मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक परिवार ने साबित कर दिया है कि जिंदगी कई बार वो रास्ता दिखाती है जो हमने सोचा भी नहीं होता. गोपाल महाजन मुंबई में टैटू बनाने का हुनर सीखने गए थे, लेकिन वहां से लौटते समय उनके साथ आया वड़ा पाव का एक आइडिया, जिसने आज उनके और उनके दो भाइयों के पूरे परिवार की तकदीर बदल दी है.
टैटू सीखने मुंबई पहुंचे, मिल गया कारोबार का आइडिया
गोपाल बताते हैं कि उनके पिता लंबे समय से हलवाई का काम करते आए हैं. बचपन से उन्होंने पिता को मिठाई और तरह-तरह की खाने-पीने की चीजें बनाते देखा था, लेकिन खुद गोपाल कुछ अलग करना चाहते थे. इसी सोच के साथ वे मुंबई गए और वहां टैटू बनाने की कला सीखने की कोशिश की. लेकिन मुंबई में रहते हुए उनकी नजर वहां के मशहूर वड़ा पाव के कारोबार पर पड़ी. उन्हें एहसास हुआ कि मुंबई का यह स्वाद बुरहानपुर के लोगों को भी पसंद आ सकता है.
पिता के अनुभव ने दी कारोबार को मजबूती
यह आइडिया मन में आते ही गोपाल ने अपने पिता से बात की. सालों के हलवाई अनुभव से पिता को खाने-पीने के धंधे की बारीक समझ थी और उन्होंने बेटे का पूरा साथ दिया. पिता की सलाह और सहयोग से गोपाल ने बुरहानपुर में वड़ा पाव बेचना शुरू किया. गोपाल का मानना है कि पिता के हलवाई हुनर ने ही उन्हें यह भरोसा दिया कि खाने-पीने का यह कारोबार चल सकता है.
शुरुआती दिनों में करनी पड़ी मशक्कत
कारोबार की शुरुआत आसान नहीं थी. नए स्वाद को बुरहानपुर के लोगों तक पहुंचाने और उनका भरोसा जीतने के लिए तीनों भाइयों को काफी मेहनत करनी पड़ी. धीरे-धीरे शहर के लोगों को उनका वड़ा पाव पसंद आने लगा और ग्राहकों की तादाद बढ़ती चली गई. देखते ही देखते जो कारोबार छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, वह परिवार की कमाई का एक मजबूत सहारा बन गया.
11 साल से चल रहा है कारोबार, कीमत सिर्फ 20 रुपये
गोपाल महाजन और उनके दोनों भाई पिछले करीब 11 वर्षों से मिलकर वड़ा पाव का यह स्टॉल चला रहे हैं. यहां एक वड़ा पाव की कीमत महज 20 रुपये रखी गई है, जिसकी वजह से कम बजट में स्वादिष्ट नाश्ता चाहने वाले लोगों के बीच इसकी खूब मांग है. बच्चे हों या बड़े, हर उम्र के ग्राहक यहां स्वाद चखने पहुंचते हैं. गोपाल कहते हैं कि पिता से मिले हुनर और अनुभव को उन्होंने अपने तरीके से आगे बढ़ाया और तीनों भाइयों की मेहनत ने इस छोटे से कारोबार को परिवार की जिंदगी बदलने वाला जरिया बना दिया.
यह कहानी दिखाती है कि परिवार से मिली विरासत को अगर सही सोच, मेहनत और थोड़े नए विचार के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो एक छोटा सा ठेला भी बड़ी सफलता की कहानी बन सकता है.



















