जिंदगी में कई बार अप्रत्याशित परिस्थितियां इंसान के रास्ते पूरी तरह बदल देती हैं। जिस करियर के लिए कोई अपनी पूरी ताकत झोंक देता है, अचानक एक चोट या रुकावट उसे रोक देती है, लेकिन इसके बाद उससे भी बेहतर संभावनाओं के द्वार खुल जाते हैं। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी गुजरात कैडर की आईपीएस कुहू गर्ग की है, जिन्होंने खेल के मैदान पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखा था, लेकिन शारीरिक बाधाओं ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। बैडमिंटन के खेल में अपनी चमक बिखेरने वाली कुहू ने हार मानने के बजाय एक नया और बेहद कठिन रास्ता चुना तथा उसमें भी सर्वोच्च सफलता हासिल की।
बैडमिंटन कोर्ट से खाकी वर्दी तक का सफर
उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के घर 22 सितंबर 1998 को जन्मी कुहू गर्ग का बचपन से ही खेलों की दुनिया से गहरा नाता रहा है। उन्होंने मात्र 9 वर्ष की छोटी उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 56 और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 19 पदक अपने नाम किए। वर्ष 2018 में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था, जिससे खेल प्रेमियों को उनसे देश के लिए बड़े स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीदें थीं। उनका पूरा ध्यान अपने खेल को और बेहतर बनाने पर केंद्रित था।
जब गंभीर चोट ने रोके कदम
एक एथलीट के जीवन में चोटें सबसे बड़ा अभिशाप साबित होती हैं, और कुहू गर्ग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। खेल अभ्यास के दौरान उनके घुटने में गंभीर एसीएल इंजरी हो गई, जिसने उनके भविष्य पर संकट के बादल खड़े कर दिए। चिकित्सकों ने उन्हें लंबे समय तक पूरी तरह से आराम करने और कोर्ट से दूर रहने की सख्त सलाह दी। किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए यह मानसिक और शारीरिक रूप से सबसे कठिन दौर होता है, जहां उसका पूरा करियर खतरे में पड़ जाता है। हालांकि, कुहू ने इस गहरे सदमे को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और इस चुनौतीपूर्ण समय का पूरी दृढ़ता से सामना करने का फैसला किया।
बेड रेस्ट के दौरान यूपीएससी की तैयारी
चिकित्सकों की सलाह पर जब उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा, तब उन्होंने अपनी ऊर्जा को पूरी तरह से पढ़ाई की तरफ मोड़ दिया। बिना किसी औपचारिक कोचिंग की मदद लिए उन्होंने घर पर ही रोजाना 8 से 10 घंटे की लंबी और कठिन पढ़ाई शुरू की। उनका यह अनुशासन और एकाग्रता रंग लाई, जब उन्होंने वर्ष 2023 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में 178वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया। इस सफलता के बाद उन्हें गुजरात कैडर आवंटित किया गया, जिसके तहत उन्होंने अपनी प्रशासनिक यात्रा शुरू की।
SVPNPA में मिला सर्वोच्च सम्मान
हाल ही में हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में 78वीं रेगुलर भर्ती की पासिंग आउट परेड का आयोजन किया गया। इस भव्य समारोह में आईपीएस कुहू गर्ग ने एक बार फिर अपनी अद्भुत क्षमता का परिचय देते हुए इतिहास रच दिया। उन्हें उनकी उत्कृष्ट क्षमता, अनुशासन और नेतृत्व कौशल के लिए प्रतिष्ठित 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और बेस्ट ड्रिल प्रोबेशनर के सम्मान से नवाजा गया। बैडमिंटन का रैकेट थामने वाले हाथों में अब देश की कानून व्यवस्था संभालने वाली खाकी वर्दी की ताकत आ चुकी है।
परिवार और सहयोगियों का मिला साथ
अपनी इस असादधारण उपलब्धि का पूरा श्रेय कुहू गर्ग अपनी मां, परिवार के सदस्यों, डॉक्टरों और मार्गदर्शकों को देती हैं। उनका मानना है कि जीवन आपको हमेशा उसी दिशा में ले जाता है जहां आपके भाग्य में कुछ बेहतर लिखा होता है। बैडमिंटन खिलाड़ी से देश की एक तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी बनने तक का उनका यह पूरा सफर यह साबित करता है कि यदि आपके इरादे मजबूत हों, तो हर कठिनाई को सफलता की सीढ़ी बनाया जा सकता है।


















