पारंपरिक नौकरियों की सुरक्षा छोड़कर मिट्टी से जुड़ने का फैसला कई बार जिंदगी को पूरी तरह बदल देता है। किसान विठ्ठल गुरुजी ने जब एक सरकारी शिक्षक की स्थिर नौकरी से इस्तीफा दिया, तो उनका उद्देश्य केवल गांव लौटना नहीं बल्कि खेती को एक बड़े और व्यावहारिक उपक्रम में तब्दील करना था। शुरुआत में उन्होंने परिवार की 50 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर काम शुरू किया था। लगातार मेहनत, बेहतर योजना और फसलों के सटीक प्रबंधन के दम पर आज उनका यह कृषि कार्य लगभग 200 एकड़ जमीन पर फैल चुका है, जहां से पैदा होने वाला केला घरेलू बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भेजा जा रहा है।
शिक्षण कार्य से खेती तक का सफर
विठ्ठल गुरुजी पहले स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का काम करते थे। अध्यापन के दौरान भी उनका मन हमेशा कृषि की संभावनाओं और पारिवारिक जमीन की स्थिति से जुड़ा रहा। उनके पास 50 एकड़ पुश्तैनी जमीन उपलब्ध थी, जिसे वे ज्यादा व्यवस्थित और उत्पादक स्वरूप देना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने सरकारी शिक्षक के पद से त्यागपत्र देकर खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बनाने का पक्का इरादा किया। शुरुआती दौर में सीमित रकबे से काम शुरू करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे नई तकनीकों और व्यवस्थित तौर-तरीकों को आजमाना शुरू किया।
फसलों का विविधीकरण और केले का बड़े पैमाने पर उत्पादन
खेती के दायरे को बढ़ाते हुए विठ्ठल गुरुजी ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकरण की रणनीति अपनाई। वर्तमान में करीब 200 एकड़ में फैली उनकी जोत पर कई महत्वपूर्ण फसलें एक साथ उगाई जा रही हैं। इनमें मुख्य रूप से केला, कपास, गन्ना, मक्का, चना, सोयाबीन और कई किस्मों की सब्जियां शामिल हैं। हालांकि, इन सभी उपज में केले की खेती को उन्होंने अपनी सबसे मजबूत पहचान बना लिया है। उनके खेतों में तैयार होने वाले केले की गुणवत्ता इतनी बेहतर मानी जाती है कि उसकी मांग न सिर्फ देश के अलग-अलग हिस्सों में रहती है, बल्कि विदेशों में भी इसका नियमित निर्यात किया जाता है।
सैकड़ों कामगारों को मिला आजीविका का जरिया
विठ्ठल गुरुजी का कृषि उपक्रम अब सिर्फ उनके अपने परिवार के पालन-पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है। बड़े पैमाने पर कृषि संचालन के चलते बुवाई, पौधों की नियमित निगरानी, सिंचाई, खाद प्रबंधन, कटाई और फलों की पैकिंग जैसे विभिन्न कार्यों के लिए हर दिन बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से उनके खेतों में 100 से अधिक लोगों को नियमित रूप से काम मिला हुआ है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने से आसपास के परिवारों को आजीविका का एक ठोस साधन मिला है।
कृषि को व्यावसायिक मॉडल बनाने की मिसाल
खेती को अक्सर घाटे का सौदा या सिर्फ जीवनयापन का साधन मानने वालों के लिए विठ्ठल गुरुजी की यह यात्रा एक व्यावहारिक उदाहरण पेश करती है। उन्होंने यह साबित किया कि सरकारी नौकरी की सुरक्षा से बाहर निकलकर भी यदि सही प्रबंधन, कड़ी मेहनत और आधुनिक दृष्टि के साथ जमीन का उपयोग किया जाए, तो कृषि को एक बड़े, टिकाऊ और लाभदायक व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सकता है।



















