने में कितना समय लगता था?
पारंपरिक विनिर्माण विधि से एक रॉकेट इंजन तैयार करने में सामान्यतः 10 से 12 सप्ताह का समय लगता है।
अग्निकुल कॉस्मॉस की स्थापना कब और किसने की थी?
कंपनी की स्थापना लगभग 7 साल पहले वर्ष 2017 में श्रीनाथ रविचंद्रन और मोइन एसपीएम ने की थी, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है।
अग्निबाण रॉकेट की भार क्षमता क्या है?
अग्निबाण रॉकेट 100 किलोग्राम तक के नीतभार को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में ले जाने में सक्षम है।
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