उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत सिकंदरपुर में एक छोटी सी दुकान चलाने वाले शिवचंद्र मदनवाल की कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़ता। लोग उन्हें आदर से साधु जी कहकर बुलाते हैं। एक समय था जब वे साधु का जीवन व्यतीत करते थे, लेकिन बाद में गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने के बाद उन्होंने अपने परिवार का लालन-पालन करने का जिम्मा संभाला। अपने पांच बच्चों को बेहतर भविष्य और अच्छी शिक्षा देने के संकल्प के साथ उन्होंने 35 साल पहले सड़क किनारे चाट परोसना शुरू किया था, जो आज उनके संघर्ष की मिसाल बन चुका है।
सिकंदरपुर चौराहे का मशहूर आजाद चाट कॉर्नर
सिकंदरपुर के प्रमुख चौराहे पर स्थित उनकी दुकान का आधिकारिक नाम 'आजाद चाट कॉर्नर' है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और पुराने ग्राहकों के बीच यह आज भी 'साधु जी की पुरानी दुकान' के नाम से ही अत्यधिक लोकप्रिय है। इस दुकान पर आने वाले लोगों को खास जायके के साथ टमाटर चाट 30 रुपये, टिकिया चाट 20 रुपये और बर्गर 30 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, यहां दही बड़ा, छोला और विभिन्न दरों में स्वादिष्ट चाउमीन भी ग्राहकों के लिए तैयार की जाती है। पिछले साढ़े तीन दशकों में उनके हाथ के बने व्यंजनों का स्वाद आसपास के कई कस्बों और बाजारों तक फैल चुका है, जिससे रोजाना दूर-दूर से लोग स्वाद लेने पहुंचते हैं।
एक पिता की तपस्या: चार बेटियों और एक बेटे को दिलाई डिग्री
शिवचंद्र मदनवाल ने अपनी इस मामूली दुकान की सीमित आय से न केवल अपने बड़े परिवार का भरण-पोषण किया, बल्कि अपने सभी पांच बच्चों की उच्च शिक्षा की फीस भी चुकाई। उनके परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है। उन्होंने अपनी बेटियों को शिक्षित बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, जिनमें से कुछ ने बीएससी, बीकॉम और पॉलिटेक्निक जैसी डिग्री और डिप्लोमा हासिल किए। शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने बेटियों का विवाह संपन्न कराया, जबकि उनकी सबसे छोटी बेटी अभी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है। इसी तरह, उन्होंने अपने एकमात्र बेटे को भी तकनीकी शिक्षा दिलाते हुए पॉलिटेक्निक और आईटीआई जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययन कराया है।
काम की गरिमा और लगन का जीवंत उदाहरण
सिकंदरपुर के चौराहे पर स्थित यह दुकान महज एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि एक ऐसे समर्पित पिता की कर्मगाथा है, जिसने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए हर दिन कड़ी मेहनत की है। साधु जी का जीवन संदेश देता है कि ईमानदारी से किया जाने वाला कोई भी काम छोटा नहीं होता। यदि इंसान की लगन सच्ची हो और मेहनत बड़ी हो, तो एक छोटी सी चाट की दुकान के जरिये भी बच्चों के लिए बड़ी से बड़ी उपलब्धियों के रास्ते खोले जा सकते हैं।



















