चिकन-मटन के साथ रोटी की जगह बनाएं झारखंडी चावल का छिलका, दोगुना हो जाएगा जायकालाहौल-स्पीति में ड्रिलबुरी कोरा यात्रा के दौरान बड़ा हादसा, बर्फ पर फिसलने से दो श्रद्धालुओं की मौतनालागढ़ में ड्रग्स का पूरा सिंडिकेट बेनकाब, पुलिस ने दो करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्ति की जब्तक्रूसो ने एआई डेटा सेंटर और मॉड्यूलर कारखानों के लिए 3.9 अरब डॉलर जुटाएडोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने यूएफओ व्हिसलब्लोअर के लिए उठाया नया कदम, गोपनीयता समझौतों पर दी ढीलजयपुर के जगतपुरा में ट्रैफिक सुधार की तैयारी, महल रोड के तीन चौराहे बनेंगे सिग्नल फ्रीमूलांक 9 राशिफल 18 सितंबर 2026: मानसिक घुटन से मिलेगी राहत, बेकार जिम्मेदारियों को अलविदा कहने का दिनसोनीपत में पिटबुल कुत्ते का खौफ, छह महीने के बच्चे पर बोला हमलाउत्तर प्रदेश के गोंडा में महिलाओं को सिखाए जा रहे सेहतमंद पकवान, बच्चों की सेहत सुधारने की अनोखी पहलभारत की प्रतियोगी परीक्षाओं की चुनौती: यूपीएससी, जेईई, नीट और यूजीसी नेट में कौन सी कसौटी है सबसे कठिन?
कन्नौज की गलियों से खाकी वर्दी तक का सफर, दो बच्चों की मां बुशरा बानो ने कैसे तय किया आईएएस-आईपीएस बनने का रास्तासक्सेस स्टोरी
18 सित॰ 2026, 11:36 am (2 घंटे पहले)· 0

कन्नौज की गलियों से खाकी वर्दी तक का सफर, दो बच्चों की मां बुशरा बानो ने कैसे तय किया आईएएस-आईपीएस बनने का रास्ता

उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो ने शादी के बाद विदेश की आरामदायक नौकरी छोड़कर यूपीएससी की परीक्षा पास की और पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी बनीं।

जिम्मेदारियों और पारिवारिक उलझनों के बीच अपने सपनों को साकार करने की मिसाल पेश करने वाली पश्चिम बंगाल कैडर की युवा आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी हालिया वीडियो क्लिप को लेकर सुर्खियों में हैं। उनके अभिवादन के तरीके को लेकर कुछ हलकों में सवाल उठाए गए हैं, लेकिन कन्नौज के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की प्रतिष्ठित खाकी वर्दी तक पहुंचने का उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणादायी है। लोग उनके करियर, संघर्ष और उनके जीवनसाथी के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

शुरुआती जीवन और अकादमिक उपलब्धियां

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के सौरिख गांव में जन्मी बुशरा बानो बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में काफी मेधावी थीं। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गणित विषय से बीएससी की डिग्री ली और उसके बाद एमबीए पूरा किया। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि हासिल की और नेट तथा जेआरएफ जैसी कठिन परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। शिक्षा जगत में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद वह आगरा के एक निजी कॉलेज में अध्यापन कार्य से जुड़ गईं। इसी दौरान उनका निकाह हुआ और उन्हें अपने पति के साथ विदेश जाना पड़ा।

ये भी पढ़ें

सऊदी अरब में जीवन और पति का परिचय

शादी के बाद बुशरा बानो को अपने पति अस्मार हुसैन के साथ सऊदी अरब शिफ्ट होना पड़ा था, जो वहां की एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। अस्मार हुसैन ने भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ही अपनी शिक्षा प्राप्त की थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, अस्मार हुसैन वर्तमान में एक निजी कंपनी में डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विदेश जाने के बाद भी बुशरा बानो ने अपनी शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखीं और वहां की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगीं। वहां उन्हें एक बेहतरीन वेतन और आरामदायक जीवनशैली मिल रही थी, लेकिन उनके भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा लगातार बनी हुई थी।

विदेश की चकाचौंध छोड़ चुनी देश सेवा की राह

विदेश में प्रोफेसर की आरामदायक नौकरी और आकर्षक वेतन होने के बावजूद बुशरा बानो का मन वहां पूरी तरह नहीं रम पा रहा था। उनके दिल में हमेशा अपने वतन के लिए कुछ खास योगदान देने की कसक बनी रहती थी। आखिरकार उन्होंने विदेश की चमक-दमक को अलविदा कहने का फैसला किया और अपने दोनों बच्चों के साथ वापस भारत लौट आईं। स्वदेश लौटने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का दृढ़ संकल्प लिया। हालांकि, अपनी इस पहली कोशिश में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा और वह परीक्षा पास नहीं कर पाईं। लेकिन उन्होंने इस असफलता को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी सफलता की मजबूत सीढ़ी बना लिया।

दो बच्चों की मां ने हासिल की प्रशासनिक सफलता

कड़ी मेहनत और अटूट दृढ़ संकल्प के बल पर बुशरा बानो ने साल 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 277वीं रैंक हासिल की और उनका चयन इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए हुआ। इसी दौरान उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का परिणाम भी सामने आया, जिसमें उन्होंने छठी रैंक प्राप्त की और फिरोजाबाद में उपजिलाधिकारी के पद पर कार्यभार संभाला। एसडीएम के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अवैध खनन के खिलाफ सख्त कदम उठाकर उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाया। हालांकि, उनका मुख्य सपना आईपीएस अधिकारी बनने का था, इसलिए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और बाद में 234वीं रैंक हासिल कर पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी के रूप में अपना मुकाम हासिल किया।

वायरल वीडियो और हालिया चर्चाएं

मौजूदा समय में बुशरा बानो अपने एक वायरल वीडियो की वजह से भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पश्चिम बंगाल कैडर में तैनात इस युवा अधिकारी के वीडियो में कुछ धार्मिक अभिवादन शब्दों जैसे इंशाअल्लाह और अस्सलामु अलैकुम के इस्तेमाल पर कुछ जगहों पर सवाल खड़े किए गए। इसके बावजूद, दो बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी और नौकरी के भारी दबाव के बीच उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे उन तमाम रूढ़ियों को खारिज करती हैं जो अक्सर विवाह के बाद महिलाओं के करियर पर विराम लगा देती हैं।

सवाल-जवाब

बुशरा बानो मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं?
बुशरा बानो उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के सौरिख गांव की रहने वाली हैं।
बुशरा बानो के पति क्या करते हैं?
उनके पति अस्मार हुसैन वर्तमान में एक निजी कंपनी में डायरेक्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं और पहले सऊदी अरब में प्रोफेसर थे।
उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की थी?
उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बाद 234वीं रैंक हासिल कर पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी के रूप में सफलता प्राप्त की।
आईपीएस बनने से पहले वह किस पद पर थीं?
आईपीएस बनने से पहले वह उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर फिरोजाबाद में एसडीएम के रूप में सेवारत थीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp