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मऊ के अजय चौहान ने हादसे में गंवाए दोनों हाथ, फिर भी नाक और पैरों से मोबाइल चलाकर संभाल रहे परिवारसक्सेस स्टोरी
8 सित॰ 2026, 9:48 am (50 दिन पहले)· 2

मऊ के अजय चौहान ने हादसे में गंवाए दोनों हाथ, फिर भी नाक और पैरों से मोबाइल चलाकर संभाल रहे परिवार

मऊ जिले के चालीसवां गांव के रहने वाले अजय चौहान ने 2007 में मुंबई में हुए एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज वे पैरों, नाक और मुंह की मदद से इलेक्ट्रॉनिक दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के चालीसवां ग्राम सभा के निवासी अजय चौहान की जिंदगी संघर्ष और अटूट हौसले की एक अनूठी मिसाल पेश करती है। एक भयानक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ गंवा देने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज वे अपनी मेहनत के दम पर जीवन की हर बाधा को पार कर रहे हैं। आज स्थिति यह है कि वे अपने चेहरे, नाक और पैरों के सहारे स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, पैरों से हस्ताक्षर करते हैं और एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान चलाकर अपने पूरे परिवार का खर्च उठा रहे हैं। मीडिया से बातचीत में अजय चौहान ने बताया कि साल 2007 में मुंबई में उनके साथ एक दुर्घटना घटी थी, जिसमें उनके दोनों हाथ कट गए थे। हालांकि उनके कंधों पर परिवार की बड़ी जिम्मेदारियां थीं और वे हमेशा से आत्मसम्मान के साथ जीवन जीना चाहते थे, इसलिए उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।

दुर्घटना के बाद मुंबई छोड़कर गांव लौटे और शुरू की दुकान

उनके माता-पिता दोनों बुजुर्ग हैं और किसी प्रकार का कामकाज करने में असमर्थ हैं। ऐसे में परिवार संभालने की कड़ी चुनौती उनके सामने थी। दुर्घटना के बाद रेलवे विभाग की तरफ से जो मुआवजा राशि मिली थी, उसी से उन्होंने अपने पैतृक गांव में एक छोटी सी गुमटी में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की दुकान शुरू कर दी। वे पहले मुंबई में रहते थे, लेकिन दोनों हाथ कट जाने के बाद वहां अकेले जीवन व्यतीत करना बेहद मुश्किल हो गया था, जिसके चलते वे वापस गांव लौट आए। गांव आने के बाद उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, और अंततः भाई के सहयोग से उन्होंने इस दुकान की नींव रखी। आज इसी दुकान से होने वाली कमाई से वे अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कर रहे हैं।

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विकलांगता को मात देकर 2021 में की शादी

अजय बताते हैं कि साल 2007 में जब यह हादसा हुआ और उनके दोनों हाथ चले गए, तो शुरुआत में वे बहुत टूट गए थे और उन्हें ऐसा लगने लगा था कि अब उनका जीवन और परिवार कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। लेकिन समय के साथ उन्होंने हिम्मत जुटाई और साल 2021 में उनका विवाह हुआ। शादी के बाद उनके घर बच्चे भी हुए, और अब यही बच्चे उनके जीवन का बड़ा संबल बन गए हैं। हालांकि उनके पास दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन उनके इरादे बेहद मजबूत हैं। दुकान पर जब कोई ग्राहक सामान खरीदने आता है, तो वे मुंह से सामान उठाकर दे देते हैं या फिर उसे अपनी बाजू के सहारे दबाकर थमा देते हैं। कोई भारी सामान होने पर वे ग्राहक से खुद ही उसे उठाने का अनुरोध कर लेते हैं।

नाक, मुंह और पैर बने जिंदगी का मुख्य सहारा

आज के इस डिजिटल दौर में बिना मोबाइल फोन के कोई काम संभव नहीं है, और अजय ने इस चुनौती को भी आसान बना लिया है। यदि किसी का फोन आता है, तो वे मुंह से फोन को पकड़कर अपनी नाक से कॉल रिसीव कर लेते हैं। इसके बाद नाक और पैरों की सहायता से वे पूरी तरह से मोबाइल का संचालन करते हैं। उनके दोनों पैर ही अब उनके असली हाथ बन चुके हैं। यदि कहीं कुछ लिखना होता है, तो वे पैरों का ही इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा दुकान के लेन-देन या बिल बनाने के लिए मोबाइल कैलकुलेटर का प्रयोग भी वे अपने पैरों से ही करते हैं। उनका साफ कहना है कि वे आत्मसम्मान के साथ जीना चाहते थे, इसलिए वे कभी घर पर खाली नहीं बैठे और न ही कभी किसी के सामने भीख मांगी।

भोजन में केवल दाल-चावल का सहारा और संघर्षभरी दिनचर्या

दैनिक जीवन में उन्हें कुछ असहजता का सामना भी करना पड़ता है। खाना खाते समय उन्हें थोड़ी परेशानी होती है, क्योंकि उनके पास एक कृत्रिम प्लास्टिक का हाथ है, जिसकी मदद से चम्मच पकड़कर खाना उठाया जा सकता है। खाने में वे अमूमन केवल दाल और चावल ही खा पाते हैं, क्योंकि वे अपने हाथों से रोटी नहीं तोड़ सकते। यदि उनकी पत्नी उन्हें अपने हाथों से खाना खिला दें, तो वे रोटी खा लेते हैं, अन्यथा उनका पूरा जीवन केवल दाल और चावल के सहारे ही चल रहा है। जब कभी वे उस पुरानी दुर्घटना को याद करते हैं, तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं और आज भी आंखों में आंसू आ जाते हैं। लेकिन परिवार की बड़ी जिम्मेदारियों के आगे उन्हें अपनी इन भावनाओं को दबाकर डटकर काम करना पड़ता है।

सवाल-जवाब

अजय चौहान किस जिले के रहने वाले हैं?
अजय चौहान उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के चालीसवां ग्राम सभा के रहने वाले हैं।
अजय चौहान ने अपने दोनों हाथ कब और कैसे गंवाए?
उन्होंने साल 2007 में मुंबई में हुए एक हादसे के दौरान अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे।
अजय चौहान वर्तमान में क्या काम करते हैं?
वे वर्तमान में अपने गांव में एक छोटी सी गुमटी में इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकान चलाते हैं।
वे बिना हाथों के मोबाइल का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
वे अपने मुंह से फोन पकड़ते हैं, नाक से कॉल रिसीव करते हैं और नाक तथा पैरों की सहायता से मोबाइल चलाते हैं।
अजय चौहान की शादी कब हुई थी?
हादसे के कई साल बाद 2021 में उनकी शादी हुई थी और अब उनके बच्चे भी हैं।
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