उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कृषि क्षेत्र के भीतर एक नया प्रयोग और रिकॉर्ड देखने को मिला है। जनपद के थरौली गांव निवासी किसान संदीप चौधरी ने एक वर्ष पूर्व अपने खेत में विश्व के सबसे महंगे माने जाने वाले मियाजाकी आम के पौधे लगाए थे। जैविक पद्धतियों का पालन करते हुए तैयार की गई इस फसल के केवल चार आमों को गुजरात के एक फल व्यापारी ने 2 लाख 11 हजार रुपये की रिकॉर्ड कीमत देकर खरीदा है। इस अभूतपूर्व बिक्री के बाद यह विशेष उपज गुजरात के राजभवन तक पहुंची, जहां गांधीनगर में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान राज्य के राज्यपाल देवव्रत को मियाजाकी और चौसा आमों की खेप भेंट की गई।
शुरुआती संदेह से लेकर ऐतिहासिक बिक्री तक का सफर
जब किसान संदीप चौधरी ने लगभग एक साल पहले अपने खेत में जापानी किस्म के मियाजाकी आम के पौधे रोपे थे, तब स्थानीय ग्रामीण और आसपास के लोग इस प्रयास को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। आम तौर पर अत्यधिक महंगी मानी जाने वाली इस प्रजाति को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिट्टी में सफलतापूर्वक उगाना और उसकी इतनी ऊंची कीमत मिलना लोगों को एक मजाक जैसा प्रतीत होता था। हालांकि, जब फसल तैयार हुई और गुणवत्ता परखी गई, तो गुजरात के एक व्यापारी ने इन चार आमों के लिए 2.11 लाख रुपये की बोली लगाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। भारत में किसी आम की इस दर पर हुई बिक्री ने कृषि जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया और लोगों का संदेह दूर कर दिया।
राजभवन गांधीनगर में विशेष संगोष्ठी और सम्मान
मियाजाकी आम की यह ऐतिहासिक सफलता और इसकी महक गुजरात के प्रशासनिक गलियारों तक पहुंची। गांधीनगर स्थित राजभवन में नन्ही परी फाउंडेशन के सौजन्य से एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला का मुख्य विषय जैविक खेती तथा कृषि क्षेत्र में AI टेक्नोलॉजी का उपयोग था। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में सहारनपुर के थरौली ग्राम पंचायत से किसान संदीप चौधरी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान संदीप चौधरी ने अपने बाग में जैविक विधि से तैयार किए गए मियाजाकी और चौसा आम गुजरात के राज्यपाल देवव्रत को सहर्ष समर्पित किए। राज्यपाल ने रिकॉर्ड 2.11 लाख रुपये में बिके उन चार मियाजाकी आमों को ग्रहण करते हुए किसान के प्रयासों की सराहना की।
जैविक कृषि और जनस्वास्थ्य पर राज्यपाल का संदेश
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल देवव्रत ने प्राकृतिक तथा रासायनिक-मुक्त खेती के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में फसलों को उगाने के लिए घातक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। ये जहरीले रसायन मानव शरीर के विभिन्न आंतरिक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान पीढ़ी ने जैविक कृषि को अनिवार्य रूप से नहीं अपनाया, तो आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्यप्रद खानपान और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ पाना संभव नहीं होगा। राज्यपाल ने संदीप चौधरी के जैविक आमों के स्वाद तथा सुगंध की प्रशंसा की और भविष्य में सहारनपुर जिले के थरौली गांव का दौरा करने का आश्वासन भी दिया। किसान संदीप चौधरी ने इस संदेश को देश भर के कृषकों तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।



















