उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की रहने वाली नौ वर्षीय छात्रा अयात शाह ने ताइक्वांडो के खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। महज चारवीं कक्षा में पढ़ने वाली इस नन्हीं खिलाड़ी ने राज्य और प्रांतीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पिछले डेढ़ वर्षों से मार्शल आर्ट्स के इस रूप का कड़ा अभ्यास कर रही अयात का लक्ष्य अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी जगह बनाने और देश के लिए पदक जीतने का है।
आत्मरक्षा की चाहत से स्वर्ण पदक तक की यात्रा
अयात शाह ने मार्शल आर्ट्स की दुनिया में कदम अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा की भावना को मजबूत करने के लिए रखा था। रोजाना के निरंतर अभ्यास और लगन के बल पर उन्होंने बहुत कम समय में इस खेल की तकनीकों पर बेहतरीन पकड़ बना ली। प्रांतीय प्रतियोगिताओं के अलावा उन्होंने दिल्ली और अन्य राज्यों में आयोजित विभिन्न ताइक्वांडो प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लिया है और कई स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। फिलहाल वह सुल्तानपुर के एक विद्यालय में कक्षा 4 में पढ़ाई के साथ-साथ आगामी नेशनल चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटी हुई हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिता की प्रेरणा
सुल्तानपुर के पुलिस लाइन क्षेत्र की निवासी अयात एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां खेल और अनुशासन को बेहद महत्व दिया जाता है। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं, जिन्होंने अपनी बेटी के हुनर को पहचान कर उसे पेशेवर प्रशिक्षण संस्थान भेजने का निर्णय लिया। उनकी माता एक गृहणी हैं, जो अयात की दैनिक दिनचर्या और खेल गतिविधियों का पूरा ध्यान रखती हैं। पिता का सपना है कि उनकी बेटी सुल्तानपुर की सीमाओं से आगे निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करे।
गुरु का मार्गदर्शन और भावी अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य
अपनी इस सफलता का श्रेय अयात शाह पूरी तरह से अपने माता-पिता के सहयोग और अपनी गुरु को देती हैं। वह अपनी कोच अमीना बानो को अपना आदर्श मानती हैं, जो पिछले कई महीनों से उन्हें ताइक्वांडो का गहन प्रशिक्षण दे रही हैं। अमीना बानो के मार्गदर्शन में अयात अपने कौशल को लगातार निखार रही हैं। अयात का अंतिम सपना अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना और वैश्विक मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना है।



















